पत्रकारिता में संवाद एवं सूचनाओं का माध्यम है फोटोग्राफी’’

गोरखपुर : राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में ’’फोटोग्राफी अभिव्यक्ति का माध्यम’’ विषयक चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के तृतीय दिवस पर व्याख्यान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के वरिष्ठ शिक्षक एवं प्रसिद्ध फोटोग्राफर सुरेंद्र कुमार यादव ने अपने फोटोग्राफी के समृद्ध अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। उन्होंने अपने फोटोग्राफी सफर के दौरान खींची गई विविध चित्रों को प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को फोटोग्राफी के तकनीकी एवं रचनात्मक पहलुओं से अवगत कराया। उनके अनुभवों ने प्रतिभागियों को न केवल प्रेरित किया, बल्कि फोटोग्राफी के प्रति उनकी समझ को भी विस्तार दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रयागराज कुम्भ एवं 1993 ई. में प्रयागराज की आधुनिकता की तस्वीर को भी साझा किया गया।
द्वितीय सत्र में गोरखपुर के युवा पत्रकार फोटोग्राफर संगम दुबे द्वारा “पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य में फोटोग्राफी का महत्व एवं प्रभाव” विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि समाचार फोटोग्राफी केवल दृश्य प्रस्तुति तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समाज की वास्तविकताओं, घटनाओं और संवेदनाओं को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करने का माध्यम है। उन्होंने अपने व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर स्पष्ट किया कि एक प्रभावशाली समाचार छायाचित्र में समयबद्धता, सटीकता, संवेदनशीलता एवं नैतिकता का विशेष महत्व होता है। श्री दुबे ने विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित महत्वपूर्ण छायाचित्रों को उदाहरण स्वरूप प्रस्तुत करते हुए उनके पीछे की परिस्थितियों, चुनौतियों एवं निर्णय-प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किसी भी महत्वपूर्ण घटना के दौरान सही क्षण को पहचानना एक सफल फोटो-पत्रकार की प्रमुख विशेषता होती है। साथ ही, उन्होंने प्रकाश, एंगल, फ्रेमिंग एवं विषय-वस्तु के चयन के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रतिभागियों को व्यवहारिक सुझाव प्रदान किए। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि फोटो पत्रकारिता में निष्पक्षता एवं जिम्मेदारी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि एक चित्र समाज में व्यापक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि फोटोग्राफी के माध्यम से वे समाज के सकारात्मक बदलाव में योगदान दे सकते हैं तथा जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने दोनों विशेषज्ञों के अनुभवों से सीख प्राप्त की तथा फोटोग्राफी के विविध आयामों को समझा। यह कार्यशाला विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हो रही है।
कार्यक्रम के संयोजक के रूप में डॉ0 यशवन्त सिंह राठौर, उप निदेशक, राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा अवगत कराया गया कि फोटोग्राफी एक ऐसा माध्यम है जो हमारे इतिहास एवं वर्तमान को भविष्य के लिए सुरक्षित करती है। फोटोग्राफी के माध्यम से किसी क्षेत्र विशेष प्रदेश या देश की विकास यात्रा को समझा जा सकता है। एक फोटोग्राफ अपनी विषय वस्तु के माध्यम से कई शताब्दियों के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। विकास की यात्रा में पुरातत्विक एवं इतिहासिक स्थलों से सम्बन्धित प्राचीनतम फोटोग्राफ उनके संरक्षण संवर्द्धन में सहायक सिद्ध होते हैं।
धरोहर संग्रह प्रदर्शनी के संग्रहकर्ता श्री हिमांशु कुमार सिंह ने अवगत कराया कि आज प्रदर्शनी को बड़ी संख्या में जनमानस द्वारा अवलोकित किया गया है। मुख्य रूप से वरिष्ठ रोटेरियन श्री ए0डी0 अग्रवाल, रोटेरियन राकेश धर द्विवेदी, डॉ0 विपिन बिहारी शर्मा, प्रवीण शास्त्री, सहारनपुर से बाबा गुरूदेव सिंह जी, तरनतार सिंह, सीमा सोनी, सिद्धनाथ चतुर्वेदी, डॉ0 अमरनाथ जायसवाल, हैप्पी लाइफ फाउण्डेशन के मंजीत सिंह आदि द्वारा प्रदर्शनी की सराहना की गयी।
फोटोग्राफी कार्यशाला का चतुर्थ दिवस का व्याख्यान एवं प्रशिक्षण श्री अनिल रिसाल सिंह, सुप्रसिद्ध वरिष्ठ फोटोग्राफर लखनऊ द्वारा दिनांक 04 मई, 2026 को पूर्वान्ह् 10ः30 बजे से अपरान्ह 01ः30 तक दिया जायेगा। अपरान्ह 02ः00 कार्यक्रम समापन अवसर पर माननीय विधायक गोरखपुर ग्रामीण श्री विपिन सिंह, की उपस्थिति में धरोहर संग्रह प्रदर्शनी एवं कार्यशाला से सम्बन्धित पुरस्कार एव प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम सम्पन्न किया जायेगा।


