डीयू में चार वर्षीय पाठ्यक्रम लागू होने से बढ़े शिक्षकों के पद जुलाई से क्रियान्वित होंगे
सरकार से अभी तक नहीं मिली ईडब्ल्यूएस सीटें
नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध विभागों व कॉलेजों में पिछले तीन साल से सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है । बता दें कि अभी तक कॉलेजों में शिक्षकों के 82 फीसदी पदों को भरा जा चुका है है , यानी लगभग 5000 पदों पर नियुक्ति की जा चुकी है लेकिन शिक्षा मंत्रालय ने अभी तक ईडब्ल्यूएस सीटें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभागों / कॉलेजों को आबंटित नहीं की है । जबकि शिक्षा मंत्रालय ने पिछले दिनों यह आश्वासन दिया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 75 फीसदी पदों पर स्थायी नियुक्ति के बाद ईडब्ल्यूएस सीटें दे दी जाएंगी लेकिन एक साल से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बावजूद शिक्षा मंत्रालय से अभी तक सीटें नहीं मिली है । जबकि कॉलेजों से ईडब्ल्यूएस की सीटें कितनी बढ़ेंगी उसके आंकड़े भी मंगवा लिए हैं । डीयू में ईडब्ल्यूएस कोटे की लगभग 3000 सीटें बनती है । फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ( शिक्षक संगठन ) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर मांग की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द ईडब्ल्यूएस सीटों को आबंटित करें जिससे कि कॉलेजों को ईडब्ल्यूएस सीटों का लाभ मिल सके । फोरम का कहना है कि शैक्षिक सत्र –2025 –26 से चार वर्षीय छात्रों की पढ़ाई शुरू होने पर शिक्षकों के पद बढ़ने पर उनकी नियुक्ति होनी है । इन पदों को भरने के लिए कॉलेजों को गेस्ट टीचर्स लगाने पड़ेंगे ।
फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव ( कॉलेजिज ) ने दो साल पहले विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सभी कॉलेजों के प्राचार्यो तथा संस्थान के निदेशकों को सर्कुलर जारी करते हुए ईडब्ल्यूएस की 10 फीसदी अतिरिक्त पदों की आवश्यकता के विषय में जानकारी मांगी गई थीं कि 10 फीसदी सीटों के बढ़ने पर उनके कॉलेज में कितने शिक्षक पदों की आवश्यकता है । कॉलेजों से उनके आंकड़े देने को कहा था । कॉलेजों के प्राचार्यों ने शैक्षिक व गैर शैक्षिक पदों के आंकड़े विश्वविद्यालय को भेज दिए । भेजें गए शैक्षिक पदों के आंकड़ों को लेकर पिछले दिनों डूटा के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय भागी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिले थे । शिक्षा मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे ही अपने कॉलेजों में शिक्षकों की 75 फीसदी पदों पर स्थायी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर लेगा शिक्षा मंत्रालय उन्हें ईडब्ल्यूएस के कारण बढ़ी सीटें दे देगा । डॉ.सुमन ने बताया है कि वर्तमान डीयू कॉलेजों में 82 फीसदी सहायक प्रोफेसरों की स्थायी नियुक्ति हो चुकी है तथा स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है बावजूद इसके अभी तक शिक्षा मंत्रालय ने अपना आश्वासन पूरा नहीं किया । उन्होंने बताया है कि शैक्षिक सत्र -2025 –26 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत छात्र चौथे वर्ष में प्रवेश कर जाएंगे जहाँ शिक्षकों की मांग बढ़ जाएगी । कॉलेजों में अभी तक स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर की है जबकि जुलाई से चार वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू हो जायेगा ।
डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में शैक्षिक पदों पर ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को 10 फीसदी अतिरिक्त सीटों का ब्यौरा 46 कॉलेजों के प्राचार्यों ने दिया है । कॉलेजों के प्राचार्यो ने छात्रों की बढ़ी संख्या के आधार पर 25 फीसदी अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की है । बता दें कि इस वर्ष छात्रों के एडमिशन को तीन साल हो चुके हैं । उन्होंने बताया है कि 46 कॉलेजों ने अपने आंकड़े जारी कर दिए हैं जबकि 35 कॉलेजों ने अभी आंकड़े जारी नहीं किए । इसमें सर्वाधिक अतिरिक्त सीटें मांगने वाले कॉलेजों में है — हंसराज कॉलेज — 92 ,गार्गी कॉलेज — 91 , दयालसिंह कॉलेज –81 ,देशबंधु कॉलेज –80 यूसीएमएस –80 जाकिर हुसैन कॉलेज –72 दौलतराम कॉलेज –60 रामजस कॉलेज –59 कालिंदी कॉलेज –55 ,शिवाजी कॉलेज –49 , रामलाल आनंद कॉलेज –46 , वेंकटेश्वरा कॉलेज — 46 ,हिन्दू कॉलेज –45 स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज –45 , पीजीडीएवी कॉलेज –44 , लेडीश्रीराम कॉलेज –44 , एआरएसडी –44 , विवेकानंद कॉलेज –43 , शहीद भगतसिंह कॉलेज –43 , रामलाल आनंद –42 , जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज –41 , भारती कॉलेज –40 आदि कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस के कारण शिक्षकों की सीटें बढ़ी है । डॉ.