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भागवत कथा में गोवर्धन प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन

वक्ताओं ने गौ-सेवा व पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

लखनऊ । डालीगंज स्थित बंदी माता स्थान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान गोवर्धन पूजा प्रसंग का श्रद्धापूर्वक वर्णन किया गया। कथा वाचिका रोली शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा कराए जाने की कथा सुनाते हुए बताया कि यह प्रसंग प्रकृति, गौ-सेवा और पर्यावरण संरक्षण का शाश्वत संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पर्वत केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि ब्रजवासियों के जीवन, गौवंश और प्रकृति के संरक्षण का प्रतीक है।

पश्चिम विधानसभा की पूर्व प्रत्याशी अंजनी श्रीवास्तव ने कहा कि गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। उन्होंने लोगों से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण, गौ-संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

भारतीय संस्कृति में प्रकृति को देवतुल्य माना गया है और गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है। आचार्य नारायण मिश्रा ने गोवर्धन पूजा के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं से धर्म और संस्कृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

पार्षद रंजीत सिंह ने बताया कि राधे लाल लोधी, रणजीत सिंह, राजेश जोशी, संजय वर्मा, संजीव गोसाईं, अरुण सिंह, राहुल सिंह, दिलीप कार्की सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

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