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फसल बोआई के लिए किसानों को तत्काल फर्टिलाइजर्स उपलब्ध न कराया गया तो देश श्रीलंका जैसे खाद्यान संकट में फंस सकता है: डा. गिरीश

लखनऊ :  रबी की फसलों और आलू की बोआई जब चरम पर है, उस वक्त किसानों को रासायनिक खाद उपलब्ध न कराना डबल इंजन सरकारों की ऐसी साजिश है जिसको माफ नहीं किया जा सकता। एक तरफ खाद की अनुपलब्धता और दूसरी ओर उस पर ब्लैकखोरी किसानों की पीड़ा को डबल कर रही है। सरकार को चाहिए है कि बोआई सीजन में किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उचित मूल्य पर फौरन उपलब्ध कराये।
किसानों को जानबूझ कर कंगाल बनाने का आरोप लगाते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा. गिरीश ने कहा कि हाल के महीनों में पहले सूखा और फिर यकायक हुई अधिकाधिक वारिश से किसानों की खरीफ की फसल लगभग समाप्त हो गयी। सूखा के दिनों में इन फसलों की सिंचाई पर किसानों ने भारी धन खर्च किया था और जब फसल तैयार हुयी तो वह जल जमाव से डूब कर नष्टप्राय हो गयी।
सरकार को किसानों की हानि की भरपाई करनी चाहिए थी, लेकिन सरकार के मंत्रियों ने बयान दे डाले कि हानि के अल्पांश की अदायगी तभी की जाती है जब फसलहानि 35 प्रतिशत से अधिक हो। साहब बहादुरों के इन बयानों के बाद सरकारी प्यादों ने नाममात्र की फसलहानि के आंकड़े बना दिये और किसान हाथ मलते रह गए। फसल की कटाई और गहाई की लागत भी किसानों को नहीं मिल पा रही और वे दोहरी मार झेल रहे हैं। ऊपर से मौजूदा फसलों की बोआई के समय फर्टिलाइजर्स की किल्लत और ब्लैकखोरी किसानों की पूरी तरह बरवादी की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं।
डा. गिरीश ने कहा कि यह साफ साफ दिख रहा है कि जिस तरह सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के  उपक्रमों को कारपोरेट घरानों के हाथों बेच रही है भाजपा सरकार किसानों की ज़मीनों को भी उन्ही को दे डालना चाहती है। इसी उद्देश्य से सरकार  तीन काले क्रषि कानून लायी थी जिन्हें किसानों ने आंदोलन के बल पर रद्द करा दिया। किसानों को देवालिया बनाने के उद्देश्य से ही एमएसपी कानून नहीं बनाया जा रहा।
भ्रष्टाचार किसानों को और भी कंगाल बना रहा है। भ्रष्टाचार पर जीरो टोलारेंस के दावे करने वाली भाजपा सरकार के राज में किसानों को बिजली कनेक्षण लेने तक को रिश्वत देनी पद रही है। किसानों को ट्रैक्टर आदि देने की योजनाएं इस ढंग से बनाई गयी हैं कि उनका लाभ किसान बन कर धनाढ्य लोग उठा रहे हैं। पराली जलाने के नाम पर किसानों को जेलों में ठूँसा जा रहा है, जबकि धनपतियों के लक्जरी वाहन और उद्योग प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। यूपी में क्रशि प्रनाली में चल रहा गुजरात माडल किसानों को ज़मीनें बेचने की आधारशिला खड़ी कर रहा है।
भाकपा नेता ने डबल लुटेरी सरकार को आगाह किया कि फसलों की बोआई के समय यदि किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराया गया तो देश को श्रीलंका जैसा खाद्यान्न संकट झेलना पढ़ सकता है, जिसकी मार से पिज्जा खाने वाले भी बच नहीं सकते।
डा॰ गिरीश, सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

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