मनौतियों के राजा” का गणेशोत्सव मूर्ति स्थापना के साथ शुरु

लखनऊ। श्री गणेश प्राकट्य कमेटी की ओर से श्री गणेश महोत्सव सोमवार को झूलेलाल वाटिका निकट हनुमान सेतु के पास मूर्ति स्थापना के साथ शुरु हुआ। पूजन में कमेटी के संरक्षक भारत भूषण गुप्ता, अध्यक्ष घनश्याम अग्रवाल व पार्षद रंजीत सिंह , जय करन सिंह, अखिलेश बंसल, संजय सिंह गांधी, गोपाल अग्रवाल, अखिलेश बंसल, सुधांशु बाथम, अजय अग्रवाल, योगेश बंसल, शरद अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, सतीश अग्रवाल, रामशंकर वर्मा, देशराज अग्रवाल, संजय अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, विजेंद्र अग्रवाल बिज्जू, समेत अन्य लोग मौजूद रहे। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम कोलकाता के प्रसिद्ध संजय शर्मा के संचालन मे शुरु हुये।
कार्यक्रम की शुरुआत गणपति बाप्पा की पावन वंदना से हुई। प्रसिद्ध गायक आदर्श राजपूत (कोलकाता) ने अपनी मधुर आवाज़ में “आओ आओ पधारो गणराज जी”, “गणपति को प्रथम मनाना है”, “देवा देवा गणपति देवा तुमसे बढ़कर कौन”, और “मेरे सिर पे सदा तेरा हाथ रहे” जैसे भजनों की संगीतमय प्रस्तुति दी, जिस पर उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो गया।
अगले क्रम में स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें भारत के अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक पोशाक पहने कलाकारों ने गणपति महाराज का अभिनंदन किया। इस दौरान तिरुपति बालाजी, भगवान श्री कृष्ण, माँ दुर्गा और माँ काली की अलौकिक झाँकियों के दर्शन भी श्रद्धालुओं को कराए गए। कलाकारों ने एक भावपूर्ण नृत्य नाटिका के माध्यम से यह दर्शाया कि भगवान गणेश का मस्तक हाथी का क्यों लगाया गया और क्यों हम हर वर्ष भाद्रपद की चतुर्थी को उनका जन्मोत्सव (गणेश चतुर्थी) के रूप में धूमधाम से मनाते हैं। तीसरी प्रमुख नृत्य नाटिका रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना पर आधारित थी। इसमें दर्शाया गया कि किस प्रकार रावण वध के पश्चात ब्रह्मा हत्या/ब्राह्मण हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्री राम ने शिवलिंग की स्थापना की और भगवान शिव उस ज्योतिर्लिंग में विराजमान हुए।
संरक्षक भारत भूषण गुप्ता ने बताया कि 15 सितम्बर को गजरे का कार्यक्रम रात्रि 8 बजे होगा।
उन्होंने बताया कि भक्त लोग मनौतियों के राजा के दर्शन प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से रात 11:00 बजे तक कर सकेंगे बप्पा की आरती सुबह 9:00 बजे और शाम 6:00 बजे होगी। इस बार बच्चों के नए-नए झूले आ आये हैं फास्ट फूड, आइसक्रीम, चाट के स्टाल है। मीना बाजार में महिलाओं के श्रृंगार संबंधी सारी सामग्री के स्टॉल है। पूरा परिसर मेले जैसा है। जिसमें सभी प्रकार के समान लोग खरीद सकेंगे।
उत्सव के मुख्य आकर्षण
15 सितम्बर, गजरा, रात्रि 8ः00 बजे।
18 सितम्बर, दूर्वाभिषेक, मध्यान्ह 12 बजे।
19 सितम्बर- छप्पन भोग, रात्रि 8 बजे।
20 सितम्बर, सिन्दूराभिषेक, मध्याह्न 12 बजे।
23 सितम्बर- पाशांकुश पूजन मध्यान्ह 12 बजे।
24 सितम्बर- महाभिषेक मध्यान्ह 12 बजे, तथा महामोदक रात्रि 8ः00 बजे।


