यूपी के पंचरंगी सावन में जीवंत हुआ अवध, ब्रज, पूर्वांचल बुंदेलखंड पश्चिमांचल

लखनऊ । नव अंशिका फाउंडेशन के द्वारा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के सहयोग से दो दिवसीय अवध, ब्रज, पूर्वांचल बुंदेलखंड, पश्चिमांचल के सावन गीतों का उत्सव” के उद्घाटन दिवस सोमवार 18 अगस्त को गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान परिसर के ऑडिटोरियम में उत्तर प्रदेश के सावन के लोक गायन और नृत्य की यादगार शाम मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग की सदस्य ऋतु शाही, पदमा गिदवानी राजेश कुमार शर्मा नीशू त्यागी नीरा लोहनी आदि के द्वारा जीवंत की गई।
फाउण्डेशन की अध्यक्षा और उत्सव की संयोजक एवं आयोजक नीशू त्यागी के मार्गदर्शन में लोक गायिका दीपिका मिश्रा ने परंपरा का वहन करते हुए सबसे पहले देवी सुमिरनी कजरी, “वीना वाली मैया” सुनायी। अवधी कजरी, “हरे रामा अवध धाम अति प्यारा” सुनाकर लक्ष्मणपुरी नगरी में अयोध्या को जीवंत कर दिया। इस क्रम में बनारसी कजरी, “सखियाँ झूलन चली रे फूल बगिया” के बाद उन्होंने ब्रज की कजरी, “राधे संग झूले नन्द लाल हो”, मिर्जापुर की कजरी, “मत जाना हई अबला हमें नार पिया” और बुंदेली कजरी “अरे रामा सैंया गये परदेश” सुनाकर तालियां बटोंरी। इन सबसे इतर निर्गुनी कजरी, “तोर देहिया इ माटी के मकान बा” सुनते ही बनी।
उत्तर प्रदेश के सावन गीतों की पंचरंगी सरिता को आगे बढ़ाते हुए अरुण कुमार के दल ने “जन्मे अवध में राम मंगल गाओ री”, “अरे रामा रिम झिम बरसे पनिया” और “अरी बहना उठी है घटा घन घोर” जैसे लोकप्रिय सावन गीतों को सुनाकर प्रशंसा हासिल की। विभिन्न सुरीले गीतों पर विशाल गुप्ता के दल ने सुंदर नृत्य पेश कर आयोजन को परवान चढ़ाया। आगंतुकों ने कौशल्या के जन्मे ललनवा अवध में बाजे बजनवा हो, “सासु पनिया कैसे जाऊँ रसीले दोउ नैना”, “राधा गोरी गोरी” और “निमिया के डार मैया” का भी भरपूर आनंद लिया। संतोष के दल ने भी विभिन्न लोक गीत प्रस्तुत किये।
आमिर मुख्तार के कुशल संचालन में हुए इस कार्यक्रम में इस अवसर पर फाउण्डेशन की उपाध्यक्ष नीरा लोहानी ने सावन के गीतों के बारे में बताया कि सावन के गीत प्रकृति से प्रेरित होते हैं जिसमें देवी स्तुति से लेकर झूला गीत तक गाए जाते हैं वहीं प्रियतम से मिलन और विरह दोनों ही रंग दिखते हैं। इस आयोजन में युवा एंकर और नृत्यांगना अंशिका त्यागी ने कार्यक्रम को गुलदस्ते की तरह सजाया। इस दो दिवसीय उत्सव के प्रबंधन का दायित्व राहुल शर्मा और दबीर सिद्दीकी ने संभाला। उन्होंने बताया कि इस उत्सव का समापन समारोह 19 अगस्त को गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान परिसर के ऑडिटोरियम में ही शाम छह बजे होगा। उत्सव” की दूसरी संध्या में नूतन पाण्डेय और संत कबीर नगर से स्वीटी सिंह का दल सतरंगी प्रस्तुतियां देगा।



