नगर भ्रमण, फुलवारी प्रसंग सुन भाव विभोर हुए भक्त

लखनऊ । जंगल भ्रमण के दौरान जनकपुर में आयोजित धनुष यज्ञ में शामिल होने के लिए गुरु विश्वामित्र के साथ जब प्रभु श्रीराम व भ्राता लक्ष्मण जनकपुरी पहुंचे तो उनकी मनोहारी छवि देख सभी आश्चर्यचकित रह गए। विश्वनाथ मन्दिर के 32वें स्थापना दिवस के मौके पर श्रीरामलीला पार्क सेक्टर-“ए” सीतापुर रोड योजना कालोनी में चल रहे मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को कथा व्यास आचार्य गोविंद मिश्रा ने नगर भ्रमण, फुलवारी प्रसंग सुनाया।

उन्होंने बताया कि जिस समय प्रभु श्रीराम पुष्प लेने के लिये पुष्प वाटिका में पहुंचे उसी समय माता सुनैना की आज्ञा पाकर मैया सीता भी गौरी का पूजन करने के लिये वहां पधारी। गौरी का पूजन करके मैया सीता श्रीराम को ही अपने पति के रूप में प्राप्त करने की इच्छा मां से प्रकट करती हैं। कथा व्यास ने कहाकि फुलवारी की कथा प्रेम और संस्कृति की कथा है। संकट के समय प्रभु श्रीराम के स्मरण मात्र से मनुष्य के सारे संकट पलक झपकते दूर हो जाते है।
नगर भ्रमण का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम और लक्ष्मण परब्रह्म है यह सोचकर सखियों ने राम और लक्ष्मण के ऊपर पुष्पवर्षा कर आदर पूर्वक परस्पर एक-दूसरे से उनकी चर्चा भी की। फिर भी भगवान राम ने छतों पर खड़े होकर निहार रही मिथिला की नारियों की ओर नहीं देखा। कथा व्यास ने कहा कि यदि आज के युवा श्रीराम कथा के इस प्रसंग से अपने जीवन में भी चरित्रवान बनने का संकल्प लेते तो हमारे देश में बहु बेटियों पर हो रहे अत्याचार, दुष्कर्म जैसी घटनाओं पर नियंत्रण लग जाता।



