अरबिंदो कॉलेज महक 2026 के साथ खिल उठा
पश्चिमी संगीत की धुनों पर खूब थिरके छात्र

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध अरबिंदो कॉलेज के वार्षिक कल्चरल फेस्ट महक — 26 के दूसरे दिन बड़े उत्साह के साथ शुरू हुआ और इस बहुप्रतीक्षित फेस्ट का औपचारिक उद्घाटन हुआ। कॉलेज कैंपस में ज़बरदस्त ऊर्जा, रंग और रचनात्मकता की गूंज सुनाई दी । छात्र की टीमें दिल्ली एनसीआर के अलग-अलग विश्वविद्यालयों से छात्र कला, संस्कृति और युवा अभिव्यक्ति का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए । दूसरे दिन के भव्य उद्घाटन समारोह में कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. अरुण चौधरी, गवर्निंग बॉडी की चेयरपर्सन प्रो. अनन्या घोष दस्तीदार, कल्चरल कमेटी की संयोजक डॉ. हेमा नागपाल और स्टूडेंट यूनियन के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अपने संबोधन में, प्रिंसिपल ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की थीम ‘शांति, प्रेम और सद्भाव’ के महत्व पर ज़ोर दिया और अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्रों के बीच एकता, आपसी सम्मान और रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा देने में कल्चरल मंचों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस दिन के लिए एक प्रेरणादायक माहौल तैयार किया, जिससे प्रतिभागियों को न केवल प्रतियोगिताओं में, बल्कि सार्थक कल्चरल आदान-प्रदान में भी शामिल होने का प्रोत्साहन मिलता है । उन्होंने यह भी बताया कि दूसरे दिन के उद्घाटन समारोह में एकजुटता की भावना झलक रही है और यह कलात्मक प्रतिभा और जोशीली भागीदारी से भरे एक दिन की शुरुआत का प्रतीक था। उन्होंने समिति के प्रयासों की सराहना की और फेस्ट की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।
मोक्ष संस्था के संयोजक प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया कि कॉलेज कैंपस में कई तरह की प्रतियोगिताएं हुईं, जिसमें दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के अलग-अलग कॉलेजों से आए प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। भागीदारी के पैमाने और विविधता ने महक की स्थिति को एक जीवंत कल्चरल मंच के रूप में फिर से स्थापित किया, जो प्रतिभा और रचनात्मकता को निखारता है। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन हुई प्रतियोगिताओं में वेस्टर्न डांस प्रतियोगिता, स्वररागिनी: सेमी-क्लासिकल सोलो सिंगिंग प्रतियोगिता, छलावा: क्राफ्ट मेकिंग प्रतियोगिता, एस्थेटिका (क्रिएटिव आर्ट सोसाइटी) द्वारा प्रदर्शनी, रंगमाया: रंगोली मेकिंग प्रतियोगिता, नृत्यांगना: सोलो/डुएट क्लासिकल डांस प्रतियोगिता, अक्स या अस्तित्व: पेंटिंग प्रतियोगिता, हेवन: द बैटल ऑफ़ बैंड्स, और बिहाइंड द लेयर्स: डिजिटल आर्ट प्रतियोगिता शामिल थीं। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को अपनी कलात्मक उत्कृष्टता दिखाने और रचनात्मकता को अलग-अलग रूपों में व्यक्त करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान किया।
