सीटू नेताओं ने पुलिस कमिश्नर व अन्य प्रशासनिक अधिकारी से मुलाकात कर श्रमिकों का रखा पक्ष
“सीटू का प्रशासन पर दबाव: मजदूरों की रिहाई, ₹26,000 न्यूनतम वेतन और दमन पर रोक की मांग तेज”

नोएडा। श्रमिकों के व्यापक आंदोलन के दबाव में उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन में वृद्धि की घोषणा की, लेकिन सीटू (CITU) ने इसे “ऊंट के मुंह में जीरा” बताते हुए पूरी तरह नाकाफी करार दिया है।
सीटू ने कहा कि घोषित वेतन वृद्धि वर्तमान महंगाई के अनुरूप नहीं है और गौतम बुद्ध नगर व गाजियाबाद के श्रमिकों के वेतन को दिल्ली के बराबर किया जाए। साथ ही ₹26,000 न्यूनतम वेतन तय करने के लिए वेज बोर्ड कमेटी के गठन की मांग दोहराई।
संगठन ने आरोप लगाया कि श्रमिक नेताओं और मजदूरों पर दमन किया जा रहा है तथा सीटू जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा को पुलिस कस्टडी में रखा गया है।
इसी मुद्दे पर आज 15 अप्रैल को सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड सुदीप दत्ता, महासचिव इलामारम करीम व अन्य राष्ट्रीय व राज्य नेताओं के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने श्रमिकों पर हो रहे उत्पीड़न को उठाते हुए गंगेश्वर दत्त शर्मा की रिहाई, निर्दोष मजदूरों की रिहाई, मोबाइल वापसी तथा ट्रेड यूनियनों के साथ वार्ता शुरू करने की मांग की।
प्रशासन ने जांच के बाद निर्दोष मजदूरों को रिहा करने, वेतन वृद्धि के मुद्दे को शासन तक पहुंचाने तथा गंगेश्वर दत्त शर्मा को शीघ्र रिहा करने का आश्वासन दिया।
सीटू ने चेतावनी दी है कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



