
किताबे
अलमारी में रखी किताबे आज रो रही है,
चीख चीख कर पूछ रही है
अब कोई हमें छूता नहीं,
क्या 21वी सदी में छुआ छूत
सामाज से निकल कर हम (किताबों)पर आ गया।
क्या अब लोग ज्ञानी नहीं बनना चाहते
भूत भविष्य का जानना नहीं चाहते
वर्तमान में पढ़ ना छोड़ दिया
ऐसा क्या गुनाह किया हमने (किताबों)
जो सलाखों के पीछे आ गए
केस तो सबका लड़ा जाता
हमारा नंबर क्यों नहीं आता
हमे क्यों जमानत नहीं मिलती।
प्रतिभा जैन
टीकमगढ़ मध्य प्रदेश



