श्रमिक आंदोलन को कुचलने के बजाय उनकी मांगों को पूरा करे सरकार: भाकपा

नई दिल्ली : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के जनपद- नोएडा और हरियाणा के फरीदाबाद आदि में अपने न्यूनतम वेतनमान, काम के घंटे 8 कराने, 4 लेबर कोड रद्द कराने और अपने शोषण तथा उत्पीड़न के सवालों पर आंदोलन कर रहे मज़दूरों पर उत्तर प्रदेश और हरियाणा की राज्य सरकारों द्वारा चलाये गए दमनचक्र की कड़े शब्दों में निन्दा की है। ज्ञात हो कि भाजपा-आरएसएस की उद्योगपति समर्थक और श्रमिक विरोधी नीतियों के चलते गत शताब्दी जैसे हालातों में काम करने को मजबूर हैं और उनका आक्रोश देशव्यापी है।
दोनों सरकारों ने मजदूरों की जायज मांगों को पूरा करने के बजाय, पुलिसिया दमन का रास्ता अपनाया और मज़दूर नेताओं के ख़िलाफ़ न केवल झूठे केस दर्ज किए अपितु उन्हें गिरफ्तार कर मजदूरों को नेत्रत्वविहीन कर दिया। भय और आतंक पैदा करने वाली सरकार की ये कार्यवाहियाँ बेहद शर्मनाक और अदूरदर्शिता पूर्ण थीं। अपनी श्रमिक विरोधी नीतियों पर आत्ममंथन करने के बजाए सरकार साजिश के आरोप लगा रही है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया है कि बौखलाई पुलिस अब गाँवों में छापेमारी कर रही है, मज़दूरों को पकड़ पकड़ कर पीट रही है और अनेकों को गिरफ़्तार कर जेलों में ठूंस रही है। गिरफ्तारी की सूचना परिवार वालों तक को नहीं दी जा रही है। भयभीत होकर अनेक श्रमिक और श्रमिक नेता पलायन कर गए हैं। फकत्री मलिकानों ने कारखाने अवैध रूप से बंद किए हुये हैं।
केन्द्र और भाजपा शासित राज्य सरकारों की कुनीतियों का ही परिणाम है कि पिछले कई महीनों में, देश के अनेक हिस्सों में मज़दूरों ने काम करने की लंबी अवधि और बेहद खराब आवासीय हालात, ओवरटाइम के नाम पर ठगी, पीएफ़ से वंचित करना, टुकड़ों में वेतन देना, मज़दूरों के बुनियादी अधिकारों को नकारना, और श्रम विभाग के निर्दयी तथा मैनेजमेंटपरस्त रवैये के खिलाफ स्वतःस्फूर्त रूप से विरोध जताया है। नोएडा व फरीदाबाद के मज़दूरों का यह विरोध इस बढ़ते गुस्से का सबसे नया उदाहरण है।
अब उत्तर प्रदेश सरकार ने वेतन में मामूली बढ़ोत्तरी की है, मजदूर इसे मानने को तैयार नहीं हैं और न्यूनतम वेतनमान लागू करने की मांग कर रहे हैं।
मज़दूरों के संघर्ष के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त करते हुये भाकपा उनकी तुरंत रिहाई की मांग करती है। भाकपा मांग करती है कि उनके खिलाफ दर्ज सभी केस बिना शर्त तत्काल वापस लिये जायें तथा दमनकारी कार्यवाहियाँ फौरन रोकी जायें। सरकार मज़दूरों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल बातचीत करे और उनकी सभी लंबित और जायज़ मांगों को पूरा करे।


