इंडिया गठबंधन की मांग- इस्तीफा दें केंद्रीय शिक्षा मंत्री
चुनावों में धांधली के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र सौंपेगा इंडिया गठबंधन

नई दिल्ली : इंडिया गठबंधन ने मांग की है कि परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री तत्काल इस्तीफा दें। साथ ही देश की गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई समेत विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए।
सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन के 23 दलों के नेताओं की मौजूदगी में यह निर्णय भी लिया गया कि चुनावों में की जा रही धांधली के मुद्दे पर जल्द ही भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र सौंपा जाएगा।
यह जानकारी इंडिया गठबंधन की बैठक के उपरांत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्रकारों से बातचीत में दी। इस दौरान उनके साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित इंडिया गठबंधन के अनेक वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।
खरगे ने गठबंधन की एकजुटता को रेखांकित करते हुए बताया कि बैठक में पांच प्रमुख बिंदुओं पर सर्वसम्मति बनी है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि बैठक में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने फैसला किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतदाता सूची में हेरफेर तथा चुनावों की निष्पक्षता पर उठे गंभीर प्रश्नों के संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश को शीघ्र ही एक पत्र सौंपा जाएगा।
उन्होंने बताया कि लाखों विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले अनेक गंभीर मुद्दों की स्थिति को देखते हुए गठबंधन ने सर्वसम्मति से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में नीट और सीबीएसई जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों युवाओं के भविष्य के साथ विश्वासघात हुआ है।
उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचारों और किसानों की समस्याओं जैसे जनसरोकार के मुद्दों पर इंडिया गठबंधन ने केंद्र सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
खरगे ने बताया कि बैठक में गठबंधन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने के लिए यह भी तय किया गया है कि गठबंधन के सभी दल प्रत्येक दो महीने में बैठक करेंगे। अगली बैठक अगस्त माह में हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। इसके अलावा आगामी मानसून सत्र के दौरान संसदीय समन्वय जारी रहेगा। इसके लिए रोजाना सुबह नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।
इससे पहले बैठक में अपने शुरुआती वक्तव्य में मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन के सभी नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि गठबंधन ने 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में अपनी एकजुटता और एकता को बहुत निर्णायक तरीके से दिखाया, जब सभी दलों ने मजबूती से एकजुट होकर परिसीमन पर मोदी सरकार के दुर्भावनापूर्ण बिलों को परास्त किया। उन्होंने कहा कि अब गठबंधन दलों को उसी भावना को और मजबूत करते हुए आगे बढ़ाना है, ताकि मोदी सरकार के कुशासन के कारण देश के सामने खड़ी राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और विदेश नीति से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सके।
खरगे ने कहा कि एसआईआर के कारण देश के करोड़ों लोगों से उनका मताधिकार छीना जा रहा है और संविधान पर हमला लगातार जारी है। जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने और डराने-धमकाने के औजार के रूप में लगातार किया जा रहा है। गैर-भाजपा सरकारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
खरगे ने कहा कि जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आर्थिक माहौल बेहद नकारात्मक है। नई नौकरियां पैदा करने के लिए जिस रफ्तार से नए निवेश आने चाहिए, वे बिल्कुल उस रफ्तार से नहीं आ रहे हैं। कई क्षेत्रों में निजी एकाधिकार बढ़ रहा है और छोटे-मध्यम उद्योगों का भविष्य गंभीर संकट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली के पूर्ण कुप्रबंधन के कारण देश के लाखों युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात किया जा रहा है। साथ ही भाजपा शासित राज्यों में समाज के कमजोर वर्गों पर अत्याचार लगातार जारी है।
उन्होंने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि देश की विदेश नीति के साथ पूरी तरह से समझौता किया गया है और उन पारंपरिक मूल्यों को कायम नहीं रखा गया है, जिनका भारत लंबे समय से पुरजोर समर्थन करता रहा है।
बैठक में कांग्रेस से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अलावा के सी वेणुगोपाल और जयराम रमेश; तृणमूल कांग्रेस से ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन; राजद से तेजस्वी यादव और संजय यादव; एनसीपी (एसपी) से सुप्रिया सुले; शिवसेना (यूबीटी) से उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और संजय राउत (तीनों ऑनलाइन); सीपीआई (एम) से जॉन ब्रिटास; सीपीआई से डी राजा और पी संतोष कुमार; समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव और मोहिबुल्लाह नदवी; नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्ला और शमी ओबेरॉय; सीपीआई (एमएल) से दीपांकर भट्टाचार्य और रवि कुमार; जेएमएम से हेमंत सोरेन (ऑनलाइन); आईयूएमएल से सादिक थंगल और कुन्हालीकुट्टी; केसी (एम) से जोस के मणि; एमडीएमके से वाइको; वीसीके से थिरुमावलवन और रवि कुमार; आरएसपी से एन के प्रेमचंद्रन; केसी (जोसेफ) से फ्रांसिस जॉर्ज; ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक से जी देवराजन; पीडीपी से महबूबा मुफ्ती; भारत आदिवासी पार्टी से राजकुमार रोत; पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया से जयंत पाटिल; लोक दल से सुनील सिंह और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल शामिल हुए।


