बिहार के 14 विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति के विज्ञापन जारी
प्रतिकुलपति पदों पर एससी/एसटी , ओबीसी वर्गो को आरक्षण नहीं -- टीचर्स एसोसिएशन ने लगाया आरोप
नई दिल्ली : ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी एंड कॉलेजिज एससी/एसटी,ओबीसी टीचर्स एसोसिएशन के नेशनल चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने अनुसूचित जाति/जनजाति के कल्याणार्थ संसदीय समिति व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/ जनजाति आयोग के चेयरमैन को पत्र लिखकर बताया है कि हाल ही में बिहार राज्य के 14 विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति के विज्ञापन जारी हुए हैं , लेकिन बिहार राज्य ने प्रतिकुलपति पदों पर एससी एसटी /ओबीसी वर्गो को आरक्षण नहीं दिए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि सामाजिक न्याय का ढिंढोरा पीटने वाली बिहार सरकार ने अपने यहाँ 14 विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपतियों के पदों पर केंद्र सरकार की आरक्षण नीति का पालन नहीं किया जिससे आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों में गहरा रोष व्याप्त है।
टीचर्स एसोसिएशन के नेशनल चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि बिहार राज्य के 14 विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपतियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की है । इस संबंध में विज्ञापन जारी करते हुए योग्य और अनुभवी शिक्षाविदों से एक जुलाई 2026 तक ऑन लाइन आवेदन मांगें गए हैं । जारी विज्ञापन के अनुसार — बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय , भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय , जयप्रकाश विश्वविद्यालय , कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय , ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय , मगध विश्वविद्यालय , मौलाना मज़हरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय , तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय , वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय , पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय , मुंगेर विश्वविद्यालय , पूर्णिया विश्वविद्यालय , पटना विश्वविद्यालय और नालंदा खुला विश्वविद्यालय में प्रतिकुलपति के पदों पर नियुक्ति होगी ।
प्रतिकुलपति पदों पर नहीं दिया आरक्षण — बिहार राज्य सरकार ने अपने यहाँ 14 विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति की जानी है । लेकिन उन्होंने विज्ञापन में आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को किसी प्रकार का आरक्षण नहीं दिया । विज्ञापन के अनुसार निर्धारित मापदंड के अनुसार अभ्यर्थी की आयु 67 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए । अभ्यर्थी प्रतिष्ठित शिक्षाविद व उसके पास विश्वविद्यालय प्रणाली में प्रोफेसर के रूप में न्यूनतम 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए । बिहार लोक भवन ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों के पास शैक्षणिक योग्यता का प्रमाणित अनुभव होना चाहिए । तथा सूची में चिन्हित योग्य उम्मीदवारों को सर्च कमेटी साक्षात्कार के लिए आमंत्रित करेगी । प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि बिहार राज्य सरकार ने न ही प्रतिकुलपति पदों पर एससी / एसटी,ओबीसी वर्गो को आरक्षण दिया और न ही उम्मीदवारों की योग्यता को कम किया ।
नेशनल चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहना है कि वैसे तो बिहार राज्य की सरकार सामाजिक न्याय का ढिंढोरा पीटने में आगे है , वहीं दूसरी ओर 14 विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति की जानी है उसमें ओबीसी वर्गो व एससी/ एसटी को किसी तरह का आरक्षण न देना केंद्र सरकार की आरक्षण नीति की सरेआम अवहेलना करना है । उन्होंने बताया है कि देश भर में लगभग 1200 केंद्रीय, राज्य व मानद विश्वविद्यालय है लेकिन दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि एक प्रतिशत भी आरक्षित श्रेणी के वाइस चांसलर इन विश्वविद्यालयों में नहीं है । जबकि आरक्षित श्रेणी में योग्य उम्मीदवारों की कोई कमी नहीं है । पहले कहते थे कि एससी / एसटी व ओबीसी उम्मीदवार चयन समिति के समक्ष उपलब्ध नहीं हुए अब उपलब्ध हैं तो उन्हें अवसर नहीं दिए जा रहे। उन्होंने इस संबंध में आयोग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग दोहराई है और कहा है कि केंद्र सरकार की आरक्षण नीति अनुसार इन विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपति पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करें तभी इन वर्गों के साथ वास्तविक रूप में सामाजिक न्याय होगा ।



