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दिल्ली विश्वविद्यालय में युवा संगम फेज-7 के अंतर्गत एक भारत श्रेष्ठ भारत के रंगों से सराबोर हुआ कैंपस

नई दिल्ली : शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की प्रमुख पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत’ (EBSB) के अंतर्गत दिल्ली विश्वविद्यालय में युवा संगम के सातवें चरण (Yuva Sangam Phase-7) में तमिलनाडु से आए 55 सदस्यीय टीम को दिल्ली में विभिन्न स्थानों का दौरा कराया गया । युवा संगम फेज- 7 की टीम को दिल्ली हाट, इंडिया गेट , लाल किला , दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज आदि का दौरा कराया गया । आज के दौरे के दौरान फूड फेस्टिवल, हस्तकला प्रदर्शनी , भाषा संगम , ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण और मेरी संस्कृति मेरा गौरव विषय पर छात्रों ने कैंपस में युवा संवाद का आयोजन किया । दिल्ली विश्वविद्यालय की युवा संगम फेज 7 के नोडल ऑफिसर प्रोफेसर केपी सिंह , संयुक्त निदेशक गाँधी भवन , प्रोफेसर हंसराज सुमन, प्रोफेसर चारू कालरा , प्रोफेसर मनोज कुमार कैन , डॉ.ज्ञानेंद्र सिंह , डॉ.अनिरुद्ध कुमार सुधांशु , डॉ.मनीष कुमार , डॉ.आलोक कुमार , डॉ.अनवर जहां , डॉ. अनंथि वासुदेवन ,डॉ.बसंता वी गौरी आदि है । बता दें कि इस 7 दिवसीय आवासीय कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु के 55 सदस्यीय युवा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा गठित टीम में शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन किया जा रहा है । इस वर्ष के युवा संगम का विशेष फोकस युवाओं को अपनी संस्कृति से अवगत कराना रखा गया है।

कार्यक्रम के चौथे दिन का मुख्य आकर्षण हरियाणा-पंजाब की एकता का संदेश देना रहा । गांधी भवन के निदेशक एवं युवा संगम के नोडल ऑफिसर प्रो.के.पी.सिंह ने तमिलनाडु से आए विद्यार्थियों का आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा, आप किसी अलग स्थान पर नहीं आए हैं, आप भारत के एक सुंदर हिस्से से दूसरे हिस्से में आए हैं। दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश और गुजरात आदि देश के किसी भी हिस्से में जाएँ, वहाँ अभिव्यक्तियां अलग हो सकती हैं, भाषाएं अलग हो सकती हैं; लेकिन हर जगह देश वही है, लोग वही हैं; यही हमारे देश की खूबसूरती है। उन्होंने देश की संस्कृति में तमिलनाडु के बड़े योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि तमिल भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषा है, जिसमें असाधारण साहित्य, शास्त्रीय संगीत, भक्ति और परंपराओं की विशिष्ट विशेषताएं विद्यमान हैं। वसुधैव कुटुम्बकम् की परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने तमिल विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे दिल्ली प्रवास के दौरान यहाँ से कम से कम 5 पक्के मित्र बनाकर जाएं और उनके संपर्क में रहें।

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह अपने देश को प्यार करे, उसे गहराई से जाने और हर संभव तरीके से विकास की राह पर आगे ले जाए। उन्होंने कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना का मूल आधार बताया और कहा कि यह महज एक यात्रा नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों को भाषाई और सांस्कृतिक रूप से आपस में जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान है । गिद्दा और तमिल लोक नृत्यों की प्रस्तुति से बिखरे संस्कृति के रंग इस यात्रा को यादगार बनाने के लिए डीयू के विभिन्न कॉलेजों में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज और अदिति महाविद्यालय के छात्रों ने पंजाब के पारंपरिक लोक नृत्य गिद्दा और अन्य लोक नृत्यों की ऊर्जावान प्रस्तुतियां दीं, जिसने मेहमान छात्रों को उत्तर भारत की जीवंत संस्कृति से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का एक अन्य विशेष और भावुक कर देने वाला आकर्षण अदिति महाविद्यालय में पढ़ रहे तमिलनाडु के छात्रों द्वारा दी गई नृत्य प्रस्तुति रही। दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे इन तमिल छात्रों ने मंच पर अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि दिल्ली समूचे भारत का प्रतिनिधित्व करती है और यहाँ सभी का घर है। यह आयोजन विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृतियों, परंपराओं और विचारों के बीच भावनाओं का एक अनूठा संगम बन गया।

ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण से जाना भारत का गौरवशाली इतिहास — प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ तमिल विद्यार्थियों के इस दल के लिए दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों के शैक्षणिक भ्रमण का भी आयोजन किया गया। छात्रों ने लाल किला, कुतुब मीनार, राष्ट्रीय संग्रहालय और इंडिया गेट जैसे प्रतिष्ठित स्थलों का दौरा किया। इस भ्रमण का उद्देश्य दक्षिण भारत से आए इन युवाओं को देश की राजधानी के ऐतिहासिक महत्व, अद्वितीय स्थापत्य कला और भारत के गौरवशाली इतिहास से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना था।

छात्रों को संबोधित करते हुए संयुक्त निदेशक गाँधी भवन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहा कि — युवा संगम केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत को जीने का अनुभव है। जब हरियाणा का युवा तमिलनाडु की भाषा सीखेगा और पूर्वोत्तर का युवा दिल्ली की विरासत को जानेगा, तभी एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने कहा कि भारत की साझा संस्कृति है जो हर राज्य में पाई जाती है, हमारी इस संस्कृति में हर कोई रच बस जाता है , उसे हम अपना बना लेते हैं । उन्होंने कहा कि आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में इन छात्रों ने हरियाणा पंजाब एकता का परिचय दिया है और यही एकता तमिलनाडु के 55 सदस्यीय टीम ने यहाँ आकर बहुत कुछ सीखा है और हमारे छात्रों ने इसने सीखा है । सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रोफेसर गुरमोहिंद्र सिंह , प्रोफेसर भावना पाण्डेय , प्रोफेसर नीनू कुमार , डॉ.सुनील वर्मा , डॉ.अमरेंद्र पाण्डेय आदि भी उपस्थित रहे । विभिन्न विभागों, कॉलेजों से आए शिक्षकों , डीन , प्रिंसिपल, निदेशकों का धन्यवाद ज्ञापित प्रोफेसर हंसराज सुमन ने किया ।

 

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