मनुस्मृति की मानसिकता’ महिलाओं को नियंत्रित करना चाहती है, इसे बदलना होगा : राहुल गाँधी

नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को भाजपा-आरएसएस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘मनुस्मृति की मानसिकता’ महिलाओं को दबाने और पिंजरे में बंद रख कर उन्हें नियंत्रित की है। उन्होंने कहा कि इसी मानसिकता के खिलाफ उनकी लड़ाई है और इसे बदलना होगा। वह ऐसा हिंदुस्तान चाहते हैं, जहां लड़कों के साथ लड़कियों को भी बराबर की आजादी, सम्मान और अवसर मिले।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार देर शाम महाराष्ट्र के पुणे में ‘छात्रों की गूंज: महिला विशेष महारैली’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान अनेक छात्राओं ने राहुल गांधी के साथ मंच पर आकर संवाद किया और उनके साथ आए दिन सामने आने वाली समस्याओं को साझा किया। इस संवाद के दौरान लोक गायिका नेहा राठौर भी मंच पर पहुंचीं और उन्होंने महिलाओं को डराने-धमकाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए गाना भी सुनाया।

हजारों छात्राओं की भीड़ से खचाखच भरे मैदान के बीच राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के महिला विरोधी बयानों वाले वीडियो भी दिखाए। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लड़कियों का गाली देना कल्चरल शॉक लगता है, जबकि लड़कों के गाली देने से उन्हें कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत के अनुसार इंडिया में दुष्कर्म होते हैं, भारत में नहीं होते। मनोहर लाल खट्टर 80 प्रतिशत मामलों में दुष्कर्म के लिए महिलाओं को ही जिम्मेदार मानते हैं।
छात्राओं से सीधा संवाद करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि महिलाओं को दबाने वाली यह मानसिकता मनुस्मृति से आती है और इसी मानसिकता से आज उनकी लड़ाई चल रही है। इस मानसिकता के अनुसार लड़कियों को पिंजरे में बंद होना चाहिए और उन पर नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मनुस्मृति के अनुसार महिलाओं की बाल्यावस्था में पिता, युवावस्था में पति और बुढ़ापे में पुत्र रक्षा करता है। महिलाएं कभी स्वतंत्रता के योग्य नहीं होती।
राहुल गांधी ने इसे शर्मनाक बताया और कहा कि महिलाओं की पहचान उनकी अपनी है। उनकी पहचान किसी रिश्ते से बढ़कर है। उन्होंने छात्राओं को संदेश देते हुए कहा कि वे पिंजरे और पितृसत्ता को तोड़ें। उन्होंने कहा कि देश की असली सबसे बड़ी ताकत यही है कि हमारी महिलाएं आत्मनिर्भर बनें, अपने हक के लिए खड़ी हों और खुद पर भरोसा रखें।
राहुल गांधी ने देश में महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज 60 प्रतिशत महिलाएं अकेली घर से बाहर नहीं जा सकतीं। 45 प्रतिशत लड़कियों को शादी और घर की जिम्मेदारी के चलते पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। उन्होंने बताया कि सिर्फ आठ प्रतिशत महिलाओं के पास ही जमीन का मालिकाना हक है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि करीब 80 प्रतिशत महिलाओं के साथ उत्पीड़न और 29 प्रतिशत महिलाओं के साथ शारीरिक हिंसा होती है। सालाना साढ़े चार लाख बेटियां भ्रूण हत्या का शिकार होती हैं। हिंसा से बचने के लिए 50 प्रतिशत महिलाओं को शिक्षा और नौकरी छोड़नी पड़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि शर्म के कारण यौन हिंसा के 99 प्रतिशत मामले रिपोर्ट तक नहीं होते हैं। 84 प्रतिशत महिलाओं को काम करने के लिए घर से इजाजत लेनी पड़ती है। महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले 25 प्रतिशत कम वेतन मिलता है और उन्हें सुरक्षित यात्रा के नाम पर सालाना 17,500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं।
छात्राओं की उमड़ी भारी भीड़ की नब्ज पर हाथ रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि लड़कियों को औसतन प्रतिदिन घर में साढे पांच घंटे काम करना पड़ता है, जबकि लड़कों को सिर्फ 30 मिनट काम करना पड़ता है। लड़के बाहर जा सकते हैं और देरी से आ सकते हैं, लेकिन लड़कियों को रात के आठ बजे तक घर वापस लौटना पड़ता है। लड़कों को भर्ती परीक्षा देने के कई मौके मिलते हैं। जबकि छात्राओं को ज्यादा मौके नहीं मिल पाते, क्योंकि कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी जाती है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि महिलाओं को अक्सर सिर्फ तीन भूमिकाओं में देखा जाता है; बेटी, पत्नी या माँ। इनमें से किसी भी भूमिका में कोई बुराई नहीं है। लेकिन ये महिलाओं की एकमात्र पहचान नहीं हो सकतीं। उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाओं की पहचान सिर्फ किसी पुरुष के साथ उनके रिश्ते से ही तय की जाती है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत 70 करोड़ महिलाओं के पास उनका अपना सपना और विज़न है, लेकिन उन्हें दबाया जा रहा है।


