दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 2014-15 से पहले 14.66 लाख बच्चे थे, आज स्कूलों में 18 लाख बच्चे हैं: सौरभ भारद्वाज

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने सारी हदें पार कर दी हैं। दिल्ली के सरकारी स्कूलों से पढ़कर डॉक्टर-इंजीनियर बनने वाले बच्चों का नालायक कहा है। दिल्ली सरकार और 18 लाख छात्रों को बदनाम करने के लिए उपराज्यपाल झूठे आंकड़े देकर अखबारों में जबरन छपवा रहे हैं। यही झूठ जो बीजेपी 7 साल से बोल रही है। उपराज्यपाल ने 60 हजार अध्यापकों को घोस्ट टीचर कहा है क्या दिल्ली के छात्रों के शानदार नतीज़े “भूतों” से आ रहे हैं? दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की 18 लाख बच्चों और 60 हजार शिक्षकों की मेहनत से विदशों तक तारीफ हो रही है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 2014-15 से पहले 14.66 लाख बच्चे थे। आज स्कूलों में 18 लाख बच्चे हैं। दिल्ली में रिक्शेवाले, बाई के बच्चे मेहनत से इंजीनियर-डॉक्टर बन रहे हैं और ऐसे बच्चों को उप राज्यपाल ने नालायक कहा है। मैं एलजी को चुनौती देता हूं कि वो अपने बच्चों का दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से कंपटीशन करवा लें। इससे पता चल जाएगा कि एलजी ने अपने बच्चों को कितना लायक बनाया। हम उपराज्यपाल से मिलकर सवाल करना चाहते हैं और वह सिर्फ भाजपा के लोगों से वह मुलाकात करते हैं। उनको हम विधायकों से मिलने में क्या दिक्कत है। उपराज्यपाल सिर्फ मुख्यमंत्री से ही क्यों मिलेंगे? क्या हम विधायक चुनकर नहीं आए हैं।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने पार्टी मुख्यालय में आज महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के ऊपर थोपे हुए उपराज्यपाल विनय सक्सेना, लोकतंत्र की सारी मरयादाओं की सीमा पार करते हुए दिल्ली की चुनी हुई सराकार व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ऐसे-ऐसे आंकड़े सामने ला रहे हैं, जो आंकड़े बीजेपी के प्रवक्ता पिछले 7 सालों से कहते हैं। दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने उन्हें पत्र लिखकर कहा कि आपके आंकड़े झूठे हैं। आप एलजी होने के बावजूद अपनी ही दिल्ली सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। एक एजुकेशन इंस्टीट्यूशन है जिसकी तारीफ हिंदुस्तान की हर राज्य सरकार करती रही है। इसके अलावा विदेशों में भी तारीफ हो रही है। शिक्षा व्यवस्था को 18 लाख बच्चों ने मेहनत करके इस इस मुकाम पर पहुंचाया है। पिछले 7-8 सालों में जितनी मेहनत शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने की है, उससे ज्यादा मेहनत दिल्ली के शिक्षकों, प्रिसिंपल व दिल्ली के गरीब लोगों के बच्चों ने की है। तब जाकर दिल्ली में शिक्षा का स्तर ऐसा बना है, जिसपर हम सभी लोग फक्र करते हैं। पत्रकारों को एलजी झूठे आंकड़ों के साथ पत्र लिखकर दे रहे हैं। रात-रात भर एलजी के ऑफिस से फ्रंट पेज पर खबर छापने के लिए फोन किया जा रहा है, ताकि दिल्ली के 18 लाख बच्चों को बदनाम कर दिया जाए। दिल्ली के 60 हजार शिक्षकों को, जिसके अंदर अधिकांश गेस्ट टीचर्स है, उन्हें घोस्ट टीचर कह दिया। अगर ये 60 हजार गेस्ट टीचर्स घोस्ट हैं तो दिल्ली के बच्चों को कौन पढ़ा रहा है। पिछले कुछ सालों से दिल्ली के बच्चों का शानदार परिणाम आ रहा है, क्या वो रिजल्ट भूतों से आ रहा है?
