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प्राचीन गांवों और 92 कॉलोनियों से हटाया जाए ‘ओ—जोन’ – भाजपा सांसदों मनोज तिवारी और रामवीर सिंह बिधूड़ी ने की उपराज्यपाल से भेंट

नई दिल्ली  : दिल्ली के दर्जनों प्राचीन गांवों तथा 92 कॉलोनियों से ओ—जोन हटाने की मांग को लेकर सांसद  मनोज तिवारी और रामवीर सिंह बिधूड़ी आज उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधु से मिले। उन्होंने कहा कि इन गांवों और कॉलोनियों में रह रहे 15 लाख लोगों में बेचैनी बनी हुई है। दोनों सांसदों ने श्री संधु को इस संबंध में सभी तथ्यों से अवगत कराया।

इस संबंध में उपराज्यपाल को दिए गए पत्र में बताया गया है कि इन प्राचीन गांवों और कॉलोनियों को 24 मार्च 2008 को ही नियमित कर दिया गया था और तब ये क्षेत्र ओ—जोन नहीं बल्कि एफ जोन में आते थे। 10 अगस्त 2010 को इन क्षेत्रों को यमुना के ओ—जोन में डाल दिया गया। जब इन कॉलोनियों के लोगों ने इसका विरोध किया तो 28 सितंबर 2013 को डीडीए ने इन्हें ओ—जोन से हटाने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन का नोटिस भी जारी किया लेकिन एक एनजीओ के आवेदन पर एनजीटी ने इसपर स्टे लगा दिया।

भाजपा सांसदों ने उपराज्यपाल को बताया कि एनजीओ के आवेदन का निपटारा 13 जनवरी 2015 को कर दिया गया लेकिन इन गांवों और कॉलोनियों पर निर्णय लगातार लटकता रहा। इन कॉलोनियों के ओ—जोन में होने के फैसले को तत्कालीन उपराज्यपाल भी गलत कह चुके हैं और डीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष ने भी माना है कि गांव की आबादी का लैंड यूज आवासीय ही है। इसके बावजूद ओ—जोन के मकानों पर तलवार लटकी हुई है और तोड़फोड़ की जा रही है। दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट है कि कॉलोनियां यमुना नदी से काफी दूर हैं और केंद्र सरकार की एक्सपर्ट कमेटी मान चुकी है कि इससे नदी के बहाव या फिर पानी की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

श्री तिवारी और बिधूड़ी ने उपराज्यपाल से अनुरोध किया है कि चूंकि इन कॉलोनियों को 24 मार्च 2008 को नियमित किया जा चुका है और अब एनजीटी में कोई मामला भी लंबित नहीं है तो ओ—जोन हटाने के 28 सितंबर 2013 के नोटिफिकेशन को ही जारी कर दिया जाए ताकि इन कॉलोनियों के 15 लाख लोगों को राहत मिल सके।

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