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46वें राष्ट्रीय कलमवीर दिवस पर साहित्य और पत्रकारिता की दिग्गज हस्तियों का महाकुंभ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान में 46वें राष्ट्रीय कलमवीर दिवस के अवसर पर भव्य सेमिनार एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। ‘साहित्य एवं पत्रकारिता कल और आज’ विषय पर आयोजित इस गरिमामय समारोह में साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, प्रशासन, कला और समाजसेवा के क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत कर अपने विचार व्यक्त किए। वरिष्ठ साहित्यकार एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री महेश चन्द्र द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में पूर्व सांसद लोकसभा  ज़फ़र अली नक़वी मुख्य अतिथि तथा एरा मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. अब्बास अली मेहंदी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिविशिष्ट अतिथियों में हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि श्री उदय प्रताप सिंह, पद्मश्री डॉ. विद्या बिन्दु सिंह, डॉ. अनीस अंसारी, वरिष्ठ हास्य कवि श्री सूर्य कुमार पाण्डेय, उत्तर प्रदेश के उपलोकायुक्त श्री दिनेश कुमार सिंह, दूरदर्शन लखनऊ के उपनिदेशक श्री आत्म प्रकाश मिश्र, प्रो. डॉ. साबिरा हबीब, मंजू सक्सेना, पत्रकार गुफरान नसीम तथा बाल प्रतिभा दानिया शेख़ सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे। वक्ताओं ने राष्ट्रीय कलमवीर दिवस की महत्ता रेखांकित करते हुए साहित्य और पत्रकारिता की बदलती भूमिका, वर्तमान चुनौतियों और सामाजिक दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य अतिथि पूर्व सांसद श्री ज़फ़र अली नक़वी ने वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. हाशमी हिन्दी, उर्दू, ब्रज, अवधी, फारसी और अंग्रेज़ी भाषाओं के ज्ञाता हैं तथा उनकी अब तक 72 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी पुस्तकों में शायरी, अदब, अफ़साने, इतिहास, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, शिक्षा और पत्रकारिता जैसे विविध विषय समाहित हैं। उनकी नई पुस्तक ‘भारतीय संविधान और डॉ. भीमराव अम्बेडकर’ भी प्रकाशित हुई है। श्री नक़वी ने कहा कि डॉ. हाशमी राज्य मुख्यालय पर मान्यताप्राप्त, निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं तथा पांच सौ से अधिक सम्मानों से अलंकृत हो चुके हैं। उन्होंने योजना आयोग, भारत सरकार में सलाहकार सदस्य के रूप में योगदान दिया और यूनिसेफ, रोटरी, वर्ल्ड लिटरेरी कांग्रेस तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़कर समाजसेवा की। सूचना का अधिकार कानून के लिए चलाए गए उनके अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल में सूचना का अधिकार अधिनियम के रूप में देशवासियों को यह अधिकार मिला। श्री नक़वी ने कहा कि किसी साहित्यकार और पत्रकार के नाम पर उनके जीवनकाल में राष्ट्रीय दिवस का आयोजन होना और वरिष्ठ साहित्यकारों एवं पत्रकारों द्वारा उसे मनाया जाना अपने आप में एक बड़ी और प्रेरणादायक मिसाल है।
एरा मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. अब्बास अली मेहंदी ने कहा कि डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी ने जहां साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं, वहीं सैकड़ों मेडिकल कैंपों के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता भी की है। साहित्यिक सक्रियता और सामाजिक सरोकारों का यह समन्वय ही उन्हें समाज में अलग पहचान दिलाता है। समारोह में मौलाना सैयद तनवीर-उल-हसन ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. हाशमी के योगदान और उनकी सेवाओं की सराहना की।

राष्ट्रीय कलमवीर दिवस वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित किया जाता है। वर्ष 1980 से निरंतर मनाया जा रहा यह आयोजन साहित्य, पत्रकारिता और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित करने की एक विशिष्ट परंपरा बन चुका है। अवध साहित्य अकादमी, नवसृजन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, अखिल भारतीय अगीत परिषद तथा मीडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में डॉ. हाशमी की बहुभाषी लेखन प्रतिभा, निष्पक्ष पत्रकारिता, साहित्यिक उपलब्धियों और सामाजिक प्रतिबद्धता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उनकी प्रकाशित 72 पुस्तकों में साहित्य से लेकर इतिहास, शिक्षा और पत्रकारिता तक विविध विषयों का समावेश है। सूचना के अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के अभियान तथा जरूरतमंदों के लिए चिकित्सा शिविरों के आयोजन में उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व को साहित्य, पत्रकारिता और जनसेवा के समन्वय का उदाहरण बताया।