मुझे लगता है कि एलजी की इस तरह की चिट्ठी पूरी दिल्ली को शर्मासार करने वाली है। हम लोगों ने इस दिल्ली को सालों से संवारा है। कोई आदमी गुजरात से आता है और उसे एक राजनीतिक काम यहां दिया जाता है। अब उस आदमी को इतना हक दे दिया गया कि वह बड़े-बड़े अखबारों के अंदर दिल्ली के बच्चों की मेहनत को बदनाम कर रहा है। यह बहुत शर्म करने वाली घटिया बात है। दिल्ली के जिन 36 लाख अभिभावकों के बच्चे आज स्कूलों में पढ़ते है, वो हर स्कूल की पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग में जाकर देखते हैं कि स्कूल में क्या बदला। एलजी कह रहे हैं कि स्कूलों में कुछ नहीं बदला और सब खराब हो गया। यह चौंकाने वाला है कि एक शिक्षा मंत्री को एलजी को बताना पड़ रहा है कि आप झूठ लिख रहे हैं और झूठ छपवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपने जो आंकड़े दिए वो गलत हैं।
एलजी ने कहा कि सरकारी स्कूलों के अंदर बच्चों की संख्या 16 लाख से घटकर 15 लाख हो गई। जबकि हकीकत यह है कि जब केजरीवाल सरकार पहली बार बनी थी, तब 2015-16 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या 14 लाख 66 हजार थी। अब बढ़कर 18 लाख हो चुकी है। बेहद शर्म की बात है कि एलजी खुद अपने हाथ से पत्र लिखकर साइन कर रहे हैं। उसके अंदर ना सिर्फ झूठ लिख रहे हैं बल्कि अखबारों के ऊपर दबाव डाला जा रहा है कि इस झूठ को पहले पेज पर छाप कर झूठ फैलाया जाए।
उन्होंने कहा कि इसके बाद मनीष सिसोदिया लिखते हैं कि आपने बच्चों के परिणाम का जिक्र किया है कि दिल्ली के बच्चे नालायक हैं। मैं नहीं जानता कि एलजी के बच्चे कितने पढ़े लिखे हैं और कौन सी यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं लेकिन एलजी को बताना चाहता हूं कि आपके बच्चों से ज्यादा लायक दिल्ली के गरीब के बच्चे हैं। अपने बच्चों का चाहे कंपटीशन करवा लीजिए, हमारे दिल्ली के बच्चों से। एलजी को मैं खुली चुनौती देता हूं। हम भी जान लें कि एलजी ने अपने बच्चों को कितना लायक बनाया है और अरविंद केजरीवाल ने अपने बच्चों को कितना लायक बनाया है। एक रिक्शेवाले का बच्चा इनके बेटे-बेटी से कंपटीशन करने के लिए तैयार है। मैं उनको चुनौती देता हूं कि वह गणित और विज्ञान किसी में भी कंपटीशन करा लीजिएगा। हमारे सरकारी स्कूल का बच्चा उनके बच्चों को मात देकर दिखाएगा। एलजी में अगर दम है तो वह अपने बच्चों को सामने लेकर आएं। हम भी देखना चाहते हैं कि कितना लोहा दिल्ली के सरकारी स्कूल के बच्चों में है। रिक्शेवाले और मेड के बच्चे आज इंजीनियरिंग पास कर रहे हैं। नीट पासकर डॉक्टर बन रहे हैं। एलजी ऐसे बच्चों को नालायक बताकर बोल रहे हैं कि इन्हें मैथ-साइंस नहीं आता। इन बच्चों को अपना काम कराने के लिए सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती है। यह अपनी मेहनत से अपनी नौकरी हासिल करते हैं। वह सिफारिश के लिए मजबूर नहीं हैं। यह बहुत ही शर्म की बात है कि एलजी दिल्ली की राजनीति को इस स्तर पर लेकर आ गए हैं।
विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जिन गेस्ट टीचर के ऊपर उंगली उठा रहे हैं कि वह घोस्ट टीचर हैं। उनके जिम्मेदार भी उपराज्यपाल हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल की जिम्मेदारी थी कि दिल्ली के अंदर पक्के फुल टाइम अध्यापक होते। एलजी के पास पिछले 8 वर्ष से जिम्मेदारी है। क्यों उन्होंने उनको पक्का नहीं किया। आप खुद अध्यापकों को पक्का नहीं करते, क्योंकि आपके पास डीएसएसएसबी है। आपने असंवैधानिक तरीके से सर्विस उस पर कब्जा कर रखा है। आप ही तंज कस रहे हैं कि यह गेस्ट टीचर घोस्ट टीचर हैं तो आप उनको पक्का कर दीजिए। आप अपने काम के अंदर और ड्यूटी के अंदर फेल हो रहे हैं। इसके बाद उपराज्यपाल ने जिक्र किया कि 13 जगह डीडीए ने प्लॉट दिए। यह जानकारी झूठी और