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बहुजन समाज के महानायक हैं बिरसा मुंडा : प्रो. चौधरी

बिरसा मुंडा जी की 150 वीं जयंती , अरबिंदो कॉलेज ने जनजातीय गौरव दिवस के रुप में बड़े धूमधाम से मनाई

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध श्री अरबिंदो कॉलेज के तत्वावधान में महान जननायक एवं आदिवासी , स्वतंत्रता सेनानी , धरती आबा बिरसा मुंडा जी की 150 वीं जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रुप में शुक्रवार को कॉलेज सभागार में बड़े धूमधाम से मनाई गई । कार्यक्रम का प्रारंभ कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई । इस अवसर पर प्रोफेसर हंसराज सुमन , प्रोफेसर संगीता कौल , प्रोफेसर मीता माथुर , डॉ.दीपक जायसवाल , डॉ. अविनाश नेगी , डॉ. आकृति सैनी के अलावा सैंकड़ों छात्रों , शिक्षकों व कर्मचारियों ने भाग लिया ।

कॉलेज प्राचार्य प्रो. अरुण चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि बिरसा मुंडा भारतीय इतिहास की सबसे प्रेरक हस्तियों में से एक है । वे बहुजन समाज के महानायक है जिन्होंने अन्याय और शोषण के विरुद्ध जो संघर्ष किया, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका ‘उलगुलान’ आंदोलन सामाजिक जागृति और न्याय की एक ऐतिहासिक मिसाल है। उन्होंने बताया कि जनजातीय गौरव दिवस हमें अतीत की स्मृतियों से ही नहीं बल्कि जनजातीय अस्मिता की अटूट शक्ति का उत्सव है । प्रो. चौधरी ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि छात्रों को आजादी का इतिहास अवश्य पढ़ना चाहिए , साथ ही समाज के वंचित वर्गों के लोगों का इतिहास जानना जरूरी है क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है जो धीरे-धीरे पुस्तकों में आ रहा है और उन पर शोध कार्य हो रहा है तथा पाठ्यक्रमों में पढ़ाया जाने लगा है ।

इस अवसर पर कार्यक्रम में विशेष अतिथि सुश्री शिवांगी खरेवाल ने अपने प्रेरक भाषण में बिरसा मुंडा के अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और उनके सामाजिक जागरण के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन आदिवासी समाज के साथ-साथ पूरे देश के युवाओं के लिए संघर्ष और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने वर्तमान युवा पीढ़ी से कहा कि उन्हें अपने नायकों के इतिहास को जानना जरूरी है , वे उनके विषय में पढ़े और उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प ले ।

इस कार्यक्रम में छात्रों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई जिनमें पारम्परिक आदिवासी नृत्य , देशभक्ति गीत और बिरसा मुंडा के जीवन के प्रमुख चरणों और स्वदेशी समुदायों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को दर्शाने वाला एक नाटकीय चित्र शामिल था । छात्रों द्वारा तैयार पोस्टर प्रदर्शनी, कलाकृतियां और रचनात्मक लेखन कार्य ने कार्यक्रम को जीवंत और शैक्षिक आयाम प्रदान किया । कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने बिरसा मुंडा के साहस, समानता और न्याय के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव था, बल्कि आदिवासी नायकों के योगदान और इतिहास के प्रति सम्मान व जागरूकता बढ़ाने वाला है जिसकी सभी ने सराहना की । कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद अंत में धन्यवाद ज्ञापित डॉ. जायसवाल ने किया ।

 

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