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गौहत्या व सनातन प्रतीकों का अपमान असहनीय; गौ रक्षार्थ किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है हिंदू समाज : डॉ. सुरेन्द्र जैन

नई दिल्ली । बकरीद के अवसर पर मुस्लिम समाज के एक वर्ग द्वारा गौहत्या की जिद पर अड़े रहने और इसके पक्ष में कुतर्क गढ़ने पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र जैन ने आज तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण हिंदू समाज गाय को माता मानकर पूजता है। इसके बावजूद इस तरह की जिद पकड़े रहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अपने कुकर्मों पर पर्दा डालने के लिए रोज नए तर्क गढ़कर हिंदू समाज की भावनाओं को आहत किया जा रहा है।

सनातन और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान पर उठाए सवाल:
हाल ही में गौ माता को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग वाले नए कुतर्क पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री ने कहा कि गौ माता को मात्र एक ‘पशु’ कहकर संबोधित करना, गौ माता और संपूर्ण हिंदू समाज का अपमान है। उन्होंने जिहादियों पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्र और सनातन के प्रतीकों के प्रति उनका रवैया जगजाहिर है। अदालती व सरकारी आदेश जारी होने के बावजूद ‘वंदे मातरम’ का अपमान किया जाता है और आज भी कई मदरसों में राष्ट्रगान नहीं गाया जाता। ऐसे में इस कट्टरपंथी वर्ग की बातों पर कोई विश्वास नहीं कर सकता।
*विगत घटनाओं और कानून उल्लंघन का दिया हवाला:*
डॉ. सुरेन्द्र जैन ने 2017 के पशु वध नियमन निर्देशों का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि जब सरकार ने नियम बनाए, तब केरल और बंगाल जैसे राज्यों में (जहाँ गौ हत्यारों के अनुकूल सरकारें थीं) सरेआम गायें काटी गईं। गौ माता का कटा हुआ सिर हाथ में लेकर देश भर में जो भौंडे और बेहूदे प्रदर्शन किए गए, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय थे।
*हिंदू समाज किसी भी सीमा तक जा सकता है:*
विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि देश के आधे से अधिक क्षेत्रफल में गौहत्या विरोधी कानून लागू होने के बावजूद इस तरह की जिद करना गलत है। हिंदू समाज गौहत्या को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि हिंदू समाज ने गौ माता की रक्षा के लिए ही 1857 की क्रांति की थी।
डॉ. सुरेन्द्र जैन ने दृढ़तापूर्वक चेतावनी देते हुए कहा कि अपनी आस्था और गौ माता की रक्षा के लिए हिंदू समाज किसी भी सीमा तक जा सकता है।
*सह-अस्तित्व के लिए सम्मान आवश्यक*
बयान के अंत में डॉ. सुरेन्द्र जैन ने संदेश दिया कि यदि समाज में शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व बनाए रखना है, तो दूसरे समाज की धार्मिक भावनाओं और आस्था का सम्मान करना भी कट्टरपंथियों को सीखना होगा। जिहादी जिद छोड़कर दूसरों की भावनाओं का सम्मान ही उन के हित में है।

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