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लखनऊ का झंडे वाला पार्क

के. सरन

लखनऊ के अमीनाबाद क्षेत्र के निर्माण और विकास में बाबू गंगा प्रसाद वर्मा का बहुत बड़ा हाथ था। सआदत गंज का निवास छोड़ने के बाद उन्होंने अमीनाबाद क्षेत्र में ही अपना निवास स्थान बनाया । 5 जनवरी 1910 में वे विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए। लखनऊ म्युनिसिपालिटी के प्रमुख मेंबर भी रहे।यू०पी० में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापकों में भी उनका नाम शामिल था। अमीनाबाद में स्थित महिला डिग्री कॉलेज नामक शिक्षा संस्थान उनके सहयोग से ही सामने आ सका था ।
अमीनाबाद उनकी अवधारणा और उनके नक्शे पर निर्मित हुआ है। मशहूर इतिहासविद डॉ योगेश प्रवीन ने लखनऊ के इतिहास पर बहुत कुछ लिखा है। उनकी किताबों में लिखा हैं कि झंडा वाला पार्क, घंटाघर, गड़बड़ झाला मार्केट आदि के निर्माण के साथ गंगा प्रसाद वर्मा ने अपने चचेरे भाई छेदीलाल टंडन के नाम पर ही छेदी लाल धर्मशाला भी बनवाई थी जो झंडे वाला पार्क के उत्तर जगत सिनेमा के बगल में आज भी स्थित है। इसका उद्घाटन 1914 में सूबे के तत्कालीन गवर्नर ने किया था । इसके बगल में ही उन्होंने एक सार्वजनिक सभागार और वाचनालय बनवाने के लिए, पंडित मदन मोहन मालवीय से इस इमारत की न्यू रखवाई थी। 1914 को वर्मा जी के देहांत हो जाने के बाद सर तेज बहादुर सप्रू ने इस पुस्तकालय का निर्माण पूरा करवाया।

इसे गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल लाइब्रेरी या पुस्तकालय कहा जाता है। उनके द्वारा सआदतगंज में भी एक लाइब्रेरी उनके सआदत में निवास के दौरान स्थापित की गई थी, उसे भी गंगा प्रसाद वर्मा मेमोरियल लाइब्रेरी में समाहित कर दिया गया था । वर्तमान में इस लाइब्रेरी में लगभग 60000(साठ हजार) किताबें हैं ।अमीनाबाद की गंगा प्रसाद वर्मा स्मारक हॉल में, 20 वीं सदी के सभी प्रख्यात कवि और नामवर शायर अपना काव्य पाठ कर चुके हैं।
अमीनाबाद का झंडेवाला पार्क अमीनाबाद के बीचों बीच है और लगभग 3 सौ साल पहले जब यह इलाका रानी जय कुंवर पांडे का था जो उस समय बाग की शक्ल में था और बाग पड़ाईन कहलाता था। उस समय वहां पड़ाईन की मस्जिद और उनकी दोस्त खदीजा खानम की कब्र इसके पास बनी थी जो आज भी बनी है। 19वीं सदी में अमजद अली शाह के वजीर इमदाद हुसैन खान ने इसे अपनी जागीर घोषित किया तबसे यह इलाका इमदाद बाग कहा जाने लगा।
अंग्रेजी शासन काल के दौरान जब अमीनाबाद का पुनर्निर्माण हुआ तो इसको अमीनुदौला पार्क का नाम मिला और इसे सार्वजनिक सभा स्थल के तौर पर प्रयोग किया जाने लगा। बाद में 1921 में जब महात्मा गांधी लखनऊ आए तो उन्होंने इसी पार्क में एकत्रित लगभग 1 लाख लोगों के जन समूह को संबोधित किया और 1928 में साइमन कमीशन के विरोध में यहां पंडित मोतीलाल नेहरू और पंडित गोविंद बल्लभ पंत जो भारत के जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बाद में हुए अपना भाषण दिया था 26 जनवरी सन 19 30 को यहीं पर नमक कानून तोड़कर नमक बनाया गया था और अगस्त 1935 को यहां पहली बार तिरंगा फहराते हुए ब्रिटिश सेवा का की गोली खाकर गुलाब सिंह लोधी शहीद हुए थे तभी से बार-बार झंडा रोहण और गिरफतारियों के कारण ही इसका नाम झंडेवाला पार्क पड़ा।

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