भारत विरोधी एजेंडा से बाहर आएं भड़काऊ भाई जान

खबर हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय डेमोग्राफिक कमेटी ने राज्यों से 15 साल का विस्तृत धर्मवार डेटा मांगा है।
कमेटी ने राज्यों को 35 प्रश्नों वाली प्रश्नावली भेजकर गत 15 वर्षों का धर्म और जिलेवार जन्म पंजीकरण और स्कूलों में दाखिले, वाहन पंजीकरण और संपत्ति के लेन-देन से जुड़ी जानकारी के अतिरिक्त आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड के पंजीकरण में हुई असामान्य बढ़ोतरी का डेटा मांगा गया है।
कमेटी गैर-कानूनी तरीके से लोगों के आने और असामान्य जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन कर रही है।
यह अध्ययन देश के हर रिलिजन का होना है किंतु एक विदेशी बैरिस्टर को उनमें सिर्फ एक मजहब ही नजर आता है।
मुसलमीन पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि इस तरह के डेटा का इस्तेमाल मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।
भारत विरोध एजेंडे के शिकार वे भड़काऊ भाई जान कहते हैं कि ‘इस कमीशन का एजेंडा यह नहीं है कि आँकड़ों की बुनियाद पर बेहतर नीतियाँ बनाई जाएँ, बल्कि आँकड़ों को इस तरह तोड़-मरोड़कर पेश किया जाए कि मुसलमानों को निशाना बनाया जा सके और उनके बचे-कुचे हक़ भी उनसे छीन लिए जाएँ’।
जब सरकार या कमेटी ने कुछ कहा नहीं और अभी कोई डाटा इकट्ठा हुआ नहीं, तो वंदे मातरम् विरोधी इन सांसद महोदय ने कहां से सूंग लिया कि आंकड़ों को तोड़ा मरोड़ा जाएगा और मुसलमानों का हक छीना जाएगा?
ये वही कट्टरपंथी हैं जिन्होंने मुस्लिम समाज में झूठ फैला कर तीन तलाक पर रोक और राम मंदिर पर न्यायालय निर्णय के विरुद्ध भड़काया, नागरिकता संशोधन अधिनियम के द्वारा मुसलमानों की नागरिकता छीने जाने का झूठ फैलाया और अब सरकारी काम में बाधा डालकर जिहादियों को उकसा रहे हैं।
उन्हें अपनी इस देश विरोधी मानसिकता से बाज आना चाहिए।
विनोद बंसल राष्ट्रीय प्रवक्ता विहिप



