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काशी बदली अयोध्या बदली अब मथुरा की बारी है….’

अ.भा.भजन प्रतियोगिता में नवीन, अंशिका व स्वरित प्रथम

लखनऊ । ‘धन-दौलत, जमीन आदमी के जाने के साथ ही छूट जाती है पर बड़ी बात ये होगी कि वह अपना ज्ञान नयी पीढ़ी को सौंपकर जाये।’ अपने 60 साल के संगीत के सफर और 71 वर्ष की उम्र का जिक्र करने के साथ संगीतकार केवलकुमार को लाइफ टाइम अवार्ड से सम्मानित करते हुए भजन सम्राट अनूप जलोटा ने उक्त विचार व्यक्त किये। उनकी मौजूदगी में उनके और डा.जया श्रीवास्तव के गाये भजन- बरसाने वाली राधा…. की लांचिंग के संग भजनों की रसधारा श्रोताओं को मधुर भक्तिभावों से भर गयी। संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह गोमतीनगर में आज शाम सुर ताल संगम संस्था का तेरहवें वार्षिकोत्सव का आयोजन था।
भजन सम्राट ने राम भजन- राम रमैया गाये जा में काशी बदली अयोध्या बदली अब मथुरा की बारी है…. से गाना शुरू किया तो श्रोताओं की फरमाइशों की झड़ी लग गयी। आगे उन्होंने- ऐसी लागी लगन…. से श्रोताओं को भावविभोर किया। उन्होंने यहां प्रतियोगियों और कलाकारों को- देखन में छोटे लगें, घाव करे गम्भीर की संज्ञा देते हुये सम्मानित किया। केवलकुमार के लिये उन्होंने कहा कि व्यक्ति ऐसा ही होना चाहिये जो दूसरों को बनाता है। जया श्रीवास्तव को उन्होंने मेहनत कर प्रतिभाओं को खोजने और नये कलाकारों को मौका देने वाला समर्पित संगीतकर्मी बताया।
राम से कृष्ण के भजनों से लेकर निर्गुण रचनाओं से सजे कार्यक्रम में संस्थापिका डा. जया ने संगीत को समर्पित संस्था के विगत वर्षों में खोजी गयी अनगिनत प्रतिभाओं की जानकारी देते हुए पद्मश्री अनूप जलोटा और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में बरसाने वाली राधा… की लांचिंग करते हुए स्क्रीन पर प्रदर्शित किया गया।
बाल, युवा और वरिष्ठ, इन तीन वर्गों में हुई अखिल भारतीय भजन प्रतियोगिता के फाइनल में बाल वर्ग में स्वरित अग्रवाल पहले व अद्विका श्रीवास्तव दूसरे स्थान पर तो नवयुवा वर्ग में अंशिका प्रथम व दिव्यांशु द्वितीय रहे। सीनियर वर्ग में पहले तीन स्थान क्रमशः नवीन चन्द्रा, सुशीलकुमार सिंह राठौर व चंदन रैतानी को मिले। विजेताओं को क्रमशः 31सौ, 21सौ और 11सौ का पुरस्कार, स्मृतिचिन्ह व प्रमाणपत्र दिये गये।
इससे पहले संस्था के बर्लिंग्टन चौराहा स्थित प्रशिक्षण केन्द्र की शुरुआत के साथ इस मौके पर संस्था की वेबसाइट, संस्था गीत की लांचिंग और युवा संगीतकार अभिजीत के नेतृत्व में आकार बैण्ड की भी शुरुआत हो गयी। इस वाद्यवृंद ने- ऐसी लागी लगन…., रंग दे चुनरिया…. और जग में सुंदर हैं दो नाम…., चदरिया झीनी रे झीनी…. और सूरदास के पद- मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो…. जैसे भजन सुनाये। इसी क्रम में 20 दिवसीय भजन कार्यशाला के करीब 40 प्रतिभागियों ने आज सम्मानित निर्देशक संगीतकार केवल कुमार के निर्देशन में मोहक भजन प्रस्तुतियां दीं। प्रतिभावान गायिका शबीना सैफी और ऐमन जावेद फारुकी भी मधुर गीत पेश किये। संस्था के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव व अन्य अतिथियों ने भी विचार व्यक्त किये।

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