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राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीयू कुलसचिव ने महाविद्यालय के प्राचार्यों / निदेशकों को सर्कुलर जारी किया

प्रत्येक महाविद्यालय राजभाषा हिंदी सप्ताह का आयोजन करें  : प्रो. सुमन

लखनऊ : भारत सरकार के राजभाषा संबंधी प्रावधानों के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय (राजभाषा प्रकोष्ठ ) के कुलसचिव ने संकायों के अधिष्ठाता , निदेशक, दक्षिण परिसर , महाविद्यालय के प्राचार्यों , वित्त अधिकारी , संकाय सदस्यों/ निदेशकों को हिंदी में कार्य करने संबंधी सर्कुलर जारी किया है । उन्होंने भेजे गए सर्कुलर में बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय, भारत सरकार के राजभाषा संबंधी प्रावधानों के अनुसार- क क्षेत्र में स्थित एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय में भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी राजभाषा अधिनियम, 1963, राजभाषा नियम, 1976, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के निर्देशों तथा राजभाषा के वार्षिक कार्यक्रम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में राजभाषा नीति के समुचित अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, महाविद्यालयों के प्राचार्यों, निदेशकों, अधिकारियों तथा कर्मचारियों को निम्नलिखित बिंदुओं का अनुपालन करना अति आवश्यक है ।

कुलसचिव ने निदेशक ( कम्प्यूटर केंद्र ) को कहा है कि इस परिपत्र को राजभाषा प्रकोष्ठ के वेब पेज पर अपलोड करें । दिल्ली विश्वविद्यालय की सर्वोच्च संस्था विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य व अरविंदो कॉलेज में प्रोफेसर हंसराज सुमन ने राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली विश्वविद्यालय की इस पहल का स्वागत किया हैं और कहा है कि हिंदी को हर छात्र तक पहुंचाने के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक महाविद्यालय राजभाषा हिंदी सप्ताह का आयोजन करें और इस वर्ष सितंबर 2026 में हिंदी सप्ताह / पखवाड़ा के अंतर्गत इंटर कॉलेज हिंदी प्रतियोगिताएं आयोजित करें । इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य छात्रों में हिंदी को बढ़ावा देना , उसे रोजगार से जोड़ने के लिए अनुवाद , फिल्म , रंगमंच , पत्रकारिता, रेडियो जॉकी , ब्लॉग लेखन , सोशल मीडिया , हिंदी शिक्षण आदि पर कार्यक्रम आयोजित किए जाए । उन्होंने भारत सरकार से राजभाषा हिंदी प्रकोष्ठ के लिए अनुदान बढ़ाएं जाने की मांग की है। उनका कहना है कि महाविद्यालयों में हिंदी दिवस , हिंदी पखवाड़ा के अलावा हिंदी संबंधी बहुत से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं , इन कार्यक्रमों से ही छात्र – छात्राएं जुड़ती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की सर्वोच्च संस्था विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य व अरविंदो कॉलेज में प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि महाविद्यालय के प्राचार्यों / निदेशकों को निर्देश देते हुए कुलसचिव ने लिखा है कि सभी प्रोस्पेक्टस, सूचना बुलेटिन, सूचनापट्ट, रबड़ की मोहरें, पत्रशीर्ष, फाइल कवर, नामपट्ट, प्रदर्शनी (वैनर/होर्डिंग), विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के पहचान पत्र, निमंत्रण-पत्र, पुस्तकालय कार्ड, लिफाफों पर पते इत्यादि द्विभाषी रूप में (ऊपर/पहले हिंदी तथा नीचे/बाद में अंग्रेजी या अन्य भाषा तथा फोंट आकार समान) मुद्रित किए जाएं। उन्होंने भेजे गए सर्कुलर में लिखा है कि राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3 ( 3) के अंतर्गत जारी होने वाले कागजात, यथा सामान्य आदेश (General Orders), ज्ञापन (Memorandums), संकल्प (Resolutions), अधिसूचनाएं (Notifications), नियम (Rules), करार (Agreements), संविदा (Contracts), निविदा सूचनाएं (Tender Notices), संसदीय प्रश्न (Parliament Questions), प्रशासनिक रिपोर्टें (Administrative reports), अन्य रिपोर्टें (Other reports), प्रेस विज्ञप्तियां (Press Communiques), अनुज्ञप्ति (Licences), अनुज्ञा-पत्रों (Permits), सूचनाओं (Notices), निविदा-प्रारूपों (Forms of tender) इत्यादि आवश्यक रूप से द्विभाषी (हिंदी तथा अंग्रेजी) होने चाहिए।

