हर्ष मल्होत्रा ने पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों को कवर करने वाली ‘सेफ वॉक टू स्कूल ज़ोन’ पायलट परियोजना का शुभारंभ किया

नई दिल्ली : स्कूली बच्चों के लिए सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाने और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉरपोरेट कार्य राज्य मंत्री एवं पूर्वी दिल्ली के सांसद हर्ष मल्होत्रा ने आज दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सोमरविले स्कूल में ‘सेफ वॉक टू स्कूल ज़ोन’ (Safe Walk to School Zone) पायलट परियोजना का शुभारंभ किया।
इस पहल के अंतर्गत पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्कूलों के आसपास सुरक्षित वातावरण तैयार करना तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और व्यापक समाज के बीच सड़क सुरक्षा एवं जिम्मेदार यातायात व्यवहार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर अरविन्दर सिंह लवली, अध्यक्ष, ट्रांस-यमुना एरिया डेवलपमेंट बोर्ड एवं विधायक, गांधी नगर; यशपाल कांतुरा, अध्यक्ष, शाहदरा दक्षिण, दिल्ली नगर निगम; मुनीष देढ़ा, पार्षद तथा पूर्वी दिल्ली के विभिन्न स्कूलों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
यह पहल विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सड़क सुरक्षा के प्रति श्री मल्होत्रा की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, क्योंकि बच्चे सड़क पर चलने वाले सबसे संवेदनशील वर्गों में शामिल हैं। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास विशेष सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, इस परियोजना का उद्देश्य सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, वाहन चालकों को जिम्मेदार यातायात व्यवहार के लिए प्रेरित करना तथा स्कूल परिसरों और उनके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। पूर्वी दिल्ली में पायलट चरण के सफल क्रियान्वयन के बाद इस पहल को राष्ट्रीय राजधानी के अन्य क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से विस्तारित करने की परिकल्पना की गई है, ताकि दिल्ली के अधिक से अधिक स्कूलों तक सुरक्षित आवागमन का संदेश पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी, निर्णायक और परिवर्तनकारी नेतृत्व में भारत ने बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। प्रधानमंत्री जी ने बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, आर्थिक विकास और नागरिक कल्याण को देश के विकास एजेंडे के केंद्र में रखा है। विकसित भारत @2047 का संकल्प केवल विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक विकसित, समावेशी, सुरक्षित और टिकाऊ राष्ट्र का निर्माण करना है, जहां प्रत्येक नागरिक का कल्याण सर्वोपरि हो।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और माननीय केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी के मार्गदर्शन में भारत के सड़क बुनियादी ढांचे का उल्लेखनीय विस्तार और आधुनिकीकरण हुआ है। केंद्र सरकार विश्वस्तरीय राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, आर्थिक गलियारों और आधुनिक परिवहन नेटवर्क के विकास पर निरंतर ध्यान दे रही है। साथ ही, बुनियादी ढांचे की योजना में सड़क सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय स्थिरता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। मल्होत्रा ने भारत की सड़क कनेक्टिविटी को नया स्वरूप देने और देश के सड़क सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए नितिन गडकरी के निरंतर प्रयासों की सराहना की।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि सड़कें केवल भौतिक संपत्ति नहीं हैं, बल्कि लोगों, अवसरों और आर्थिक प्रगति को जोड़ने वाली जीवनरेखाएं हैं। आज भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क लगभग 1.46 लाख किलोमीटर तक विस्तारित हो चुका है, जिससे भारत विश्व के सबसे बड़े राजमार्ग नेटवर्क वाले देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे में यह परिवर्तन देश के आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण गति दे रहा है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचे का विकास सड़क सुरक्षा के साथ-साथ होना चाहिए और प्रगति का वास्तविक मापदंड मानव जीवन की सुरक्षा होना चाहिए।
सड़क सुरक्षा की गंभीर चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1.8 लाख लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है और इससे देश की अर्थव्यवस्था को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 3 प्रतिशत के बराबर आर्थिक नुकसान होता है। चिंताजनक बात यह है कि इनमें लगभग 10,000 मौतें 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों और युवाओं की होती हैं, जबकि गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 45 प्रतिशत मामले दोपहिया वाहनों से जुड़े होते हैं। इस संदर्भ में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना भी एक बड़ा जोखिम बनकर उभरा है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि असुरक्षित सड़क व्यवहार, तेज गति, जागरूकता की कमी और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने जैसी प्रवृत्तियों के कारण बच्चे और युवा विशेष रूप से असुरक्षित बने हुए हैं।