उत्तर-प्रदेशनई दिल्लीबड़ी खबरलखनऊ

इथेनॉल नीति के नाम पर किसान, पशुपालक और करोड़ों वाहन मालिकों के साथ अन्याय बंद करे सरकार : चौधरी सुनील सिंह

लखनऊ : लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व एम एल सी चौधरी सुनील सिंह ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इथेनॉल नीति के पीछे एक प्रभावशाली नेटवर्क काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाना है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस नीति से लाभान्वित होने वाली केंद्रीय मंत्री के पुत्रों की कंपनियों और उनसे जुड़े हितों का सार्वजनिक खुलासा करे, ताकि देश के सामने पूरी पारदर्शिता आ सके।

इस नीति से सत्ता में अपनी हनक बनाए कुछ प्रभावशाली लोगों और केंद्रीय मंत्री से जुड़े कारोबारी हितों को लाभ दिया जा रहा है। यदि सरकार इन आरोपों को गलत मानती है, तो उसे निष्पक्ष जांच कराकर पूरे देश के सामने तथ्य रखने चाहिए। यह नीति किसानों, पशुपालकों और करोड़ों वाहन मालिकों को असमंजस और आर्थिक परेशानी में डाल रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों पर इथेनॉल की नीति को थोपा जा रहा है जबकि इथेनॉल आधारित फसलों की खेती का दबाव बढ़ाया जाएगा तो खाद्यान्न सुरक्षा प्रभावित होगी, भूजल का अत्यधिक दोहन होगा और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ऐसी नीति देशहित में नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और इथेनॉल नीति को किसानों के हित में बताने का दावा कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। किसान आज भी समय पर भुगतान, लाभकारी मूल्य और खेती की लगातार बढ़ती लागत से जूझ रहा है। यदि इथेनॉल नीति इतनी सफल है तो सरकार बताए कि किसानों को समय पर भुगतान क्यों नहीं मिल रहा और गन्ना किसानों को उनकी उपज का पूरा लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है।
चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि मक्का का बड़ा हिस्सा इथेनॉल उद्योग में जाने से पशु चारे की कीमतें बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इससे डेयरी किसानों की लागत बढ़ रही है और दूध उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर आम जनता को E20 पेट्रोल के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। बिना पर्याप्त तैयारी और बिना व्यवहारिक विकल्प दिए E20 पेट्रोल लागू करना करोड़ों वाहन मालिकों के साथ अन्याय है। पुराने वाहनों के मालिक माइलेज कम होने, इंजन पर संभावित प्रभाव और रखरखाव की बढ़ती लागत को लेकर चिंतित हैं। यदि तेल कंपनियों की लागत कम हो रही है तो सरकार बताए कि पेट्रोल की कीमतों में कमी क्यों नहीं दिखाई दे रही है,और पर्याप्त मात्रा में जब पेट्रोल है और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में सस्ता हो तो इथेनॉल को आम जनता पर थोपना गलत है,
लोकदल अध्यक्ष ने आगे कहा कि ऊर्जा स्वराज का वास्तविक अर्थ केवल वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि ऐसी ऊर्जा व्यवस्था है जो देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करे, किसानों की आय बढ़ाए, पर्यावरण की रक्षा करे और आम नागरिकों को सस्ती एवं स्वदेशी ऊर्जा भी उपलब्ध कराए।
सुनील सिंह जी ने कहा कि लोकदल किसानों की आय बढ़ाने की बात करता, बल्कि सरकार की कॉरपोरेट नीतियों का विरोध करता है जो किसान के नाम पर बड़ी कंपनियों और तेल कंपनियों को लाभ देकर आर्थिक बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है। चौधरी सुनील सिंह ने आगे कहा कि केवल गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों को सीमित लाभ दिखाकर पूरी कृषि व्यवस्था को सफल बताना उचित नहीं है। सरकार को डेयरी किसानों, पशुपालकों, अन्य फसल उत्पादक किसानों तथा उपभोक्ताओं पर इस नीति के प्रभाव का निष्पक्ष और व्यापक आकलन किए बगैर जनता पर थोप दिया गया ये जनता के साथ धोखा है
उन्होंने कहा कि आज पूरा देश, प्रदेश, किसान, पशुपालक और करोड़ों वाहन मालिक इस नीति को लेकर चिंता और परेशानी का सामना कर रहे हैं। सरकार को इथेनॉल नीति की व्यापक समीक्षा करनी चाहिए ताकि किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण तीनों के हित सुरक्षित हो सकें। आज के प्रेस के माध्यम से चौधरी सुनील सिंह ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इथेनॉल नीति की समीक्षा नहीं की, तो लोकदल किसानों, पशुपालकों और करोड़ों वाहन मालिकों के साथ मिलकर पूरे देश में व्यापक जनआंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगा। लोकदल किसान के नाम पर जनता को ठगने वाली किसी भी नीति का पुरजोर विरोध करता रहेगा। हमारी स्पष्ट मांग है कि किसान की आय भी बढ़े, पशुपालक भी सुरक्षित रहे और वाहन मालिकों पर किसी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न डाला जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button