चुनाव आयोग की इस लापरवाही को लोकतंत्र के चुनावों के महापर्व के साथ क्रूर मजाक :सुरेन्द्र नाथ त्रिवेदी

लखनऊ : राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेन्द्र नाथ त्रिवेदी ने आम चुनावों में मतदाता सूची में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की त्रुटियों पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों से विभिन्न मोहल्लों के निवासियों के नाम न होना अथवा एक ही परिवार के सभी सदस्यों के नाम न होना या पुरुष मतदाता के पिता और महिला मतदाताओं के पति के नाम गलत होना आम बात है | हैरत तो तब होती है जब वर्षों पहले दिवंगत हो चुके लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज मिलते हैं. चुनाव आयोग की इस लापरवाही को लोकतंत्र के चुनावों के महापर्व के साथ क्रूर मजाक कहा जा सकता है |
श्री त्रिवेदी ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग तथा भारत निर्वाचन आयोग प्रदेश एवं देश की संवैधानिक संस्थाएं हैं और इन्हें लोकतांत्रिक महापर्वों के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी होना चाहिए | इनकी संवेदनहीनता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि चुनाव वाले दिन ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा विभिन्न पोलिंग स्टेशनों पर होने वाले असंतोष और मतदाता सूची में नाम गायब होने की खबरें प्रमुखता से दिखाई जाती हैं और दूसरे दिन सभी अखबारों में इसी प्रकार की खबरें प्रकाशित की जाती हैं | देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक बार भी चुनाव आयोग ने अपनी इस अपार भूल के लिए खेद नहीं प्रकट किया है जो सर्वथा निन्दनीय है |
प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग के सभी अधिकारी और कर्मचारी स्थायी रूप से कार्यरत रहते हैं परन्तु इस प्रकार की अक्षम्य त्रुटि के प्रति उदासीन रवैया बनाये रहते हैं |प्रत्येक पांच वर्ष बाद सम्पन्न होने वाले चुनाव में आधिकारिक मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करना देश के नागरिकों पर कुठाराघात एवं अक्षम्य अपराध है | जिस देश में लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ न्यायपालिका के न्यायमूर्ति एवं प्रमुख न्यायमूर्तियों द्वारा विभिन्न अपराधों पर स्वत: दृष्टिपात करके अपराधियों को दण्डित किया जाता हो उसी देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था एक चुनाव सम्पन्न होने के बाद अचेतन अवस्था में चली जाती है | आखिर हमारे प्रदेश और देश की सरकारें लोकतंत्र के इस क्रूर मजाक को कब दूर करने की पहल करेंगी?