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सड़क सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। इसके लिए 4E की व्यापक रणनीति- Engineering (इंजीनियरिंग), Enforcement (प्रवर्तन), Education (शिक्षा) और Emergency Care (आपातकालीन चिकित्सा सहायता) के माध्यम से Zero Fatality Vision अर्थात सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के माध्यम से नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। इसमें नाबालिगों को वाहन चलाने की अनुमति देने वाले अभिभावकों के लिए जुर्माने और कारावास जैसे कड़े प्रावधान भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि केवल कानूनों का सख्ती से पालन कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ व्यवहार में बदलाव, शिक्षा और निरंतर जन-जागरूकता भी आवश्यक है।
स्थानीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए श्री मल्होत्रा ने पूर्वी दिल्ली को सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण और अधिक यातायात दबाव वाला क्षेत्र बताया, जहां विशेष प्रयासों की आवश्यकता है। राष्ट्रीय राजधानी के एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में इस क्षेत्र में घनी आबादी, व्यस्त मुख्य सड़कों और अंतरराज्यीय बस अड्डे (ISBT) की मौजूदगी के कारण यातायात का भारी दबाव रहता है, जिससे जाम और जटिल यातायात परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए पूर्वी दिल्ली स्कूल आधारित सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों के लिए एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल दुर्घटनाओं को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के जीवन की सुरक्षा और उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराने से भी जुड़ी है। इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा कई नागरिक-केंद्रित कदम उठाए गए हैं। इनमें PM RAHAT योजना प्रमुख है, जिसके माध्यम से सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को दुर्घटना के बाद के महत्वपूर्ण Golden Hour यानी स्वर्णिम घंटे के दौरान तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही, राजमार्ग हेल्पलाइन, आधुनिक एम्बुलेंस नेटवर्क, ट्रॉमा केयर सेंटर और त्वरित प्रतिक्रिया दल जैसी आपातकालीन सहायता प्रणालियों को भी मजबूत किया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि क्रैश बैरियर, इंटेलिजेंट साइनबोर्ड, रिफ्लेक्टिव रोड मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुविधाओं और दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट के सुधार जैसे बुनियादी ढांचे से जुड़े उपाय सड़क यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, AI आधारित निगरानी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट और FASTag आधारित टोलिंग जैसी तकनीकों को अपनाने से देश में सड़क सुरक्षा प्रबंधन और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था में व्यापक बदलाव आ रहा है।
कार्यक्रम के दौरान श्री मल्होत्रा ने एक प्रेरक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक बच्चे ने हेलमेट पहनने की जिद की और बाद में एक गंभीर दुर्घटना के बाद उसकी यह सीख पूरे परिवार के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव का कारण बनी। उन्होंने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि बच्चे अपने परिवार और व्यापक समाज में जिम्मेदार व्यवहार विकसित करने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्कूल में सीखी गई एक छोटी-सी बात जीवनभर की आदत बन सकती है और पीढ़ियों तक सार्थक व्यवहार परिवर्तन ला सकती है।
अपने संबोधन के समापन में मल्होत्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक प्रतिबद्धता है। उन्होंने विद्यार्थियों से यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, नाबालिग अवस्था में वाहन न चलाने तथा अपने परिवार के सदस्यों को भी जिम्मेदार सड़क व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से सड़क सुरक्षा के जागरूकता दूत बनने की अपील की।
उन्होंने दोहराया कि ‘सेफ वॉक टू स्कूल ज़ोन’ पहल सुरक्षित पूर्वी दिल्ली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों में इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन से प्राप्त अनुभव दिल्ली के अन्य स्कूलों में भी इस कार्यक्रम के विस्तार का आधार बनेगा। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के अधिक से अधिक स्कूलों, विद्यार्थियों और परिवारों तक इस पहल को पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की, ताकि सभी को अधिक सुरक्षित सड़क वातावरण का लाभ मिल सके।
इस पहल के व्यापक उद्देश्य को रेखांकित करते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि हर बच्चे का यह अधिकार है कि वह सुरक्षित स्कूल पहुंचे और सुरक्षित अपने घर वापस लौटे। हमारी जिम्मेदारी केवल बेहतर सड़कों का निर्माण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि हर सड़क हर बच्चे के लिए सुरक्षित हो। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम ऐसे भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहां विकास और सुरक्षा साथ-साथ आगे बढ़ें तथा प्रत्येक अनमोल जीवन की रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हो।


