30 साल से नीचे की उम्र के नौजवान तो पुराने लखनऊ के मुहल्लो के नाम तक नहीं जानते
लखनऊ का संक्षिप्त इतिहास

के. सरन
लखनऊ में इतनी बस्तियां और मुहल्ले हैं कि लखनऊ मे रहते पूरी जिन्दगी गुजर जाती है पर लोगो को बगल के मुहल्ले का ही नाम नही मालूम हो पाता।
लखनऊ जिसे दुनिया में नवाबों के शहर के रुप मे आज
भी जाना जाता है अब बिल्कुल बदल चुका है।
इसका विस्तार इसकी सरहद से चारों ओर जुड़े जिलों तक होता जा रहा है। पिछले 50 वर्षौ में यहां इतनी बस्तियां इतने नगर बस चुके हैं कि मूल लखनऊ उसका अपनापन ,सभ्यता और संस्कृति विलुप्तप्राय हो चुके हैं।
मूल लखनऊ जिसे अब पुराना लखनऊ कहा जाता है जिसका दिल अमीनाबाद दिमाग चौक चेहरा हजरतगंज हाथ चारबाग और पैर चिनहट आलमबाग थे,पता नहीं कहां खो गए हें?
हमारी पीढी के लोग भले ही पुराने लखनऊ के मुहल्लो के नाम जानते हों पर 30 साल से नीचे की उम्र के नौजवान तो इनके नाम तक नहीं जानते।उन्हे ऐशबाग, नाका हुसैनाबाद, हुसैनगंज,गनेशगंज, टूडियागंज,नक्खास आदि बडे मुहल्लों के नाम नही मालूम होंगे तो लखनऊ के छोटे- छोटे मुहल्लों और हातों के नाम आज की युवा पीढ़ी कैसे जान
पाएगी?
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