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मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना गांधी के विचारों को मिटाने की साजिश : सुनील सिंह

लखनऊ : मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम बदले जाने की चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह केवल नाम बदलने का मुद्दा नहीं, बल्कि गांधी के ग्राम स्वराज, श्रम सम्मान और गरीब के अधिकार को मिटाने की साजिश है।

लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि महात्मा गांधी ने जिस भारत की कल्पना की थी, उसकी नींव गांव, श्रम और आत्मनिर्भरता पर टिकी थी। मनरेगा उसी सोच का परिणाम है। अगर सरकार इस योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने की हिम्मत की है, तो यह साफ है कि सत्ता को न गांधी स्वीकार हैं, न उनका दर्शन। पहले मनरेगा को कमजोर किया गया, काम छीना गया, भुगतान रोका गया और अब गांधी का नाम हटाने की बात की जा रही है। यह सुधार नहीं, इतिहास और विचारधारा को मिटाने का अभियान है।”
लोकदल अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि
जब मजदूरों को 60 दिनों तक काम नहीं मिल रहा
जब केंद्र–राज्य का अनुपात 90:10 से घटाकर 60:40 कर दिया गया
जब राज्य सरकारें रोजगार देने में असमर्थ हो रही हैं
तो फिर सरकार गांधी के नाम से इतनी घबराई क्यों है?
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और चौधरी चरण सिंह दोनों का सपना ग्राम स्वराज था, जिसमें गांव में रोजगार हो, मजदूर को सम्मान मिले और किसान आत्मनिर्भर बने। आज सरकार उसी ग्राम स्वराज को खत्म करने पर तुली है।
मनरेगा का नाम बदल देना,यह सिर्फ नाम की लड़ाई नहीं है,
यह भारत की आत्मा, गांव और गरीब की लड़ाई है।

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