पूरी दुनिया में शासन चलाने के दो तरीके हैं लोकशाही और राजशाही, लेकिन उपराज्यपाल तानाशाही-गुंडागर्दी से चला रहे हैं: दिलीप पांडे

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप पांडे ने कहा कि पूरी दुनिया में शासन चलाने के दो तरीके हैं लोकशाही और राजशाही, लेकिन उपराज्यपाल तानाशाही-गुंडागर्दी से चला रहे हैं। बीजेपी के मठाधीशों ने तानाशाही, गुंडागर्दी और मनमर्जी से शासन चलाने का तरीका बताया है। वह दिल्ली के 2 करोड़ लोगों के सेंटीमेंट्स को रिप्रजेंट करने वाले जनप्रतिनिधियों से मिलने का समय नहीं निकाल पा रहे हैं। हम एलजी से दिल्ली की कानून व्यवस्था, जमीनों पर भूमाफियों के कब्जा और लॉ एंड आर्डर की स्थिति को लेकर बात करना चाह रहे थे, लेकिन उनके पास बीजेपी के गलीछाप गुंडों से मिलने का समय है पर जनता के चुने विधायकों से मिलने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 36 लाख पेरेंट्स के 18 लाख बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जिन शिक्षकों का हाथ है उनमें एक बड़ा रोल गेस्ट टीचर्स का है। लेकिन एलजी ने अंहकारवश उन गेस्ट टीचर्स को भूत-प्रेत की संज्ञा दे दी। एलजी जिन 13 प्लॉट्स का जिक्र दिल्ली सरकार को देने के नाम पर कर रहे हैं उनमें से 4 तो कभी मिले ही नहीं और अन्य 9 में से 2 विधायकों ने लड़-झगड़कर खाली कराए है। एलजी गलत आंकड़ों का हवाला दे रहे हैं। एलजी उन चिट्ठियों में झूठ लिखकर भेज रहे हैं। ऐसा झूठ जो मुझे जैसे मामूली से सदस्य को भी पता है, एलजी कैसे नहीं पता? आपने झूठ कैसे लिख दिया? किस अंहकार से आप अपनी चिट्ठी में यह झूठ लिख बैठे हो? दिल्ली के सरकारी स्कूलों का डंका केवल दिल्ली और देश में नहीं, बल्कि दुनिया में बज चुका है। यही वजह है कि जब पूरी दुनिया के शिक्षाविदों का सम्मेलन होता है तो उसमें मनीष सिसोदिया को बुलाया जाता है। ये दिल्ली के अंदर टेंट में चलने वाले स्कूलों को बदलकर टैलेंट वाले स्कूलों में तबदील करने वाले मनीष सिसोदिया हैं। मेरा एलजी से आग्रह है कि झूठ से बचें और दिल्ली के 2 करोड़ लोगों के जनादेश को अपने अंहकार और झूठ की भट्टी में मत झोकिए।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व विधायक ने दिलीप पांडे ने आज पार्टी मुख्यालय पर प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज इस महत्वपूर्ण बातचीत के केंद्र में एलजी साहब, दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था और दिल्ली के 18 लाख बच्चे हैं। जिनके भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी माननीय मुख्यमंत्री महोदय और शिक्षा मंत्री महोदय ने ले रखी है। पूरी दुनिया में शासन व व्यवस्था को चलाने के लोकप्रिय तरीके दो ही रहे हैं, एक लोकशाही और दूसरा राजशाही का। दिल्ली के एलजी साहब राजशाही भी नहीं चला सकते है क्योंकि राजा के पेट से नहीं जन्मे हैं। अगर एलजी साहब के संदर्भ में बात करें तो लोकतंत्र का तरीका भी उनके लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि चुनकर नहीं आए है यानी इलेक्टेड नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के मठाधीशों ने उनको एक तीसरा तरीका बताया है कि न तो आप राजशाही चलाईए न लोकशाही। आप तानाशाही, गुंडागर्दी और मनमर्जी चलाइए। दिक्कत यह है कि जो व्यवस्था को तानाशाही के हिसाब से चलाएगा वो लोकतांत्रिक मूल्यों को जूते की नोंक पर ही रखेगा। नतीजा यह निकला है कि आज की तारीख में एलजी साहब दिल्ली के 2 करोड़ लोगों के सेंटीमेंट्स को रिप्रजेंट करने वाले जनप्रतिनिधियों से मिलने का समय नहीं निकाल पा रहे है।
‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता दिलीप पांडे ने कहा कि मेरा दुर्भाग्य कि मैं भी दिल्ली के उन 70 विधायकों में से एक हूं। मैं एक पत्र आपको दिखा रहा हूं। 7 जून 2022 से बतौर चीफ वीप व बतौर विधायक मैं एलजी से मिलने के समय देने के लिए आग्रह, निवोदन सबकुछ कर चुका हूं। उनसे में अलग से मिलकर दिल्ली की कानून व्यवस्था, जमीनों पर भूमाफियों के कब्जे, लॉ एंड आर्डर की स्थिति को लेकर बात करना चाह रहा था। लेकिन एलजी समय नहीं निकाल पा रहे है। जब दिल्ली की विधानसभा से निकलकर हम सभी विधायक उनके कार्यालय पहुंचे, तो कुतर्क आया कि अपॉइंटमेंट लेकर थोड़ी आए थे। हमें लगा लोकतंत्र में लोकहित से बड़ा क्या होगा। खुद को बेहद चिंतित दिखाते-जान पड़ते एलजी के पास विधायकों से मिलने का समय तो होगा ही। क्योंकि वो गलीछाप बीजेपी के गुंडों से तुरंत मिल लेते हैं। उनका बस चले तो स्पीड ब्रेकर का उद्घाटन अगर बीजेपी के गलीछाप गुंडे उनसे करवाएं तो उसमें पहुंच जाए। ऐसे में हजारों-लाखों वोट पाए एमएलए से मिलने का समय तो होगा ही। लेकिन हम गलत थे। उनके पास समय नहीं है।
दिलीप पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पत्र लिखकर समय मांगा तो भी समय न मिल पाना इस बात का प्रतीक है कि हकिकत में एलजी साहब दिल्लीवालों के हक और हितों को अपने जूते की नोंक पर रखते हैं। लोकतंत्र में अहंकार और तानाशाही से शासन चलाने वाला सीधे-सीधे लोकतंत्र का गला घोटता है, जोकि एलजी कर रहे हैं। खाली विधायकों की बेज्जती करनी हो तो अलग बात है। दिल्ली के अंदर 36 लाख पेरेंट्स के 18 लाख बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जिन शिक्षकों का हाथ है उनमें एक बड़ा रोल गेस्ट टीचर्स का है। जिन्हें एलजी ने अंहकारवश भूत-प्रेत की संज्ञा दे दी। वह कह रहे हैं कि वो एग्जिस्ट ही नहीं करते और वो घोस्ट हैं। उन्हें वो नॉन एग्जिस्टेंट कह रहे है। दिल्ली के 18 लाख बच्चों को भूतप्रेत पढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेरी पीड़ा और चिंता ज्यादा बढ़ जाती है जब आप कहते हैं कि हमने दिल्ली सरकार को 13 प्लाट्स दिए, बनाए क्यों नहीं। मैं भी डीडीए का मेंबर हूं। एलजी साहब, मैं उस डीडीए मेंबर हूं जिसके आप अध्यक्ष हैं। आपकी मर्जी के बगैर डीडीए में एक पत्ता तक नहीं हिलता है। मुझ तक को पता है कि जिन 13 प्लाट्स का जिक्र आप कर रहे हैं उनमें से 4 तो कभी मिले ही नहीं और कब मिलेंगे इसका पता ही नहीं। अन्य 9 में से 2 विधायकों ने लड़-झगड़कर खाली कराए। मेरी पीड़ा यह है कि उस नाव में मैं भी हूं। आपकी कही गई किसी भी बात पर मैं कैसे विश्वास करूं? जब आप गलत आंकड़ों का हवाला दे रहे हैं, आपके हवालों से लिखी गई चिट्ठियां आपका हलफनामा हैं। कल को यदि कोर्ट में जाए तो यह एक साक्षय है। आप संवैधानिक पद हैं तो संवैधानिकता की लाज उन चिट्ठियों से जुड़ी है। आप उन चिट्ठियों में झूठ लिखकर भेज रहे हैं। ऐसा झूठ जो मुझे जैसे मामूली से सदस्य को भी पता है। आपको कैसे नहीं पता? आपने झूठ कैसे लिख दिया? किस अंहकार या किस मिन इंफॉर्मेशन ने आपको प्रेरित किया कि आप अपनी चिट्ठी में यह झूठ लिख बैठे हो? किसने आपको ऐसा पाठ पढ़ाया कि आपने उस संवैधानिक कुर्सी की लाज नहीं रखी, जिसपर आप बैठे हुए है?
उन्होंने कहा कि एलजी साहब, दिल्ली के सरकारी स्कूलों का डंका केवल दिल्ली और देश में नहीं, बल्कि दुनिया में बज चुका है। यही वजह है कि जब पूरी दुनिया के शिक्षाविदों का सम्मेलन होता है तो उसमें मनीष सिसोदिया जी को बुलाया जाता है। क्योंकि लोग जानते है कि जिस भाव, कर्मठता और लगन से मनीष सिसोदिया ने दिल्ली के 18 लाख बच्चों को अपना बच्चा माना है वो अभूतपूर्व और अद्वितीय है। मनीष सिसोदिया के अलावा किसी दूसरे में नहीं है। आप जब अंगुली उठा रहे हैं तो इस बात को समझिए कि ये वे मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल हैं जो सुबह 6 बजे अपनी नींद को त्याग कर 12 महीने दिल्ली के स्कूलों का दौरा कर सुनिश्चित करते हैं कि सबकुछ ठीक है। ये दिल्ली के अंदर टेंट में चलने वाले स्कूलों को बदलकर टैलेंट वाले स्कूलों में तबदील करने वाले मनीष सिसोदिया हैं। जिनके पास प्रोफाइल पोर्टफोलियो तो कई हैं लेकिन दुनिया के सबसे बेहतरीन और बच्चों के सबसे चहेते शिक्षा मंत्री के तौर पर उन्हें यह देश, दिल्ली और दुनिया याद करती है।



