उत्तर प्रदेश में जूपी ने महिला यूजर्स की संख्या में साल-दर-साल 60% की बढ़त दर्ज की है।

लखनऊ : भारत के जानेमाने ऑनलाइन स्किल-बेस्ड गेमिंग प्लेटफॉर्म जूपी ने आज अपनी बड़ी उपलब्धि की घोषणा करी। उत्तर प्रदेश अब जूपी लूडो के लिए सबसे बड़ा यूजर बेस बन गया है, जहां 15 मिलियन से ज़्यादा लोग इस गेम को खेलते हैं। राज्य की राजधानी लखनऊ में अब तक 2 बिलियन से ज्यादा बार यह गेम खेला जा चुका है, जो दिखाता है कि लोग सांस्कृतिक रूप से जुड़े खेलों को कितना पसंद करते हैं I
जूपी ने भारत में स्किल-बेस्ड कैजुअल गेमिंग की शुरुआत की थी, और उत्तर प्रदेश ने इसे आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। जिससे यह साफ पता चलता है, कि यूपी सिर्फ गेम खेलने वाला राज्य नहीं है, बल्कि ऑनलाइन स्किल गेमिंग में एक दिशा तय करने वाला राज्य बन चुका है। हाल ही में पूरे देश में 150 मिलियन (15 करोड़) यूजर्स का आंकड़ा पार करने के बाद, जूपी की उत्तर प्रदेश में तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता यह दिखाती है कि भारत का अगला डिजिटल दौर अब गांवों और छोटे शहरों से शुरू हो रहा है।
जूपी ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है जो न्यायपूर्ण खेल, पारदर्शिता और जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा देता है। जूपी लूडो की सादगी, सांस्कृतिक जुड़ाव और ईमानदार खेलने के नियमों की वजह से यह गेम टियर 2, टियर 3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया है।
भारत का खेल, डिजिटल भारत के लिए अब नए रूप में।
जूपी लूडो ने भारत के सबसे पसंदीदा बोर्ड गेम लूडो को एक नया रूप दिया है और इसे स्किल बेस्ड गेमिंग का मज़ेदार अनुभव बना दिया है। जूपी के पास अब 150 मिलियन (15 करोड) से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स और 12.5 बिलियन (1250 करोड़) से अधिक गेमप्ले हैं। जूपी ने सिर्फ स्किल गेमिंग की दुनिया में कदम नहीं रखा, बल्कि इसी ने इसे बनाया है, बढ़ाया है और अब इसमें सबसे आगे भी है। इस ब्रांड ने भारत में पहली बार स्किल-बेस्ड लूडो फॉर्मेट्स पेश किए, जैसे – लूडो सुप्रीम, लूडो टॉ और लूडो सुप्रीम लीग, जिससे इसने न सिर्फ बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा, बल्कि गेमिंग को एक नई पहचान भी दी। इन नए फॉर्मेट्स में गेम तेज और कम समय (10 मिनट से भी कम) में खेला जा सकता है, जो कि मोबाइल पर खेलने वाले भारतीय यूजर्स के लिए बिल्कुल सही है। जूपी ने पारंपरिक लूडो में केवल किस्मत पर निर्भर रहने की सोच को बदला और इसमे दिमाग और रणनीति (स्किल) को ज़्यादा अहमियत दी। इसके लिए उन्होंने बिना पासे (डाइस-लेस मोड) और हर चाल पर स्कोर मिलने वाला सिस्टम (मूव बेस्ड स्कोरिंग) शुरू किया।