अधूरी है। उनमें से कई प्लॉटों के अंदर आज भी भू-माफियाओं के पास कब्जे हैं। वह कह रहे हैं कि इसके अंदर स्कूल बनवा लीजिए। कब्जा खाली कराना पुलिस का काम था। पहली बात की कब्जा क्यों हुआ। डीडीए की सरकारी जमीन पर कब्जे हो रहे हैं तो डीडीए-पुलिस कहां सो रही थी। इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मुझे बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इस तरह की चिट्ठियां लिख कर दिल्ली के गरीब बच्चों को बदनाम किया जा रहा है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बच्चे जब कॉलेजों में दाखिला लेने जाते हैं और नौकरियों के इंटरव्यू देते हैं तो शान से बताते हैं कि हम दिल्ली के सरकारी स्कूल से पढ़े हैं। एलजी आज कह रहे हैं कि वह नालायक हैं। यह बहुत शर्मसार करने वाली और दुख देने वाली बात है। संविधान की तरफ से उपराज्यपाल को बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी मिली है। आपको कहना चाहिए था कि आइए उपमुख्यमंत्री मनीष जी अगर कुछ कमियां हैं तो हम मिलकर दूर करते हैं। आपको मुझसे क्या मदद चाहिए, वह मुझे बताइए। मैं उसको मिलकर दूर करने के लिए तैयार हूं। आप चिट्ठियां छपवा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानियां ट्रंप भारत आई तो उन्होंने कहा कि मुझे दिल्ली के सरकारी स्कूल का दौरा करना है। इसका कई अखबारों में जिक्र हुआ कि केंद्र सरकार ने हर कोशिश की कि वह दिल्ली के स्कूल ना जाएं। किसी और राज्य के सरकारी स्कूलों में चले जाएं। मगर डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी इस जिद पर अड़ी हुईं थी कि वह दिल्ली के सरकारी स्कूलों को देखेंगी। फिर उन्होंने दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के अंदर हैप्पीनेस करिकुलम को देखा और उसकी तारीफ की। आज यह स्तर एलजी का आ गया है कि वह चुनी हुई सरकार के साथ में इस तरीके के पत्र लिखकर अपनी झेंप मिटाते हैं। हमें बहुत ही दुख और खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस तरीके के पद पर और गरिमा के अनुसार ही व्यक्ति को इस पद पर केंद्र सरकार को नियुक्त करना चाहिए। ताकि इस पद की गरिमा पहले की तरह बनी रहे।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के विधायक उनसे पिछले 1 सप्ताह से समय मांग रहे हैं। हम लोग दिल्ली विधानसभा से पैदल चलकर उनके घर तक गए। हमारे साथ सभी मंत्री और मुख्यमंत्री थे। हमको पुलिस ने रोक दिया। एलजी ने मिलने से मना कर दिया। उपराज्यपाल सिर्फ मुख्यमंत्री से ही क्यों मिलेंगे। क्या हम विधायक चुनकर नहीं आए हैं। हमें भी तो 2-2 लाख लोगों ने वोट के जरिए चुनकर भेजा है। हम उपराज्यपाल से मिलना चाहते हैं और उनसे सवाल करना चाहते हैं। उनको विधायकों से मिलने में क्या दिक्कत है। भाजपा के लोगों से तो वह मुलाकात करते हैं। एल्डरमैन की लिस्ट में तो भाजपा के जिला कार्यकर्ता आ रहे हैं। वह भाजपा वालों से छुप छुप कर मिलेंगे। लेकिन चुने हुए विधायकों से नहीं मिलेंगे। एलजी विधायकों से मिलने से क्यों घबरा रहे हैं। उनको मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस तरह के एलजी से मिलकर मुख्यमंत्री क्या करें, जो कहता है कि तुमको मैंने एमसीडी के अंदर नुकसान पहुंचाया। मैं चाहता था कि भारतीय जनता पार्टी की सीटें ज्यादा आती लेकिन इनसे आ नहीं पायीं। अब मैं आप लोगों को लोकसभा में नुकसान पहुंचाऊंगा। यह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा के अंदर बयान भी दिया है। ऐसे एलजी से क्या मिलें जो कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके लिए एक सलाह है। क्या सुप्रीम कोर्ट उपराज्यपाल को सलाह देता है। फिर वह कहते हैं कि मुझसे मिलिए। लेकिन उससे पहले एलजी अपना काम तो करें। वहीं जो विधायक उनसे मिलना चाहते हैं, उनसे मिलते नहीं हैं।



