ऑटिस्टिक बच्चों की स्टेम सेल थेरेपी पर गुरुग्राम में अभिभावकों का प्रदर्शन

गुरुग्राम । ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के लिए स्टेम सेल थेरेपी के मुद्दे पर पेरेंट्स फोरम फॉर स्टेम सेल्स इन ऑटिज्म एंड सेरेब्रल पाल्सी ने रविवार को गुरुग्राम के सुभाष चंद्र बोस पार्क में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। अभिभावकों ने स्टेम सेल थेरेपी से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई। इस दौरान फोरम ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों को संबोधित एक खुला पत्र भी जारी किया।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा यश चैरिटेबल ट्रस्ट एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य, रिट याचिका (सिविल) 369/2022 मामले में स्टेम सेल थेरेपी से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का फैसला रहा। फोरम ने मांग की कि इस फैसले से प्रभावित परिवारों की चिंताओं, उनके अनुभवों और बच्चों की उपचार संबंधी जरूरतों पर उचित विचार किया जाए। फोरम के अनुसार, वह करीब 5,000 अभिभावकों और परिवारों का प्रतिनिधित्व करता है।
ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे की मां और डॉक्टर डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके बच्चे में स्टेम सेल थेरेपी के बाद सुधार देखने को मिला। उन्होंने कहा, “मैं यहां केवल एक डॉक्टर के तौर पर नहीं, बल्कि एक मां के रूप में भी अपनी बात रख रही हूं। मैंने अपने बच्चे में व्यक्तिगत रूप से सुधार देखा है। मेरे जैसे परिवारों के अनुभवों को भी निष्पक्ष रूप से सुना और परखा जाना चाहिए।”
प्रदर्शन में अभिभावकों के साथ दादा-दादी और अन्य परिजन भी शामिल हुए। उन्होंने उन बच्चों के भविष्य और उपचार को लेकर चिंता जताई, जो पहले से स्टेम सेल थेरेपी करा रहे हैं या जिनका उपचार पहले हो चुका है। प्रदर्शन में शामिल सोनिया ने कहा कि यह जुटान उन परिवारों की सामूहिक चिंता को दर्शाता है, जो अपने अनुभवों को सामने रखने और अपनी बात सुने जाने का अवसर चाहते हैं।
अभिभावकों ने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान प्रभावित परिवारों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला था। उन्होंने मांग की कि मामले से जुड़े वैज्ञानिक शोधपत्रों, मरीजों के अनुभवों और प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों पर भी विचार किया जाए, ताकि प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों की परिस्थितियों को समझा जा सके।
अपने खुले पत्र में फोरम ने बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने, अभिभावकों को उचित सुनवाई का अवसर देने और मामले में प्रस्तुत वैज्ञानिक साहित्य एवं मरीजों के अनुभवों का निष्पक्ष मूल्यांकन करने की अपील की। फोरम ने भारतीय डॉक्टरों और अस्पतालों द्वारा किए गए कार्यों पर भी उचित विचार किए जाने की मांग की।
फोरम ने स्टेम सेल थेरेपी करा रहे बच्चों को नैदानिक परीक्षण करने वाले संस्थानों में स्थानांतरित करने से संबंधित निर्देश पर भी चिंता जताई। अभिभावकों का कहना है कि ऐसे परीक्षणों में उपयुक्त विकल्पों की उपलब्धता और बच्चों की मौजूदा चिकित्सा व्यवस्था को दूसरे संस्थानों में स्थानांतरित करने से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों पर ध्यान देना जरूरी है।
प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने कंपनियों द्वारा निर्मित स्टेम सेल-आधारित उत्पादों और स्व-कोशिका उपचार प्रक्रियाओं के बीच अंतर पर भी ध्यान आकर्षित किया। स्व-कोशिका प्रक्रिया में मरीज की अपनी कोशिकाएं लेकर उसी मरीज को वापस दी जाती हैं। फोरम ने मांग की कि संबंधित नियामकीय व्यवस्था पर विचार करते समय इस अंतर के साथ-साथ मरीजों, उनके परिवारों और उपचार करने वाले डॉक्टरों के विचारों को भी उचित महत्व दिया जाए।
अभिभावकों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले से उपचार प्राप्त कर रहे बच्चों की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि उपचार तक पहुंच को प्रभावित करने वाले कदम उठाने से पहले बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों और परिवारों की परिस्थितियों पर विचार किया जाए।
आयोजकों के अनुसार, दिल्ली में सार्वजनिक सभाओं पर कथित प्रतिबंधों को देखते हुए प्रदर्शन के लिए गुरुग्राम को चुना गया। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य प्रभावित परिवारों की आवाज को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना और उन्हें अपनी चिंताएं रखने का सार्थक अवसर दिलाना है।
फोरम ने पूरे मामले के वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और कानूनी पहलुओं पर निष्पक्ष विचार करने की मांग करते हुए कहा कि ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों से जुड़े फैसलों में उनके कल्याण, मौलिक अधिकारों और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
प्रदर्शन के अंत में फोरम ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग दोहराई। उसने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि स्टेम सेल थेरेपी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित परिवारों की चिंताओं को सुना जाए और बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी समस्याओं पर उचित विचार किया जाए।