सर्कुलर में लिखा है कि जर्नल एवं मानक संदर्भ पुस्तकों को छोड़कर पुस्तकालय अनुदान का कम से कम 50 प्रतिशत हिंदी पुस्तकों, हिंदी डिजिटल सामग्री तथा अनुवाद संबंधी सामग्री की खरीद पर व्यय करने का प्रयास किया जाए। कार्यालयों में उपलब्ध सभी कंप्यूटरों पर यूनिकोड की सहायता से हिंदी में टंकण कार्य किया जाए। सभी सेवा पुस्तिकाओं/अभिलेखों में प्रविष्टियां हिंदी में की जाए तथा सभी प्रकार के रजिस्टरों आदि के शीर्षक अनिवार्य रूप से द्विभाषी (हिंदी व अंग्रेजी) हो। उन्होंने बताया है कि क एवं ख क्षेत्र से प्राप्त सभी पत्रों के उत्तर हिंदी में दिए जाए। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार के कार्यालयों से अंग्रेजी में प्राप्त पत्रों के उत्तर भी हिंदी में दिए जाए। इतना ही नहीं राजभाषा नियम, 1976 (यथा संशोधित, 1987, 2007 तथा 2011) के नियम–5 के अनुसार हिंदी में प्राप्त पत्रों के उत्तर अनिवार्य रूप से हिंदी में दिए जाएं। विश्वविद्यालय द्वारा जारी सर्कुलर में लिखा है कि राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी वार्षिक कार्यक्रम (वर्ष 2026-27) में निर्धारित लक्ष्य ( क क्षेत्र के लिए 80% टिप्पणियां हिंदी में लिखी जाए) के अनुसार टिप्पणियां हिंदी में लिखी जाएं और पत्राचार ( क क्षेत्र के लिए 100% पत्राचार ) हिंदी में किया जाए।

प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि डीयू कुलसचिव द्वारा जारी सर्कुलर में आगे लिखा है कि कार्यालयों में संबंधित सभी मैनुअल संहिताएं और प्रक्रिया संबंधी अन्य साहित्य हिंदी और अंग्रेजी में द्विभाषिक रूप में यथास्थिति, मुद्रित या साइक्लोस्टाइल किया जाए और प्रकाशित किया जाए। हिंदी में प्रवीणता प्राप्त कर्मचारी अपना कार्यालयी कार्य शत-प्रतिशत हिंदी में करने का प्रयास करें। हिंदी में प्रवीण सभी उच्च अधिकारी अपने कर्मचारियों को लक्ष्यानुसार श्रुतलेखन हिंदी में देने का प्रयास करें । विश्वविद्यालय की वेबसाइट by default हिंदी में खुलना सुनिश्चित किया जाए और अन्य भाषाओं में खोलने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए। इतना ही नहीं , विश्वविद्यालय में आयोजित सभी बैठकों की कार्यसूची और कार्यवृत्त हिंदी में जारी करने का पूर्ण प्रयास करें। विश्वविद्यालय में कंप्यूटर पर अधिक से अधिक प्रशासनिक, लेखा, प्रचालन तथा अन्य कार्य हिंदी में किए जाने का पूर्ण प्रयास किया जाए।

प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुलसचिव ने जारी सर्कुलर में लिखा है कि सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि राजभाषा हिंदी के प्रयोग हेतु अपने कामकाज में राजभाषा हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें और वार्षिक कार्यक्रम 2026–27 में उल्लिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में ठोस उपाय करें। साथ ही उपर्युक्त के संबंध में किसी भी प्रकार के राजभाषा नियमों का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

 

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