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कभी गोकुल का ग्वाला तो कभी द्वारिकाधीश बने लीलाधर श्रीकृष्ण

चैती महोत्सव छठा दिन

लखनऊ। श्री ऐशबाग रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रहे चैती महोत्सव 2026 में बुधवार को कृष्णलीला के छठे दिन का मंचन जरासंध द्वारा लगातार सत्रह बार आक्रमण किए जाने से होता है जब जरासंध के हमलों से त्रस्त मथुरा वासियों की सुरक्षा के लिए श्रीकृष्ण मथुरा छोड़ने का कठिन निर्णय लेते हुए यदुवंशियों के साथ पश्चिमी तट पर स्थित कुशस्थली जो समुद्र के बीच स्थित स्थल है वे उसी स्थान पर द्वारिका नगरी का निर्माण करते हैं।

उधर कृष्ण के द्वारा मथुरा से द्वारका जाने के बाद जरासंध मथुरा पर कब्जा कर वहां का राजा बन जाता है ।
तो दूसरी ओर श्रीकृष्ण का द्वारिका नगरी में हर्षोल्लास के साथ राज्याभिषेक किया गया । राजा बनने के बाद श्रीकृष्ण अपने दूत को संधि पत्र देकर हस्तिनापुर भेजते हैं।
मथुरा में कृष्ण के जीवित होने की खबर से मिलते ही जरासंध भयभीत हो उठता है, तो दूसरी ओर हर्षोल्लास के बीच श्रीकृष्ण और रुकमिणी विवाह के मंचन के साथ छठे दिन की लीला के मंचन का समापन किया गया ।
चैती महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर नृत्य मंथन स्कूल ऑफ डांस द्वारा “श्याम की जोगन , जब बंसी बजाता हैं, हे गोपाल कृष्ण” जैसे श्रीकृष्ण भजनों पर अंकिता वाजपेई द्वारा नृत्य कला का प्रस्तुति करण किया गया ।
इसके बाद हुमा साहू के निर्देशन में नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा को नमन करते हुए उनके विविध स्वरूपों पर देवी स्तुति, रुक्मणी और कृष्ण विवाह प्रसंग, श्रीकृष्ण और गोपिकाओं के रास के साथ ही राधाकृष्ण की होली पर भाव पूर्ण नृत्य प्रस्तुतियां दी गईं जिन्हे देख दर्शकों द्वारा सराहा गया ।
रामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचंद्र अग्रवाल ने बताया की हमारा प्रयास है की चैती महोत्सव के मंच से सांस्कृतिक समृद्धि से ओत प्रोत भारतीय परंपराओं को मंच के माध्यम से हर घर तक पहुंचाया जाए । उन्होंने बताया की गुरुवार को कृष्णलीला में द्रौपदी स्वयंवर और अर्जुन सुभद्रा विवाह की लीलाएं मंचित की जाएंगी ।

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