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एनडीएमसी क्षेत्र में फुटपाथ विक्रेताओं के अधिकार खतरे में: गैर-विक्रय क्षेत्र में एनडीएमसी सर्वेक्षण पर सवाल

नई दिल्ली ।  नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) द्वारा इंडिया गेट, रीगल, पालिका और कॉनॉट प्लेस जैसे प्रमुख क्षेत्रों से विक्रेताओं को “गैर-वेंडिंग क्षेत्रों” के आधार पर सर्वेक्षण से वंचित करने के संबंध में हाल ही में की गई कार्रवाई, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) योजना, 2019 के तहत कानूनी रूप से अनिवार्य प्रक्रियाओं का सीधा उल्लंघन है।

योजना की धारा 8.4 के अनुसार, किसी भी क्षेत्र को विक्रय या गैर-विक्रय क्षेत्र घोषित करने से पहले एक समग्र सर्वेक्षण और GPS आधारित सीमांकन अनिवार्य है। अब तक NDMC ने केवल 1,400 फुटपाथ विक्रेताओं का ही सर्वेक्षण किया है, और विक्रय क्षेत्रों की पहचान की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में किसी भी क्षेत्र को गैर-विक्रय क्षेत्र घोषित करना मनमाना, अवैध और अन्यायपूर्ण है, जो विक्रेताओं के आजीविका और प्रतिनिधित्व के अधिकार को नकारता है।

यह कार्यवाही कानून के उचित प्रक्रिया की अवहेलना है और हजारों स्ट्रीट वेंडर्स के मूलभूत अधिकारों को खतरे में डालती है, जो इन सार्वजनिक स्थलों पर निर्भर हैं। फुटपाथ विक्रेता समुदाय यह मांग करता है कि सर्वेक्षण और GPS सीमांकन की प्रक्रिया पारदर्शी रूप से पूरी की जाए।

यदि अधिकारी 2019 की योजना के प्रावधानों की अनदेखी करते हैं और फुटपाथ विक्रेताओं के अधिकारों का उल्लंघन जारी रखते हैं, तो हम इसका विरोध करेंगे और उनकी आजीविका और गरिमा की रक्षा करेंगे।

हम NDMC और संबंधित प्राधिकरणों से आग्रह करते हैं कि वे कानून का सम्मान करें, गैरकानूनी गतिविधियों को रोकें और विक्रेताओं के साथ निष्पक्ष और कानूनी तरीके से संवाद करें।

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