भाजपा के बी.एल.ए. भारतीय चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त बी.एल.ओ. से समन्वय से काम करें और अंतिम वैध वोटर तक का वोट बनवाना सुनिश्चित करें : हर्ष मल्होत्रा

नई दिल्ली : दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने आज दिल्ली में भाजपा द्वारा नियुक्त बी.एल.ए. को विडिओ काल से सम्बोधित किया और कहा की वह सभी चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त बी.एल.ओ. से समन्वय से काम करें और अंतिम वैध वोटर तक का वोट बनवाना सुनिश्चित करें।
श्री मल्होत्रा ने विडिओ कांफ्रेंस में सभी भाजपा के बी.एल.ए. से वर्तमान में विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग को लेकर किए जा रहे दुष्प्रचार पर खुल कर चर्चा की और उन्हें सच्चाई से अवगत करवाया।
उन्होने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और पूरा विपक्ष देश की सबसे पवित्र संवैधानिक संस्था – *भारत के चुनाव आयोग* – पर जानबूझकर दुष्प्रचार कर रहा है। कल 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने खुद प्रेस रिलीज जारी कर स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई के नहीं कटेगा।
मैं पूछना चाहता हूं – ये वही लोग हैं जो 12 साल से लगातार चुनाव हार रहे हैं। केंद्र में 2014, 2019 और 2024 में जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया। दिल्ली में भी जनता ने हमें चुना। हार का ठीकरा अब ये चुनाव आयोग पर फोड़ रहे हैं।
और सच ये भी है कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त *श्री ज्ञानेश कुमार जी* को पद संभाले हुए अभी 2 साल ही हुए हैं। तो क्या 12 साल की हार के लिए 2 साल के CEC जिम्मेदार हैं? ये तर्क ही हास्यास्पद है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। उसके 3 आयुक्त मिलकर सर्वसम्मति से फैसले लेते हैं। उस पर सवाल उठाना लोकतंत्र पर सवाल उठाना है।
इतिहास गवाह है कि *कांग्रेस ने ही सबसे ज्यादा चुनाव आयोग और लोकतंत्र को कुचला है*।
1. *1975 का आपातकाल*: आज लोकतंत्र-लोकतंत्र चिल्लाने वाले राहुल गांधी जी की दादी श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने ही देश पर आपातकाल थोपा था। प्रेस बंद, कोर्ट बंद, विपक्ष जेल में। यही था कांग्रेस का लोकतंत्र।
2. *चुनाव आयुक्तों को इनाम*: कांग्रेस के समय में चुनाव आयुक्त रिटायर होते ही राज्यपाल और सांसद बना दिए जाते थे। देश अभी एस.एल. शकधर एवं एम.एस. गिल का उदाहरण भूला नही है।
टी.एन. शेषन जैसे अधिकारी खुलकर कहते थे कि उन पर कितना दबाव था। चुनाव आयोग को कठपुतली बना दिया गया था।
आज वही कांग्रेस “वोट चोरी” का झूठा नैरेटिव फैला रही है। एस.आई.आर. का मकसद ही डुप्लीकेट, फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को शुद्ध करना है। 2002 की मतदाता सूची से मिलान इसीलिए किया जा रहा है ताकि पारदर्शिता रहे। आयोग ने दावे-आपत्तियों की तारीख 30 अक्टूबर और जवाब की तारीख 30 नवंबर तक बढ़ा भी दी है। फिर दिक्कत क्या है ?
मैं देश एवं दिल्ली की जनता से अपील करता हूं कि इनके बहकावे में न आएं। विपक्षी नेता चुनाव हारने के बाद EVM को दोष देते हैं, चुनाव आयोग को दोष देते हैं, पुलिस को मीडिया को दोष देते हैं पर अपनी हार की जिम्मेदारी कभी खुद नहीं लेते।
भाजपा चुनाव आयोग की निष्पक्षता में पूर्ण विश्वास रखती है। हम आयोग के साथ हैं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए जो भी जरूरी कदम आयोग उठाएगा, भाजपा उसका स्वागत करेगी।
जिन लोगों ने आपातकाल लगाया, जिन्होंने चुनाव आयुक्तों को सांसद बनाया, वो आज संविधान और लोकतंत्र की बात करें – इससे बड़ा मजाक कुछ नहीं हो सकता।



