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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मसूरिया दिन पासी की जयंती प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मनायी गयी

लखनऊ । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी एवं प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मसूरिया दिन पासी जी की जयंती आज यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मनायी गयी तथा आज गांधी जयन्ती के सुअवसर पर उ.प्र. कांग्रेस विचार विभाग के चेयरमैन  एच.एल. दुसाध जी द्वारा एक व्याख्यान कार्यक्रम का भी आयोजन प्रदेश कंाग्रेस मुख्यालय में किया गया। स्व. कामराज नाडार की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।

सर्वप्रथम गांधी जयन्ती पर प्रांगण में स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी तदुपरान्त मूर्ति के सामने बैठकर उ0प्र0 कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष डा0 प्रमोद कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में भारी संख्या में सेवादल के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा प्रातः राम धुन का कार्यक्रम किया गया।

इसके उपरान्त मीडिया सभागार में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी एवं प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मसूरिया दिन पासी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इसके उपरान्त आयोजित संगोष्ठी में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।

संगोष्ठी का संचालन प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता बृजेन्द्र कुमार सिंह ने किया।

गांधी एवं शास्त्री जयंती समारोह को मुख्य व्याख्यानकर्ता के रूप में सम्बोधित करते हुये राजीव गांधी स्टडी सर्कल के राष्ट्रीय समन्वयक एवं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राजनीति विज्ञानी प्रो.सतीश कुमार राय ने कहा कि लोकमानस में गांधी आधुनिक भारत के गणतंत्रात्मक भाव वितान के सबसे बड़े गण देवता थे। उन्होंने भारतीय राजनीति को जनाभिमुख और भारतीय स्वतंत्रता के राष्ट्रीय आन्दोलन के राष्ट्रीय जनान्दोलन बनाया।

प्रो.राय ने कहा कि महात्मा गांधी अतीत ही नहीं भविष्य भी हैं। गांधी के सत्याग्रह के बिना कोई लोकतंत्र नहीं चल सकता। भारतीय संस्कृति के आदर्श प्रतिनिधि थे, जो धर्मनिष्ठ ऐसे थे जिन्हें राजनीतिज्ञ होते हुये जमाना महात्मा कहने लगा। युग के सबसे बड़े रामभक्त थे, तो दूसरी ओर धर्मनिरपेक्ष राजनीति की भी मिसाल थे। वह भारत के समग्र इतिहास में राजनीतिक लोकचेतना पर आधारित राष्ट्रीय जन आन्दोलन के अग्रणी प्रवर्तक थे, जिनके नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम निर्णायक मुकाम तक पहुंचा।

उन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता का संहिताकरण कर दुनिया के सबसे बड़ा संवैधानिक लोकतंत्र जब गढ़ा गया, तब महात्मा गांधी के परामर्श पर नेहरू और पटेल ने जयकर से त्यागपत्र दिलाकर न केवल डा.अम्बेडकर को फिर से संविधान सभा का सदस्य एक उप चुनाव में बनवाया, बल्कि कांग्रेस ने बहुमत दल के नाते अपने दावे को दरकिनार रख, डा.अम्बेडकर को प्रारूप समिति का सदस्य ही नहीं, अध्यक्ष का युग दायित्व भी सौंपा। तब समाजवादी एवं साम्यवादी, संविधान सभा का बायकाट कर रहे थे, पर अंबेडकर ने कांग्रेस से मिलकर वह युगधर्म बखूबी पूरा किया। बड़े लोगों में मतभेद होते हैं, मनभेद नहीं और इसीलिए गांधी एवं डा.अंबेडकर के बीच तमाम मतभेदों के बावजूद पूना समझौता से संविधान निर्माण तक एक समन्वय है, जिस पर बीती सदी का भारत बना और 21वीं सदी का भारत चल सकता है।

संगोष्ठी को मुख्य रूप से पूर्व मंत्री राजबहादुर, पूर्व विधायक श्याम किशोर शुक्ला, सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष डा. प्रमोद पाण्डेय, विचार विभाग के वाइस चेयरमैन सुरेन्द्र यादव, प्रदेश कांग्रेस के निवर्तमान महासचिव जयकरन वर्मा, कन्ट्रोल रूम प्रभारी विजय बहादुर आदि ने सम्बोधित किया।

इस मौके पर पूर्व मंत्री  राजबहादुर, सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. प्रमोद कुमार पाण्डेय, विचार विभाग के वाइस चेयरमैन  सुरेन्द्र यादव,  जयकरन वर्मा,  अरशी रजा,  रमेश मिश्रा, पुष्पेन्द्र श्रीवास्तव, डाॅ. शहजाद आलम, श सुशील तिवारी सोनू पंडित,  सिद्धिश्री,  अनामिका यादव, नरेश बाल्मीकि,  सत्यदेव सिंह संजय सिंह,  शमशाद आलम, राकेश पाण्डेय, जैनब हैदर,  सुशीला शर्मा,  अनिल शुक्ला,  शीला मिश्रा,  विशम सिंह,  सुशील बाल्मीकि,रजनीश यादव,  बबिता मिश्रा, सुमन प्रजापति,  विभा त्रिपाठी,  शिफा खान,  दुर्गा देवी,  अजीत मौर्य, मो. शब्बीर सहित सैंकड़ों की संख्या में कांग्रेसजन शामिल रहे।

 

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