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प्रो. सुखवीर सिंघल की 112वीं जयंती पर ‘सुखवीर सिंघल डिजिटल आर्काइव’ का शुभारम्भ

लखनऊ। सुखवीर सिंघल आर्ट फाउंडेशन ‌द्वारा प्रख्यात चित्रकार एवं बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की परम्परा के प्रमुख चित्रकार प्रो. सुखवीर सिंघल (1914-2006) की 112 वीं जयंती के अवसर पर ‘सुखवीर सिंघल डिजिटल आर्काइव’ का शुभारम्भ किया गया। मंगलवार को राज्य कला अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में राज्य कला अकादमी वाइस चेयरमैन गिरीश मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष सीताराम कश्यप ने ‘सुखवीर सिंघल डिजिटल आर्काइव’ का डिजिटल शुभारंभ किया। इस मौके पर की निदेशक श्रद्धा शुक्ला, सुखवीर सिंघल आर्ट फाउंडेशन की निदेशक प्रियम चन्द्रा, राजेश अग्रवाल, स्तुति सिंघल, रितम चंद्रा, पुनीत, भूपेंद्र अस्थाना, अखिलेश निगम सहित कई गणमान्य व्यक्ति और कला प्रेमी मौजूद रहे।

इस अवसर पर सुखवीर सिंघल आर्ट फाउंडेशन की निदेशक प्रियम चन्द्रा ने कहा, “सुखवीर सिंघल डिजिटल आर्काइव’ वर्षों के संरक्षण, शोध और दस्तावेजीकरण का परिणाम है। हमारा उ‌द्देश्य केवल प्रो. सुखवीर सिंघल की विरासत का संरक्षण करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण सामग्री को शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आमजन के लिए आसान बनाना भी है। हमें विश्वास है कि यह पहल भारतीय कला, कला शिक्षा तथा बीसवीं शताब्दी के भारतीय कला इतिहास पर नए शोध को प्रेरित करेगी।”

राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रो. सुखवीर सिंघल एक प्रतिष्ठित कलाकार थे, जिन्होंने अपने सृजन और समर्पण से कला जगत में विशिष्ट पहचान बनाई। कला के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। श्री मिश्रा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी नातिन प्रियम चंद्रा सहित पूरा परिवार उनकी कलात्मक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य कर रहा है, जिससे नई पीढ़ी भी उनकी कला और विचारों से प्रेरणा प्राप्त कर रही है।

 

यह डिजिटल आर्काइव प्रो. सुखवीर सिंघल के कला जीवन, शैक्षिक योगदान तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह ऑनलाइन अभिलेखागार वर्ष 1930 के दशक से लेकर वर्तमान तक की दुर्लभ अभिलेखीय सामग्री को एक मंच पर उपलब्ध कराएगा।

डिजिटल आर्काइव में प्रो. सिंघल की चित्रकृ‌क्तियों, प्रदर्शनी कैटलॉग, ऐतिहासिक छायाचित्र, पत्राचार, प्रकाशन, समाचार अभिलेख, प्रमाण-पत्र, संस्थागत दस्तावेज तथा अन्य महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया गया है। इनमें से अनेक अभिलेख दशकों तक अप्रकाशित अथवा सीमित रूप से उपलब्ध रहे हैं, जिन्हे अब पहली बार उनके ऐतिहासिक संदर्भ सहित सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है।

डिजिटल आर्काइव की प्रमुख विशेषताओ में 1946 में एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स, कलकत्ता द्वारा प्रदान किया गया टैगोर गोल्ड मेडल, 1943 का दुर्लभ इलाहाबाद स्कूल ऑफ आर्ट्स प्रदर्शनी कैटलॉग, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इलाहाबाद स्कूल ऑफ आर्ट्स की गतिविधियों से संबंधित लेडी हैलेट का ऐतिहासिक पत्र, 1938 में कला भारती (इलाहाबाद स्कूल ऑफ आर्ट्स) की स्थापना से जुड़े अभिलेख, प्रो. सिंघल के गुरु ए. के. हल्दार द्वारा लिखित प्रशस्ति-पत्र तथा ऐतिहासिक समाचार-पत्रों पर आधारित नवीन शोध सामग्री सम्मिलित है।

इस डिजिटल आर्काइव के शोध, दस्तावेजीकरण, क्यूरेशन, डिजिटलीकरण, डिजाइन एवं विकास का कार्य प्रियम चन्द्रा द्वारा कई वर्षों के सतत् शोध एवं अभिलेख संरक्षण के उपरांत सम्पन्न किया गया है। यह परियोजना शोधार्थियों, विद्यार्थियों, संग्रहालयों, क्यूरेटरों, कला-संग्रहकर्ताओं, शिदाको तथा भारतीय कला मे रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए एक सतत विकसित होने वाला प्रामाणिक संदर्भ स्रोत के रूप मे विकसित की गई है।

फाउडेशन के अनुसार यह डिजिटल आर्काइव एक सतत विकसित होने वाली परियोजना है, जिसमे समय समय पर नई चित्रकृतियाँ, अभिलेखीय दस्तावेज, पत्राचार, प्रदर्शनी अभिलेख, छायाचित्र, प्रकाशन तथा शोध सामग्री जोड़ी जाती रहेगी।

 

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