रेडियो स्टोरीटेलिंग के अनूठे अंदाज़ में सामने आई नवाबी लखनऊ की जल-कहानियाँ
लखनऊ की भूली-बिसरी जल विरासत ने जगाई जल-संवेदना

लखनऊ । लखनऊ पुस्तक मेला के मुख्य मंच पर आज Blue Drop Foundation की ओर से “लखनऊ की भूली-बिसरी जल विरासत” विषय पर एक विशेष टॉक शो एवं रेडियो स्टोरीटेलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लखनऊ की समृद्ध जल-विरासत—कुओं, बावड़ियों, तालाबों, झीलों और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों—से नई पीढ़ी को परिचित कराना तथा जल के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण की भावना विकसित करना था।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार एवं समालोचक तथा माधवी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश दीक्षित थीं। कार्यक्रम की शुरुआत “मेरी जिंदगी” फीमेल बैंड द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” तथा जलगीत से हुई।
Blue Drop Foundation टीम को मिला ‘जल मित्र सम्मान’
पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए माधवी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश दीक्षित द्वारा Blue Drop Foundation की टीम के सदस्यों को ‘जल मित्र सम्मान’ प्रदान किया गया।
सम्मानित होने वालों में देवेंद्र सिंह, शोभित गुप्ता, डॉ. कुमुद सिंह, स्वाति मालवीया और अमित कुमार ओम शामिल रहे।
इस अवसर पर मंच पर आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के पूर्व अपर महानिदेशक डॉ. सतीश ग्रोवर, प्रख्यात जल मित्र डॉ. अर्जुन पांडे, जलदूत नंद किशोर, वरिष्ठ पत्रकार सुशील सीतापुरी, निवेदिता श्रीवास्तव तथा Blue Drop Foundation की अध्यक्ष डॉ. मीनू खरे की उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किए गए।
रेडियो स्टोरीटेलिंग ने बाँधा दर्शकों को
कार्यक्रम का सबसे विशेष आकर्षण रहा “लखनऊ की जल विरासत” पर आधारित रेडियो स्टोरीटेलिंग। इस अभिनव प्रस्तुति में स्टूडियो से संवाद और घटनास्थल से रिपोर्टिंग का अनूठा संयोजन किया गया।
डॉ. मीनू खरे ने लखनऊ के विभिन्न ऐतिहासिक जलस्रोतों के घटनास्थल से रिपोर्टर के रूप में उनकी इतिहास-कथाओं को जीवंत किया जबकि स्टूडियो एंकर की भूमिका डॉ. देवेंद्र सिंह ने निभाई।
छाछी कुआँ, मोती झील, शाही बावली, छतर मंजिल और बख्शी का तालाब जैसे जल-स्मारकों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उनसे जुड़ी रोचक कथाओं और वर्तमान स्थिति को बेहद सहज, रोचक और संवादात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया। डॉ. मीनू खरे और डॉ. देवेंद्र सिंह की प्रस्तुति-केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा और कई अवसरों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
“मेरी बचपन की प्यारी सहेली गोमती…” ने छुआ दिल
कार्यक्रम की समाप्ति डॉ. मीनू खरे द्वारा प्रस्तुत नज़्म से हुई—
मेरे बचपन की मेरी प्यारी सहेली गोमती,
तुझपे क्या गुज़री है कि तू यूँ सिमटकर रह गई।
गोमती नदी की वर्तमान स्थिति को लेकर कही गई इन पंक्तियों का दर्शकों ने तालियों के साथ स्वागत किया। इन पंक्तियों के माध्यम से कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि किसी शहर की जल-विरासत केवल उसके पुराने कुओं, तालाबों और बावड़ियों का इतिहास नहीं, बल्कि उसके वर्तमान और भविष्य की जल-सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है।
जल-विरासत को मनोरंजक माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास
Blue Drop Foundation की अध्यक्ष डॉ. मीनू खरे ने कहा कि लखनऊ की जल-विरासत केवल इतिहास की वस्तु नहीं है, बल्कि यह शहर की सामुदायिक स्मृति और भविष्य की जल-सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। आवश्यकता है कि इन जलस्रोतों की कहानियों को नई पीढ़ी तक ऐसे माध्यमों से पहुँचाया जाए, जो उन्हें रोचक भी लगें और सोचने के लिए प्रेरित भी करें।
रेडियो स्टोरीटेलिंग के माध्यम से जल-विरासत को प्रस्तुत करने का प्रयोग इसी दिशा में एक प्रयास था—जहाँ इतिहास, पत्रकारिता, रेडियो और पर्यावरण-संदेश एक साथ जुड़े।
कार्यक्रम में आकाशवाणी की पूर्व उपनिदेशक रेनु चतुर्वेदी, रमा त्रिवेदी, लखनऊ कनेक्शन वर्ल्ड के, अनिल शुक्ला, नीरजा शुक्ला, अमिता दुबे, अल्का प्रमोद, विवेक शुक्ला सहित अनेक साहित्यकारों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जल-संरक्षण से जुड़े लोगों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के मंच संचालन की जिम्मेदारी शोभित गुप्ता और डॉ. कुमुद सिंह ने प्रभावशाली ढंग से निभाई, जबकि स्वाति मालवीया ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि लखनऊ की जल-विरासत को जानना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए पानी बचाने की जिम्मेदारी को समझना भी है।
“पानी की कहानी” और Blue Drop Foundation का यह प्रयास लखनऊ को एक नए—‘जल दृष्टिकोण’—से देखने की दिशा में एक सार्थक और सफल पहल साबित हुआ।



