रीजेंसी ने क्रोनिक कब्ज से परेशान मरीजों के लिए नई जांच तकनीक शुरू की

लखनऊ : रीजेंसी हेल्थ लखनऊ ने अपनी पहले से ही आधुनिक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी यूनिट में एक और महत्वपूर्ण फैसिलिटी जोड़ दी है। अब यहाँ एनोरेक्टल मैनोमेट्री नाम का एक विशेष डायग्नोस्टिक टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। यह जांच पेल्विक फ्लोर डिस्सिनर्जिया जैसी समस्या की पहचान करने में मदद करती है, क्योंकि यह क्रोनिक कब्ज का एक आम लेकिन अक्सर न पहचाना जाने वाला कारण होता है।
रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष ठाकुर ने बताया कि हमने देखा है कि बायोफीडबैक थेरेपी लेने वाले मरीजों में काफी अच्छे नतीजे आए हैं। कई मरीजों ने कब्ज की दवाओं पर निर्भर रहना बहुत कम कर दिया है और उनके पेट साफ करने की क्षमता में भी साफ सुधार हुआ है।”
रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के सीनियर गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण झा ने कहा कि पेल्विक फ्लोर डिस्सिनर्जिया एक मांसपेशियों के तालमेल की समस्या है, जो सिर्फ दवाओं या खानपान में बदलाव से ठीक नहीं होती।
क्रोनिक कब्ज को अक्सर सिर्फ एक पाचन की समस्या मान लिया जाता है। लेकिन कई मरीज जो सालों तक दवाएं, एनेमा या हाथ से मल निकालने जैसे उपाय करने के बाद भी राहत नहीं पाते, असल में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की गड़बड़ी से परेशान होते हैं। यह मांसपेशियां ठीक से काम नहीं करतीं, जिससे सामान्य ढंग से पेट साफ नहीं हो पाता है।


