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कुरान की तिलावत से शुरू हुआ वारिस अली शाह का उर्स मुबारक

लखनऊ/ देवा।देश व दुनियां के मशहूर व बुजुर्ग सूफ़ी संत हज़रत वारिस अली शाह रहo का सालाना उर्स जिसकी शुरुआत इस्लामिक माह सफ़र के महीने में हो जाती है, और इस उर्स में देश के हर हिस्सों से इनके चाहने वालों का तांता लगना शुरू हो जाता है।

देवा शरीफ़ की सर ज़मी पर बुजुर्ग हस्ती, हज़रत वारिस अली शाह रहo आराम फरमा रहे हैं। इनकी मजार मुबारक पर बड़ी दूर दूर से जायरीन बड़ी अकीदत और चाहत से आते हैं, यहीं बगल में देवा शरीफ़ की मशहूर व मारूफ संस्था काशान्न ए वारिस, है जहां सूफ़ी कव्वालियों की महफ़िल के साथ साथ, चादर पोशी व लंगर ख्वानी का इंतज़ाम बड़े पैमाने पर होता है।*काशन्न.ए.वारिस के संरक्षक/अध्यक्ष अरशद मुर्तजा वारसी (भय्या जी) महासचिव मोहम्मद इमरान, तथा कोषाध्यक्ष फहमीदा वारसी व संस्था की टीम द्वारा
*काशान.ए.वारिस में, एक शानदार महफ़िल का एहतिमाम किया गया, जिस महफ़िल में उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री दानिश आज़ाद अंसारी, पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी,भाजपा क्षेत्रीय मंत्री फरहा रिज़वी, मशहूर साहित्यकार डॉक्टर सुल्तान शाकिर हाशमी, प्रिन्ट मीडिया वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अज़ीज़ सिद्दीकी, राष्ट्रीय महामंत्री परवेज़ अख़्तर, जे.प्राइम भारत के सम्पादक एन.आलम, आरएसएस न्यूज के हेड सैय्यद गुलाम हुसैन, एसबी न्यूज़ के शबाब नूर, शादाब अहमद, व जमील मलिक तथा मोहम्मद इकराम के अलावा मुख्य रूप से बाराबंकी की मशहूर हस्ती अब्दुल रहमान (लल्लू भाई) चेयरमैन शहंशाह हुसैन, चेयरमैन मोहम्मद हारून वारसी, अलका सिंह पटेल,पार्षद, रियाज़ अहमद (रिज्जू) व पार्षद उबैद वारसी, मोहम्मद यूनुस, और शमीम अहमद,मौजूद रहे। साथ ही अयान वारसी, हसन वारसी, हुसैन वारसी,मोहम्मद अमान, अब्दुल्लाह रहमान , सईद अहमद, सुनील कुमार, सुदीप कुमार, सिक्कू वसी, सूरज वारसी , छोटू, व अफाक अहमद के साथ कई गणमान्य लोग भी शामिल रहे।* इस रूहानी महफ़िल में सूफ़ी कव्वालियों के साथ हज़रत वारिस अली शाह रहo को अकीदत पेश की गई, इसके बाद इन माननीयों के साथ सैकड़ों लोग अपने सरों पर चादर व शाल लेकर बड़ी धूम धाम से मजार मुबारक पर पहुंच कर हज़रत वारिस अली शाह रहo को चादर पेश की।
*पत्रकारों से बात करते हुए, मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि ये हम लोगों के लिए फख्र की बात है कि इतनी आला हस्ती हम लोगों के उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में आराम फरमा रही है, और इनके दिए भाई चारे के संदेश को पूरा देश मान रहा है और अमल कर रहा है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, देश के हर कोने में तमाम सूफ़ी संतो की मजार मौजूद हैं, उनमें वारिस अली शाह का एक बड़ा मुकाम है, मैं यहां हमेशा आता हूं, और बड़ा सुकून मिलता है।अध्यक्ष अरशद वारसी (भय्या जी) ने कहा कि हज़रत वारिस शाह रहo और इनका उर्स मुबारक इसलिए भी पूरे देश में प्रख्यात हैं क्योंकि उनके चाहने वाले हर धर्म के लोग होते हैं, इन्होंने यही संदेश दिया है कि किसी के भी धर्म को बुरा मत कहो। हमेशा मिलजुल कर रहो। क्षेत्रीय मंत्री फरहा रिज़वी ने कहा कि हज़रत वारिस अली शाह की मजार शरीफ पर कई मर्तबा आने के बाद भी मन नहीं भरा है, और यहां बार बार आने का मन करता है। डॉक्टर सुलतान शाकिर हाशमी ने कहा इतनी भीड़ इतना मजमा देखकर महसूस होता है कि सच में कुछ तो असर है जो लोग खिंचे चले आते हैं, और अल्लाह का शुक्र है कि तमाम बुजुरगाने दीन ने हिंदुस्तान की सरजमीं को चुना और भाई चारे का एक बेहतरीन सन्देश दिया।

चादर पोशी के बाद काशांन्न ए वारिस की कोषाध्यक्ष फहमीदा वारसी के जेरे निगरानी में इनके हाथों बनाए हुए उम्दा लज़ीज़ व्यंजनों (लंगर) का लुत्फ उठाया, अन्त में अध्यक्ष अरशद मुर्तजा वारसी (भय्या जी) ने आए अतिथियों को मजार मुबारक की चादर ओढ़ाकर सबको सम्मानित किया, और आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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