प्रोफेसर सुमन ने आगे बताया कि वेस्टर्न डांस प्रतियोगिता ने अपनी ज़बरदस्त ऊर्जा वाली प्रस्तुतियों, तालमेल से भरी कोरियोग्राफी और नए विषयों के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतिभागियों ने मंच पर एक नई जान डाल दी, जिससे निर्णायक और दर्शक, दोनों ही मंत्रमुग्ध हो गए। इस बीच, ‘स्वररागिनी: सेमी-क्लासिकल सोलो सिंगिंग कॉम्पिटिशन’ ने एक सुरीला माहौल बना दिया, जिसमें प्रतिभागियों ने दिल को छू लेने वाली प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें शास्त्रीय बारीकियों और समकालीन सोच का सुंदर मेल देखने को मिला। विज़ुअल आर्ट्स (दृश्य कला) का हिस्सा भी उतना ही प्रभावशाली था, जिसमें ‘छलावा: क्राफ़्ट मेकिंग कॉम्पिटिशन’, ‘रंगमाया: रंगोली मेकिंग कॉम्पिटिशन’ और ‘अक्स या अस्तित्व: पेंटिंग कॉम्पिटिशन’ ने ज़बरदस्त रचनात्मकता और बारीकियों पर ध्यान देने की कला का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने साधारण चीज़ों को कलात्मक अभिव्यक्तियों में बदल दिया, जो उनकी नवीनता और सांस्कृतिक गहराई दोनों को दर्शाती थीं। ‘एस्थेटिका’ (क्रिएटिव आर्ट सोसाइटी) द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी कलात्मक कल्पना का एक जीवंत प्रदर्शनी थी, जिसने अपनी मौलिकता और सौंदर्य अपील के लिए दर्शकों से खूब सराहना बटोरी।
प्रोफेसर सुमन ने बताया कि दोपहर के बाद शास्त्रीय कलाओं का उत्सव ‘नृत्यांगना: सोलो/डुएट क्लासिकल डांस कॉम्पिटिशन’ के माध्यम से शुरू हुआ जहाँ कलाकारों ने अपनी अदा, बारीकी और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में रची-बसी भावपूर्ण कहानियों के ज़रिए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दूसरी ओर, ‘बिहाइंड द लेयर्स: डिजिटल आर्ट कॉम्पिटिशन’ ने तकनीक और रचनात्मकता के मेल को उजागर किया, जो देखने में शानदार और वैचारिक रूप से समृद्ध डिजिटल कलाकृतियाँ प्रस्तुत की गई । इस उत्साह को आगे बढ़ाते हुए, ‘Haven: The Battle of Bands’ ने अपनी ज़बरदस्त म्यूज़िकल परफ़ॉर्मेंस से माहौल में जोश भर दिया। बैंड्स ने पूरे जुनून और मौलिकता के साथ एक-दूसरे से मुक़ाबला किया, और अपनी ऊर्जा व म्यूज़िकल हुनर से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम को बहुत बारीकी से आयोजित किया गया था, जो आयोजन समिति और छात्र स्वयंसेवकों के समर्पण, तालमेल और अथक प्रयासों को दर्शाता है ।
प्रोफेसर सुमन का कहना है कि जैसे-जैसे दिन ढलकर शाम में बदला, एक मनमोहक सूफी संगीत कार्यक्रम के साथ इस उत्सव का माहौल और भी ज़्यादा भावपूर्ण और शांत हो गया। शाम पूरी तरह से ‘सूफीनामा’ के रंग में रंग गई थी, जिससे एक ऐसा जादुई माहौल बन गया जिसमें दर्शक सूफी संगीत की गहराई और आध्यात्मिकता में पूरी तरह डूब गए। इन परफ़ॉर्मेंस ने, दिन भर चली रंगारंग गतिविधियों का एक बेहतरीन समापन किया, और वहाँ मौजूद सभी लोगों के बीच शांति और एकता का भाव जगाया।कुल मिलाकर — 26 के दूसरे दिन का कार्यक्रम ज़बरदस्त सफल रहा, जिसकी पहचान उत्साहपूर्ण भागीदारी, असाधारण प्रतिभा और त्रुटिहीन आयोजन से हुई। इसने न केवल छात्रों को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान किया, बल्कि प्रतिभागियों के बीच एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भावना को भी बढ़ावा मिला । उनका कहना है कि इतनी प्रेरणादायक और ऊर्जावान शुरुआत के साथ, यह उत्सव आने वाले दिनों में और भी अधिक उत्साह और यादगार अनुभवों का वादा करता है। उन्होंने बताया है कि बुधवार को समापन समारोह के अवसर पर तीन चले महक कार्यक्रम में प्रतियोगिताओं में भाग लिए छात्रों को सम्मानित किया जाएगा ।



