राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा, व्यवस्था परिवर्तन और वैचारिक पुनर्जागरण का आह्वान,*
एडवोकेट अनिल कुमार मिश्र ने लखनऊ में की संगठन की औपचारिक घोषणा

लखनऊ। लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा के संरक्षक एवं अध्यक्ष एडवोकेट अनिल कुमार मिश्र ने संगठन की औपचारिक घोषणा करते हुए देश के वर्तमान परिदृश्य पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मोर्चा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि देश में बुनियादी व्यवस्था परिवर्तन का एक संकल्प है। अनिल कुमार मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्र अराजक कानूनों और तानाशाही रवैये से त्रस्त है। देश आज केवल आर्थिक या राजनीतिक चुनौतियों से ही नहीं, बल्कि गहरे नैतिक और वैचारिक संकट से भी जूझ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में बढ़ते अन्याय और असंतुलन ने एक ऐसे विकल्प की आवश्यकता उत्पन्न कर दी है, जो केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित न रहे, बल्कि समूची व्यवस्था के कायाकल्प का बीड़ा उठाए।
आरक्षण और एट्रोसिटी एक्ट जैसे संवेदनशील विषयों पर अपना प्रखर दृष्टिकोण रखते हुए उन्होंने कहा कि इन कानूनों के माध्यम से देश में योग्यता का निरंतर दमन हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्रतिभा पलायन जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यूजीसी जैसे संस्थानों के माध्यम से बनाए जा रहे नियम सवर्ण समाज के भविष्य को कुचलने का एक षड्यंत्र हैं। मोर्चा इन भेदभावपूर्ण कानूनों को जड़ से समाप्त करने और समान न्याय की स्थापना के लिए एक देशव्यापी अभियान चलाएगा।
मोर्चे के दृष्टिकोण में पर्यावरणीय संरक्षण भी एक मुख्य स्तंभ है। अरावली पर्वतों के दोहन और अंडमान में विकास के नाम पर हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति का शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि पिछले 78 वर्षों में सनातन संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया गया है। यह मोर्चा सांस्कृतिक क्षरण के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा होगा।
इस कार्यक्रम के मौके पर सिराज साहिल संरक्षक एवं अध्यक्ष, लिबरल पार्टी ने आज लिबरल पार्टी का राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा को समर्थन दिया, कोई चुनावी समझौता नहीं, बल्कि देश की करोड़ों उम्मीदों का एक मंच पर आना है। हमने सत्ता की मलाई के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था की सच्चाई बदलने के लिए हाथ मिलाया है। मेरा मानना है कि लोकतंत्र केवल कागजों पर नहीं, बल्कि शासन की हिस्सेदारी में दिखना चाहिए। हमारा सीधा मंत्र है, जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। हम एक ऐसी नींव रख रहे हैं जहाँ नेतृत्व का फैसला बंद कमरों में नहीं, बल्कि जनता की बहुसंख्या के आधार पर तय होगा। जहाँ आबादी बड़ी होगी, मुख्यमंत्री भी वहीं का होगा। हमारा यह कारवां अब यूपी की गलियों से निकलकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक गूँजेगा। हम राजनीति को ड्राइंग रूम से निकालकर खेत-खलिहानों तक ले जाएंगे। यह अन्याय के विरुद्ध एक वैचारिक क्रांति का शंखनाद है। हम एक ऐसा भारत बनाएंगे जहाँ योग्यता को सम्मान मिले और हर वर्ग को उसका अपना हक।
अंत में, उन्होंने देशवासियों से तीखा आह्वान किया कि अब मौन रहने का समय समाप्त हो चुका है। उन्होंने इसे अधर्म के विरुद्ध धर्मयुद्ध की संज्ञा देते हुए कहा कि हर नागरिक को एक न्यायपूर्ण, सशक्त और समरस भारत के निर्माण में अपनी निर्णायक भूमिका निभानी होगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से सी. बी. पांडेय, जुगल किशोर तिवारी, मंजू शुक्ल, अभिनव सिंह, सिराज साहिल, सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन पंकज त्रिपाठी द्वारा किया गया।


