विमोचित हुई ‘विस्पर आफ द वाइल्ड’
बलरामपुर गार्डन में 23वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला

लखनऊ । बलरामपुर गार्डन में चल रहे 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में बच्चों के लिए हिन्दी अंग्रेजी की ऐ ये तोतस्वीरों से भरी किताबों की आकर्षक सामग्री है।
वैदिक साहित्य केन्द्र चर्चित मेले में सरदार भगत सिंह, स्वामी श्रद्धानंद, दयानंद सरस्वती और उनके क्रांतिकारी शिष्य, भगवान को क्यों मानें जैसी बाल पुस्तकें कामिक्स स्टाइल में लेकर आया है। रेख़्ता के स्टाल पर बच्चों की नज्में जैसी पुस्तकें हैं। हिन्दी संस्थान के स्टाल पर मंत्र, गिल्ली डंडा, पंच परमेश्वर, आत्माराम जैसी प्रेमचंद की बाल कहानियों की किताबें मात्र 15 रुपये में मिल रही हैं। प्रकाशन विभाग बाल भारती पत्रिका सहित बहुत सी बालोपयोगी साहित्य लेकर आया है। गीता प्रेस के स्टाल पर प्रेरक बाल कहानियां, बालकों को सीख, प्राचीन बाल कहानियां जैसी किताबें हैं। यूं तो साहित्य सरोवर, राशिका इंटरप्राइजेज, पद्म बुक, पैराडाइज बुक जैसे लगभग मेले के हर स्टाल पर बाल साहित्य खूब है, लेकिन सस्ता साहित्य मंडल, प्रभात, निखिल प्रकाशन जैसे कई स्टालों पर बच्चों की किताबों का अलग सेक्शन है। तस्वीरों में रंग भरने वाली, पजल बुक, लेखन अभ्यास करने वाली किताबें हर चौथे पांचवें स्टाल पर रमण मिलेंगी।
सुबह लक्ष्य संस्था और शाम को अवध साहित्य अकादमी के कवि सम्मेलन के बीच अपूर्वा संस्था का काव्य व सम्मान समारोह और साहित्य साधक का ममता पंकज के संयोजन में काव्यपाठ समारोह भी चला। रांझा मेरा पुस्तक के विमोचन के साथ अपूर्वा के इमरोज़ और मजाज को समर्पित समारोह में पद्मश्री विद्याविंदु सिंह, आशिमा सिंह, कथक गुरु सुरभि सिंह और संयोजक संजय मेहरोत्रा हमनवां ने आशीष सिंह, आराधना सिकरवार, कुमार विकास और ममता को सम्मानित किया।
मीडिया फाउण्डेशन की ओर से डा. सुल्तान शाकिर हाशमी के संयोजन में उनके लिखे ग्रंथ भारतीय संविधान और डा.भीमराव अम्बेडकर का विमोचन हुआ। यहां न्यायमूर्ति कमर हुसैन रिजवी, मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली, पूर्व आइएएस चंद्रपाल, वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी, अरविंद सिंह बिष्ट और विद्वज्जन उपस्थित थे।
*सामने आयी काफी टेबल बुक विस्पर आफ द वाइल्ड*
मेला आयोजक संस्था फोर्स वन की ओर से ब्रजेश कुमार मिश्र की काफी टेबल बुक विस्पर आफ द वाइल्ड का विमोचन पूर्व डीजीपी व सांसद ब्रजलाल, पूर्व आइएएस रामकेवल, पूर्व आईएफएस अधिकारी आरएस भदौरिया, पूर्व आइएएस संजय कुमार, वरिष्ठ छायाकार अनिल रिसाल सिंह ने मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल, डा.रजत ढेसी, योगेश भाटिया और राहुल मिश्रा की उपस्थिति में किया। ब्रजलाल ने पर्यावरण की दृष्टि से वन्यजीव संरक्षण की जरूरत बतायी और पीलीभीत व काजीरंगा के तजुर्बे बताये। पुस्तक के लेखक ने कहा कि ये केवल जंगल की कहानी नहीं मेरी यात्राओं का वृत्तांत है। वरिष्ठ छायाकार अनिल रिसाल ने पर्यावरण को सहेजने की जरूरत बतायी। आरएस भदौरिया ने कानपुर चिड़ियाघर की स्थापना से जुड़े किस्से साझा करते हुए बताया कि वन्य जीव प्रबंधन कठिन है। साठ के दशक में शिकारी हर साल परमिट पर 60-70 टाइगर मार देते थे। वन्यजीव सम्पदा का खूब कारोबार था। पूर्व आइएएस रामकेवल ने जंगल के अनुभव पेश किये। सर्वेश अस्थाना ने वन्यजीव फोटोग्राफी को धैर्य का श्रमसाध्य काम बताया।
द्वितीय मंच पर
दूसरे मंच पर दिन में ओपेन माइक के संग निधि बाजपेयी का कार्यक्रम चला। यहीं शाम को नाट्यकार राकेश वेदा की अध्यक्षता में राकेश कबीर के काव्य संग्रह नदियां ही राह बताएंगी व कुंवरवर्ती कैसे बहे का विमोचन हुआ। यहां मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली और प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।
नि: शुल्क प्रवेश वाला ये मेला रोज सुबह 11 बजे से रात नौ बजे तक जारी इस मेले में खरीदी गई हर पुस्तक पर कम से कम 10 प्रतिशत की छूट मिल रही है।
फ़ोर्स वन द्वारा आयोजित पुस्तक मेले के सहयोगी संस्थान यूपी मेट्रो, रेडियोसिटी, ओरिजिंस, किरण फाउंडेशन, ज्वाइन हैंड्स फाउंडेशन, लोकआंगन, विश्वम् फाउंडेशन, विजय स्टूडियो, गोल्डेन ग्रा स और कविता किस्से कहानियां हैं।
आज के कार्यक्रम/5 अक्टूबर
सुबह 11:00 बजे पुस्तक विमोचन- नवसृजन,
अपराह्न 12: 30 बजे काव्य समारोह- अगीत परिषद,
अपराह्न 2: 00 बजे
पुस्तक विमोचन- डा.करुणा पाण्डेय,
अपराह्न 3: 00 बजे पुस्तक विमोचन- जन संस्कृति मंच,
शाम 5: 00 बजे
पुस्तक विमोचन- रहीस सिंह,
शाम 6: 00 बजे
समारोह- साहित्य सभा



