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देश के युवाओं के प्रेरणा पुरुष थे अशोक सिंघल जी : अमित शाह

नई दिल्ली :: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आग कहा कि “भारत के युवाओं को श्रद्धेय अशोक सिंहल जी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।

यह बात उन्होंने दिल्ली के भारत मंडपम में अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए कही।

कार्यक्रम का आयोजन विश्व हिंदू परिषद और अशोक सिंहल फाउंडेशन ने किया।
श्री शाह ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, हिंदू समाज के संगठन और श्री राम जन्मभूमि आंदोलन को अपना जीवन समर्पित करने वाले इस युगदृष्टा नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में अशोक सिंहल जी के प्रेरणा दायी जीवन, दूरदर्शी विचारों और देश-समाज के लिए उनके अतुलनीय योगदान को याद किया गया।
रामभक्तों से खचाखच भरे सभागार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “श्री अशोक सिंहल जी ने अपना पूरा जीवन देश, समाज और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में लगा दिया। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनका योगदान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव अविस्मरणीय रहेगी।”
गृह मंत्री ने आगे कहा, “विश्व हिंदू परिषद व श्री अशोक सिंहल फाउंडेशन उनकी जन्म शताब्दी मनाकर और उनके जीवन, मूल्यों व योगदान को जन-जन, विशेषकर युवाओं तक पहुंचाकर सराहनीय कार्य कर रहा है। यह शताब्दी समारोह युवा पीढ़ी के लिए उन आदर्शों को समझने और राष्ट्र-समाज के प्रति समर्पित जीवन से प्रेरणा लेने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह पहल उनके विचारों और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित होगी।”
कार्यक्रम में  महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि यह हमारा देश है और इसकी हर धरोहर की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। हमें अपने समाज और धर्म के प्रति सदैव सजग रहना होगा, कड़ी मेहनत करनी होगी और देश को और अधिक शक्तिशाली व प्रगतिशील बनाने में योगदान देना होगा—यही श्री अशोक सिंहल जी की विचारधारा थी।”
समारोह का शुभारंभ 100 वेदपाठी बटुकों द्वारा शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ।

इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के दिव्य पदचिह्न” नामक ‘कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन रहा, जो भारतीय समाज पर भगवान श्री राम के जीवन-मूल्यों, आदर्शों और उनके अमिट सांस्कृतिक प्रभाव को रेखांकित करती है। इस अवसर पर ‘श्री राम स्तंभ’ की एक प्रतिकृति (रेप्लिका) का अनावरण कर उसे प्रदर्शित भी किया गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि अशोक सिंहल जी के भीतर विचारों की दृढ़ता और दूसरों के दुखों के प्रति अपार संवेदनशीलता का एक दुर्लभ संगम था। एक बार जब वे कोई निर्णय ले लेते थे, तो उस पर अडिग रहते थे। उनका ध्यान इस बात पर नहीं होता था कि काम कितना कठिन है, बल्कि इस बात ,पर होता था कि उसे सिद्ध कैसे किया जाए। संघ और विश्व हिंदू परिषद के कार्य से लेकर भारत की सांस्कृतिक विरासत, समाज सेवा और परंपराओं के संरक्षण तक उनका योगदान अभूतपूर्व रहा। वे केवल दृढ़ संकल्प वाले व्यक्ति नहीं थे, बल्कि उन संकल्पों को संगठित और सतत कार्य में बदलने की अद्भुत क्षमता रखते थे।”
कार्यक्रम के दौरान अयोध्या जिले में राम वन-गमन पथ पर स्थापित किए जाने वाले ‘श्री राम स्तंभों’ का डिजिटल लोकार्पण भी किया गया। इसका उद्देश्य आम लोगो को भगवान श्री राम की यात्रा की स्मृतियों और उससे जुड़े सांस्कृतिक व आध्यात्मिक स्थलों से जोड़ना है।
इसके अलावा, श्री सिंहल जी के जीवन, आध्यात्मिक मूल्यों, संगठनात्मक कार्यों और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका पर आधारित तस्वीरों, दस्तावेजों व ऐतिहासिक सामग्रियों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई।

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस अवसर पर कहा कि अशोक सिंहल जी का जीवन भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्र के प्रति निःस्वार्थ समर्पण का जीवंत स्रोत है। जन्म शताब्दी वर्ष केवल उन्हें याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों, सेवा भाव और भारत-प्रेम की भावना को आने वाली पीढ़ियों तक ले जाने के संकल्प का वर्ष है।”

 

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