दबंगों के कब्जे में लखनऊ का नक्खास इलाका

लखनऊ। नवाबों का शहर लखनऊ अब दबंगों के मुनाफ़े का शहर बनता जा रहा है, और इस अभूतपूर्व विकास की पटकथा लखनऊ विकास प्राधिकरण के गलियारों में सरेआम लिखी जा रही है। ताज़ा और चौंकाने वाला मामला जोन-7 के अंतर्गत तुलसीदास मार्ग, नक्खास का है, जहाँ मोमसिरी मस्जिद के ठीक सामने, बाहुबली समर्थक गाजीपुर के दबंगों ने एक पुराने मकान को ध्वस्त कर बेधड़क अवैध निर्माण शुरू कर दिया है।
यह निर्माण सरकारी नियमों का मज़ाक उड़ाते हुए, सीधे रोड वाइंडिंग क्षेत्र में 6 फीट या उससे भी ज़्यादा आगे तक घुस आया है। जाहिर है, सड़क से सटकर बनी दुकान की कीमत करोड़ों में पहुँच जाती है, और इस सरकारी सुविधा का लाभ उठाने के लिए, जोन-7 के अवर अभियंता श्री विवेक पटेल को सेवा शुल्क के रूप में ₹7,00,000 (सात लाख रुपये) का नज़राना दिए जाने का गंभीर आरोप है।
एलडीए की सफेद झूठ वाली IGRS रिपोर्ट
जब स्थानीय नागरिक जितेंद्र नारायण सिंह ने लगातार शिकायतें कर इस खुलेआम लूट को रोकने की गुहार लगाई, तो एलडीए ने हमेशा की तरह अधिकारियों को बचाने वाली और गुमराह करने वाली रिपोर्ट पेश कर दी।
IGRS संख्या 40015725096637 पर अपलोड की गई इस रिपोर्ट में LDA ने नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाले ऐसे अभूतपूर्व तथ्य सामने रखे हैं, जिन पर हंसी नहीं, रोना आता है। दुकानें नहीं, 500 स्क्वायर फीट का भवन, रिपोर्ट में अवैध दुकानों को चालाकी से 500 स्क्वायर फीट का भवन बता दिया गया है। ऐसा लगता है, एलडीए का मानना है कि भवन लिख देने भर से नियम-कानून अपने आप शांत हो जाते हैं और ध्वस्तीकरण की ज़रूरत नहीं पड़ती। 6 फीट अतिक्रमण पर मौत की चुप्पी और पार्किंग की हत्या, रिपोर्ट ने रोड वाइंडिंग क्षेत्र में 6 फीट के अतिक्रमण पर तो पूरी तरह चुप्पी साध ली है, लेकिन इससे भी बड़ा आपराधिक कृत्य है कि दबंगों द्वारा यह व्यावसायिक निर्माण बिना किसी पार्किंग सुविधा के किया जा रहा है। एलडीए के अपने नियम बिना पार्किंग के व्यावसायिक निर्माण की इज़ाज़त नहीं देते! अब दुकान पर आने वाले वाहन सड़क पर खड़े होकर यातायात के लिए नई मुसीबत बनेंगे। साफ़ है, दबंग भू-माफिया पर ‘कृपा’ बनाए रखने के लिए ही इस अतिक्रमण का ज़िक्र तक नहीं किया गया। फुटपाथ पर आरक्षित पिलर, तीसरी मंज़िल तक के लिए सीढ़ियों का निर्माण करने के लिए, निकट की बिल्डिंग द्वारा प्रस्तावित फुटपाथ की ज़मीन पर बेखौफ आरसीसी पिलर डाल दिए गए हैं। यह दिखाता है कि लखनऊ में फुटपाथ अब पैदल चलने वालों के लिए नहीं, बल्कि अवैध निर्माण को सहारा देने वाले खंभों के लिए आरक्षित हैं।
दबंगों को संरक्षण, नागरिक को अनशन की धमकी
शिकायतकर्ता जितेंद्र नारायण सिंह ने साफ़ कहा है कि अवैध निर्माण करने वाले लोग मुख्तार अंसारी समूह से जुड़े सक्रिय सदस्य हैं, जिनके कारण उनके परिवार को जान-माल का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

उन्होंने बेहद दुखी मन से कहा, यह खेदजनक है कि एलडीए के अधिकारी मामूली वित्तीय लाभ के लिए समाज में आपराधिक और दबंग प्रवृत्ति के लोगों को मजबूत कर रहे हैं। अगर इस अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया गया, तो मैं अनशन पर बैठूंगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जोन-7 के भ्रष्ट अधिकारियों की होगी।
फ़िलहाल, यह देखना बाकी है कि एलडीए के उच्च अधिकारी इस सात लाख रुपये के अवैध विकास और सड़क व पार्किंग पर हुए अतिक्रमण को रोकने के लिए अपनी कुम्भकर्णी नींद से जागते हैं, या फिर लखनऊ की विकास गाथा ऐसे ही पैसे और दबंगई के दम पर लिखी जाती रहेगी।


