साहित्य साधक साहित्यिक संस्थान द्वारा साहित्यकार द्वारिका प्रसाद रस्तोगी’ सम्मानित

लखीमपुर (खीरी ) : साहित्य साधक सामाजिक ,साहित्यिक एवं सांस्थान की मार्च माह की मासिक काव्य गोष्ठी व सम्मान समारोह का आयोजन जिलाअध्यक्षा डा. स्वाति पाण्डेय प्रीत के निवास 72, काशी नगर लखीमपुर खीरी में सम्पन्न हुआ । इस कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ से पधारे साहित्यकार राजुल मेहरोत्रा ने की ।
संस्था द्वारा दिया जाने वाला मासिक साहित्य साधक अर्श सारस्वत सम्मान गोला से आये साहित्यकार द्वारिका प्रसाद रस्तोगी ( प्रांतीय महामंत्री ,अखिल भारतीय साहित्य परिषद ) को प्रदान किया गया । समारोह का कुशल संचालन संजीव मिश्र “व्योम” ने किया। सभी मंचस्थ मनीषियों सहित डाॅ० स्वाति पाण्डेय, “”प्रीत” , बी पी मिश्र बेधड़क, ने दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती पूजन किया। कमलेन्द्र शुक्ला दुर्वासा द्वारा वाणी वंदना के सुमधुर वाचन के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
कार्यक्रम में कवि मनीषियों ने अपनी शानदार काव्य प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं का दिल जीत लिया। गोष्ठी में सम्मानित द्वारिका प्रसाद रस्तोगी जी ने ” चंद्र भाल त्रिपुरारी शीश बीच धारे गंग , कर मे त्रिशूल सोहे मृगछाल न्यारी है “पढा । गोला से आये साहित्यकार बी पी मिश्र बेधड़क ने ‘ हंसी लिखो ,अच्छी लिखो सभी काटेंगे याद । मंचों पर मिलने लगी नंगेपन को दाद’ पढ़ कर समा बांधा । अवधी कवि कमलेन्द्र शुक्ला दूर्वासा ने ” मिलिगे आरक्षण मा बारी बिटिया महिला बैगे राम ” सूनाया । सत्येन्द्र द्विवेदी गवार ने ” खुशी हमने चाही , उदासी मिली है , जल में भी मछली प्यासी मिली ” मुक्तक पढ़ कर समा़ं बांध दिया ।
डॉ स्वाति पांडेय “प्रीत” ने — ‘जब जब तेरी याद सताती ,तेरे नाम लिखू एक पाती ‘ गीत पढा व घरवाली के खौफ से तर तर काँपे देह , तभी पड़ोसन से पिया जता न पाते नेह ” कुण्डलिया छन्द पढ़ कर तालियां बटोरी।
डॉ रघुनन्दन झा ने अंधेरों पर जय ही मंजिल हमारी , एक नन्हे दिये की बडी़ रोशनी में ‘ सुनाया व गीता के ज्ञान पर वक्तव्य दिया । महेश जायसवाल ने ” पाला सदा जिसे दिल का टुकडा़ समझ कर, मां छोड़ कर बीवी पर मेहरबान हो गया सुना कर वाह वाही लूटी । सुरेश सौरभ ने लघु कथाएं ‘लिफाफे ‘व’ अनकही आहे ‘ सुना कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया । डी के स्वंतंत्र ने ‘ फिर लगा हाथ उनके हंसी खत पुराना’ गीत पढ़ा । शायर जे पी नाचीज़ ने ‘मेरे किरदार से वो जलता है , सच कहूं ये मेरी सफलता है ‘कलाम सुनाया । हास्य कवि विशेष शर्मा ने “प्रगतिशील कत्ता भये कैसै जताई , का पावा का ख्वावा सुनो मोर भाई ” पढा। ओज़ कवि शशिकान्त ने ‘ मन प्रसन्न हो बारिश से सब मौत दिलाने आएंगे ‘ सुनाया । अनुराग पटेल ने ‘ गीत भजनो की स्वयं जो तान साधे , खाट पर बाबा सुशोभित हो रहे हैं’ सुनाया ।
संचालन कर रहे कवि संजीव मिश्र व्योम ने ‘आप पहाड़ो से गिर कर उठ खड़े हुए, इतनी उचाई से गिर कर जिंदा है ? रचना सुना कर समां बांध दिया । मुख्य अतिथि राजुल मेहरोत्रा ने “यह दुनिया हमी दोनो के सहारे चल रही है हमारी जिंदगी तुम्हारी दाल साथ साथ गल रही है” रचना पढी़ ।
मुख्या अतिथि ने कार्यक्रम की सफलता हेतु अध्यक्ष स्वाति जी को बधाई दी व सभी काव्य प्रस्तुतियों की सराहना की | इसके अतिरिक्त गोष्ठी मे आए अनंय कवियों ने गीत गजल छंद एवं मुक्तकों से सबको भाव विभोर कर दिया।
कार्यक्रम में पत्रकार रजनीश शुक्ल , ओम् प्रकाश बाजपेयी, देवी चरण मिश्र , अक्षरा पांडेय ,आयुष पाण्डेय , मधु गुप्ता ,कुशाग्र गुप्ता ,अमित पाण्डेय , दिव्या गुप्ता आदि उपस्थित रहे । मुख्य अतिथि जी ने काव्य गोष्ठी की समीक्षा की । संस्था की ओर से डॉ रघुनन्दन झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया व सभी की भूरि भूरि प्रशंसा की ।



