अवध की ऐतिहासिक विरासत का पुनरुत्थान
175 साल बाद रॉयल फैमिली ने दोबारा शुरू की बड़े मंगल के भंडारे की परंपरा

लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ की साझी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को जीवंत करते हुए रॉयल फैमिली ऑफ अवध की ओर से जेठ महीने के पांचवें बड़े मंगल पर एक भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। यह आयोजन हजरतगंज क्षेत्र के 110, बहादुर हाउस के बाहर आयोजित हुआ, जहाँ सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों और राहगीरों को पूरी श्रद्धा के साथ प्रसाद वितरित किया गया।
*110 बहादुर हाउस पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब,*
इस भंडारे की जड़ें अवध के स्वर्णिम इतिहास और हिंदू-मुस्लिम एकता से गहराई से जुड़ी हैं। इतिहास के झरोखे से पता चलता है कि इस पावन परंपरा की शुरुआत काशी नरेश की पुत्री छतर कुँवर जी ने की थी, जो विवाह के पश्चात अवध के शाही परिवार में बेगम आलिया के नाम से प्रसिद्ध हुईं। बेगम आलिया ने अवध के नवाब द्वारा ही निर्मित अलीगंज के प्राचीन हनुमान मंदिर में यह मन्नत मांगी थी कि यदि उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी, तो वह एक भव्य भंडारा करवाएंगी। ईश्वर ने उनकी मुराद पूरी की और उनके घर पुत्र का जन्म हुआ, जिनका नाम नवाब आसफ़ुद्दौला रखा गया, जिन्हें लोग प्यार से नवाब मंगलू भी कहते थे। अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी में ही बेगम आलिया ने यह ऐतिहासिक ऐलान किया था कि हर साल जेठ महीने के पहले मंगलवार को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसी अटूट परंपरा के तहत आज सुबह से शाम तक पूड़ी-सब्जी का प्रसाद पूरी श्रद्धा के साथ बांटा गया।
रॉयल फैमिली ऑफ अवध के महासचिव शिकोह आज़ाद ने इस मौके पर बताया कि लखनऊ की पारंपरिक और सांस्कृतिक साख यानी तहज़ीब को अक्षुण्ण रखने के लिए, रॉयल फैमिली ने पूरे 175 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने पूर्वजों की इस पावन परंपरा को पुनः जीवित किया है। सुबह 11 बजे से शुरू हुआ यह भंडारा देर शाम 6 बजे तक अनवरत चलता रहा। इस भंडारे की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब देखने को मिली जब बिना किसी सामाजिक भेदभाव के, सभी कौमों और धर्मों के लोगों ने बेहद उत्साह के साथ यहाँ आकर प्रसाद ग्रहण किया और नवाबियान-ए-अवध की इस धर्मनिरपेक्ष व अनूठी पहल की भूरि-भूरि सराहना की।
भंडारे के मुख्य आयोजक नवाब सै० अली अख्तर ने कार्यक्रम में आए सभी मेहमानों का पारंपरिक लखनवी अंदाज में गर्मजोशी से स्वागत किया और अपने हाथों से प्रसाद वितरित किया। इस मौके पर शहर के कोने-कोने से आए प्रबुद्ध नागरिकों ने भंडारे में शामिल होकर एक-दूसरे को गले लगाया और बड़े मंगल की मुबारकबाद दी।
इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए समाज के हर वर्ग की नामचीन हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें शाही परिवार के सदस्य मन्ज़र सयादैन, नवाब सै० अस्करी, नवाब फ़िरोज़ आग़ा के साथ-साथ कला और संस्कृति जगत से आज द्विवेदी प्रसिद्ध फिल्म मेकर, जैदी डायरेक्टर और दिवेश सतगल शामिल हुए। इनके अलावा धार्मिक व सामाजिक क्षेत्र से स्वामी सारंग, हज कमेटी के नवाब, भरत दीक्षित जी, नरि० पाण्डेय, नवाब सै० कल्पे हुसैन और चेतना पाण्डेय जैसी दर्जनों विशिष्ट विभूतियाँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में प्रशासनिक और बैंकिंग क्षेत्र की गरिमामयी उपस्थिति के रूप में बैंक ऑफ इंडिया की शाखा प्रबंधक गरिमा सिंह और पूर्व राज्यपाल के सुरक्षा अधिकारी जफर अब्बास भी विशेष तौर पर मौजूद रहे।



