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त्रिपुरा में वामपंथी पार्टियों और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा जारी ; भाजपा के लिए राह आसान नहीं : जितेंद्र चौधरी

(राहुल सिन्हा की रिपोर्ट, अनुवाद : संजय पराते)

अगरतला। सीपीआई(एम) और कांग्रेस अगरतला नगर निगम चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत कर रहे हैं, और वामपंथी पार्टियां यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है कि भाजपा को किसी भी वार्ड में बिना मुकाबले के जीत न मिले।

सीपीआई(एम) त्रिपुरा राज्य समिति के सचिव जितेंद्र चौधरी ने बुधवार को कहा है कि दोनों दलों के बीच बातचीत अभी भी जारी है और 10 नवंबर को नामांकन वापस लेने की समय-सीमा से पहले एक आम सहमति पर पहुँचने के प्रयास किए जा रहे हैं। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए चौधरी ने बताया कि मंगलवार को कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन से चर्चा हुई थी। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आशीष साहा के साथ भी बैठक की थी। कांग्रेस नेतृत्व के साथ बातचीत बुधवार को भी जारी रही।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों दलों के अपने कार्यक्रम और सांगठनिक अनुशासन हैं तथा बातचीत के दौरान दोनों पक्षों द्वारा मांगी गई सीटों को लेकर मतभेद होना स्वाभाविक है। उनके अनुसार, ऐसे मतभेद विशेष रूप से सत्ताधारी भाजपा के अंदर अधिक दिख रहे हैं, जहां बुधवार रात उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद कई वार्डों में कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

चौधरी ने खुलासा किया कि सीपीआई(एम) ने शुरुआत में अगरतला नगर निगम के 25-26 वार्डों में नामांकन दाखिल करने से परहेज किया था, और इन सीटों को कांग्रेस के लिए छोड़ दिया था। कांग्रेस ने भी शुरुआत में इस तरह की व्यवस्था चाही थी। बहरहाल, उन्होंने आगाह किया कि यदि कांग्रेस आखिरकार इन वार्डों में अपने उम्मीदवार नहीं उतारती है, तो यह भाजपा को निर्विरोध जीत दे सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम किसी भी हालत में भाजपा को आसानी से जीत नहीं दिलाएंगे।”

चौधरी ने, यह रेखांकित करते हुए कि 10 नवंबर को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि से पहले अभी वक्त है, कहा कि दोनों दल बातचीत जारी रखेंगे और एक-दूसरे के लिए स्वीकार्य समझदारी पर पहुंचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष इस मुख्य उद्देश्य पर एकमत हैं कि विपक्षी दलों के बीच फूट का लाभ भाजपा को न मिले।

चौधरी ने फिर से कहा है कि किस वार्ड से कौन सी पार्टी चुनाव लड़ेगी, इसका अंतिम निर्णय आगे की चर्चा के बाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीपीआई(एम) ईमानदारी से चाहती है कि शहरी निकाय चुनावों में सत्ताधारी दल को हराने के लिए सभी भाजपा-विरोधी वोट एकजुट रहें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि भाजपा को हराने के लिए विपक्षी दलों में अधिकतम संभव एकता की जरूरत है और सीट-बंटवारे की वर्तमान बातचीत इसी लक्ष्य से निर्देशित है।

 

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