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कलांश 2.0” अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी आयोजित, देशभर के कलाकारों ने बिखेरे सृजन के रंग

लखनऊ । कला निकेतन सोसायटी, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित “कलांश 2.0” अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी का सफल समापन राज्य ललित कला अकादमी, लाल बारादरी भवन, कैसरबाग, लखनऊ में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।

चार दिवसीय यह प्रदर्शनी (9 से 12 अक्टूबर 2025) भारतीय कला, परंपरा और आधुनिकता के समन्वय का एक अद्वितीय उदाहरण बनी।

इस प्रदर्शनी में लखीमपुर,बस्ती ,सीतापुर, कानपुर, लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद सहित पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ जैसे विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी कृतियों के माध्यम से कला की विविधता और गहराई को प्रस्तुत किया।
देश के कोने-कोने से आए इन प्रतिभाशाली कलाकारों की रचनाओं ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की आत्मा से जोड़ दिया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, लखनऊ विश्वविद्यालय डॉ. अनिल रस्तोगी उपस्थित रहे।
अति विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. पूर्णिमा तिवारी वरिष्ठ चित्रकार, कानपुर, विशिष्ट अतिथि श्री दीपक कुमार गुप्ता (सचिव, कला निकेतन सोसायटी) एवं श्री उमेश गुप्ता (उपाध्यक्ष, कला निकेतन सोसायटी) ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
आमंत्रित कलाकारों में प्रो. राजेंद्र प्रसाद और प्रो. सुनीता शर्मा की उपस्थिति विशेष रही।

समारोह में कला निकेतन सोसायटी द्वारा विभिन्न विशिष्ट सम्मान प्रदान किए गए —
🏆 कलश रत्न सम्मान 2025 — डॉ. ओमप्रकाश गुप्ता (बनारस)
🏆 रंग साधना सम्मान 2025 —  आरेंद्र चौधरी (लखनऊ)
🏆 स्वर्गीय  भजनलाल वर्मा स्मृति युवा कला प्रेरणा सम्मान 2025 —  सुरेश कुमार सौरभ (बनारस) एवं विवेकानंद रजक (छत्तीसगढ़)

इसके अतिरिक्त 20 आमंत्रित कलाकारों एवं 45 युवा कलाकारों को प्रमाणपत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. अनिल रस्तोगी ने अपने उद्बोधन में कहा —

> “कला समाज की संवेदना को जीवित रखती है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी अभिव्यक्ति का मंच और दिशा दोनों प्रदान करते हैं। ‘कलांश 2.0’ भारतीय कला जगत में एक प्रेरणादायक पहल है।”

प्रदर्शनी के दौरान देशभर के कलाकारों की चित्रकला, मूर्तिकला, फोटोग्राफी और डिजिटल आर्ट की कृतियों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

आम नागरिकों के साथ-साथ कला महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी प्रदर्शनी में उत्साहपूर्वक भाग लिया और नई तकनीकों को समझने का अवसर पाया।

कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
कला निकेतन सोसायटी के मार्गदर्शक एवं कला प्रमोटर श्री राजेंद्र मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि —

> “कलांश 2.0 केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि यह कलाकारों के संवाद, अनुभव और सीख का उत्सव है, जो भविष्य में भारतीय कला को नई दिशा देगा।”

आयोजन की सफलता में मुख्य रूप से – हर्षिका सिंह, मानसी मौर्य, शिवम वर्मा, और अन्य में विमल प्रकाश, आलोक कुमार, अभिनव दीप सहित कला निकेतन सोसायटी की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।

मंच संचालन आशुतोष श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

चार दिनों तक चली यह प्रदर्शनी न केवल कला का उत्सव सिद्ध हुई, बल्कि उसने यह भी साबित किया कि भारतीय कला की जड़ें गहरी हैं और नई पीढ़ी उसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए तत्पर है।

 

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