सुमन का कहना है कि कॉलेजों व संस्थानों में ईडब्ल्यूएस की अतिरिक्त सीटों के बढ़ने से सामान्य वर्गों / आरक्षित वर्गो के उन एडहॉक टीचर्स को राहत मिलेगी जिनकी सीटें 200 पॉइंट पोस्ट बेस रोस्टर के अंतर्गत ईडब्ल्यूएस में चली गई थीं तथा स्थायी नियुक्ति के समय कुछ कॉलेजों से डिस्प्लेसमेन्ट भी हुए हैं । उन्होंने यह भी बताया है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कारण रोस्टर में बदलाव से सबसे ज्यादा एससी/एसटी व ओबीसी कोटे के अभ्यर्थियों का नुकसान हुआ है क्योंकि आरक्षित वर्गों को अभी तक बैकलॉग व शॉटफाल सीटें नहीं मिली है ।
फोरम के चेयरमैन डॉ. हंसराज सुमन ने डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर ए. के. भागी से एससी/एसटी व ओबीसी कोटे के शिक्षकों का बैकलॉग व शॉर्टफाल पदों पदों की स्थिति पर लंबी मुलाकात कर उनसे ईडब्ल्यूएस की अतिरिक्त सीटों पर भी बातचीत की । प्रोफेसर भागी ने उन्हें बताया है कि ईडब्ल्यूएस की टीचिंग पोस्टों के लिए शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से पुनः जल्द ही मिलने वाले है । प्रोफेसर भागी ने डॉ. सुमन को बताया है कि ईडब्ल्यूएस की टीचिंग पोस्ट के लिए डूटा की ओर से शिक्षा मंत्रालय व यूजीसी को पत्र लिखकर मांग की है तथा जल्द ही वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मिलेंगे । उनका कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने पहले विज्ञापित पदों पर 82 फीसदी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है । उन्हें जल्द ही शिक्षा मंत्रालय दिल्ली विश्वविद्यालय को 25 फीसदी ईडब्ल्यूएस की अतिरिक्त सीटें देगा । प्रोफेसर भागी ने आश्वासन दिया है कि वे ईडब्ल्यूएस सीटों को अवश्य लेकर आएंगे और जो एडहॉक शिक्षक कॉलेजों से डिस्प्लेसमेंट हुए हैं और जहाँ एससी/एसटी व ओबीसी कोटे की सीटें कम हुई है उनकी पूर्ति कराई जाएगी ।
ईडब्ल्यूएस सीटों के बढ़ने से सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को मिलेगी राहत — डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उम्मीदवारों के लिए ईडब्ल्यूएस सीटों के मिलने पर समाज के सभी कमजोर वर्गों के शिक्षकों के साथ सामाजिक न्याय होगा । उनका यह भी कहना है कि शिक्षा मंत्रालय से सीटें मिलने के बाद कॉलेजों को फिर से रोस्टर रजिस्टर तैयार कर विश्वविद्यालय प्रशासन से पास कराकर पदों को विज्ञापित किया जाएगा । उनका कहना है कि किन्हीं कारणों से स्थायी नियुक्ति के समय आरक्षित वर्गो व सामान्य वर्गों के शिक्षक डिस्प्लेसमेन्ट हुए है उन्हें इन पदों पर अवसर दिया जाएगा । फोरम की पहली प्राथमिकता है रोस्टर के कारण पदों के घटने से जो शिक्षकों बाहर हुए पहले उन शिक्षकों की नियुक्ति की जाए । डॉ.सुमन ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है । उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से मांग की है कि दिल्ली सरकार के इन कॉलेजों में भी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए यूजीसी और दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश जारी कर स्थायी सहायक प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति कराए , क्योंकि यहाँ पर भी पिछले एक दशक से स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है ।
दिल्ली सरकार के कॉलेजों में भी हो स्थायी नियुक्ति — प्रोफेसर भागी से फोरम के चेयरमैन डॉ.सुमन ने यह भी मांग रखी कि वे दिल्ली सरकार के पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में भी जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कराएं । डॉ.सुमन ने बताया है कि इन कॉलेजों में पढ़ाने वाले एडहॉक शिक्षकों की नियुक्ति स्थायी रूप में दूसरे कॉलेजों व अन्य विश्वविद्यालयों में हो जाने के कारण यहाँ पर गेस्ट टीचर्स व एडहॉक टीचर्स के सहारे ये कॉलेज चल रहे हैं । यहाँ पर पिछले एक दशक से शिक्षकों व कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है । प्रो.भागी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि दिल्ली सरकार के बचे हुए कॉलेजों में भी स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू कराई जाएगी । उन्होंने बताया है कि कॉलेजों में स्थायी नियुक्ति , पदोन्नति के साथ पेंशन व अन्य मुद्दों पर तीव्र गति से कार्य हो रहा है , जहाँ लगभग 5000 स्थायी शिक्षक व 17 हजार यूनिट से अधिक पदोन्नति हुई है , विश्वविद्यालय / कॉलेजों में यह प्रक्रिया जारी है ।


