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संघ साहित्य के समग्र चिंतन प्रवाह पर संगोष्ठी एवं अभिनंदन समारोह संपन्न

लखनऊ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद लखनऊ दक्षिण इकाई द्वारा रविवार को अभिनंदन समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संघ साहित्य समग्र चिंतन प्रवाह विषयक संगोष्ठी का संचालन दक्षिण इकाई की अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. नीतू शर्मा ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं संगीता पाल द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। राजीव वत्सल ने परिषद गीत प्रस्तुत किया। मंचासीन विद्वानों का पुष्पमाला, अंगवस्त्र एवं पौधा भेंट कर अभिनंदन किया गया।

विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ. बलजीत श्रीवास्तव ने संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर तथा लगभग पंद्रह सौ संघ साहित्य की सूची पर चर्चा करते हुए विविध विधागत उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। दक्षिण इकाई की डॉ. मधुलिका चौधरी ने अपने वक्तव्य में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से भारतीय संस्कृति के क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्र पुनर्निमाण हेतु प्रकृति और विज्ञान के समन्वय पर बल दिया।

प्रांत अध्यक्ष विजय त्रिपाठी ने संघ के इतिहास तथा स्वतंत्रता आंदोलन में संघ गीतों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी एवं मुख्य अतिथि डॉ. पवन पुत्र बादल का अभिनंदन किया गया।

डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी ने संघ की विचारधारा और संघ साहित्य के राष्ट्रीय योगदान पर विचार व्यक्त किए। विशिष्ट वक्ता प्रो. हरिशंकर मिश्र ने संघ साहित्य के समग्र चिंतन प्रवाह पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्र की सुदृढ़ता और विकास के मार्ग को सशक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने वैदिक सूक्तियों के माध्यम से राष्ट्र चेतना का भाव स्पष्ट किया।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवन पुत्र बादल ने भारतीय और पाश्चात्य परंपराओं की तुलना करते हुए संघ के इतिहास और उससे जुड़े कार्यकर्ताओं के त्याग का स्मरण किया।

अंत में डॉ. पूनम सिंह ने अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर संगीता पाल द्वारा भारत माता गीत एवं राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया गया। डॉ. कुमुद पाण्डे के शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में डॉ. धीरेंद्र कौशल, डॉ. सुरसरि तरंग मिश्र, डॉ. जाह्नवी अवस्थी, ज्योति किरन रतन, प्रांत प्रचार मंत्री सर्वेश पाण्डे ‘विभि’, महानगर इकाई अध्यक्ष निर्भय नारायण गुप्त, महामंत्री डॉ. ममता पंकज, डॉ. एस.के.गोपाल सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।

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