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री महेश चन्द्र द्विवेदी ने साहित्य और पत्रकारिता की सामाजिक भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय कलमवीर दिवस की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक निरंतर इस दिवस का आयोजन होना अत्यंत सराहनीय और बधाई के योग्य है। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता की परंपराओं को सहेजने तथा समाज में उनके सकारात्मक योगदान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सेमिनार में दूरदर्शन लखनऊ के उपनिदेशक श्री आत्म प्रकाश मिश्र ने ‘साहित्य एवं पत्रकारिता कल और आज’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अतीत में हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता का स्वर्णिम युग रहा है। महादेवी वर्मा और अमृतलाल नागर जैसे साहित्यकारों से लेकर कुलदीप नैय्यर जैसे पत्रकारों तक अनेक महान विभूतियों ने इन क्षेत्रों को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। उन्होंने वर्तमान साहित्य और पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उनके संबोधन ने साहित्यिक मूल्यों, पत्रकारिता की विश्वसनीयता और समकालीन चुनौतियों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाया।
समारोह में हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि श्री उदय प्रताप सिंह, पद्मश्री डॉ. विद्या बिन्दु सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अनीस अंसारी, वरिष्ठ हास्य कवि एवं साहित्यकार श्री सूर्य कुमार पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार श्री हेमन्त तिवारी, उत्तर प्रदेश के उपलोकायुक्त श्री दिनेश कुमार सिंह तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के रूसी भाषा विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. डॉ. साबिरा हबीब ने अपने संबोधनों से समारोह को गरिमा प्रदान की। इसके अतिरिक्त मंजू सक्सेना, पत्रकार गुफरान नसीम और बाल प्रतिभागी दानिया शेख़ सहित अन्य वक्ताओं ने भी राष्ट्रीय कलमवीर दिवस के महत्व तथा साहित्य एवं पत्रकारिता के विविध पहलुओं पर विचार व्यक्त किए।
साहित्य एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय योगदान देने वाली हस्तियों को समारोह में सम्मानित किया गया। कलमवीर-चक्र सम्मान-2026 के लिए प्रसिद्ध वैज्ञानिक, फिल्म, टेलीविजन और रंगमंच के वरिष्ठ कलाकार पद्मश्री डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी, पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. जय प्रकाश सैनी, लेखक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा (आईएएस), वरिष्ठ साहित्यकार एवं ग्रामीण विकास विभाग, नई दिल्ली के निदेशक श्री पवन कुमार (आईएएस) तथा टाइम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार श्री अरविन्द सिंह बिष्ट के नाम शामिल रहे। समारोह में इन विभूतियों के योगदान को सराहते हुए सम्मान प्रदान किए गए।
कलमवीर-रत्न सम्मान-2026 से पूर्व डीएसपी एवं उर्दू शायर श्री चरन सिंह ‘बशर’, शिक्षाविद्, लेखक एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. शान्त्वना दूबे तिवारी, इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी की संरक्षक एवं समाजसेवी डॉ. सुषमा सिंह तथा शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ. सुधा बाजपेई को सम्मानित किया गया। प्रोफेसर (डॉ.) विष्णु गिरि गोस्वामी स्मृति सम्मान-2026 के अंतर्गत वरिष्ठ साहित्यकार श्री नरेन्द्र भूषण तथा डॉ. रंगनाथ मिश्र ‘सत्य’ स्मृति सम्मान-2026 के अंतर्गत वरिष्ठ साहित्यकार श्री राजेश द्विवेदी को सम्मानित कर उनकी अदबी, सहाफती और सामाजिक सेवाओं की सराहना की गई।

इसी क्रम में डॉ. उमंग खन्ना, डॉ. आदर्श त्रिपाठी, पत्रकार गुफरान नसीम, रूपा पांडेय सतरूपा, मंजू सक्सेना, डॉ. सुधा मिश्रा, मनु बाजपेई, अखिलेश कुमार सिंह तथा कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी अब्दुल वहीद को भी सम्मानित किया गया। अंग्रेज़ी में शानदार प्रस्तुति देने के लिए बाल प्रतिभागी दानिया शेख़ को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। समारोह में सम्मानित सभी प्रतिभागियों की उपलब्धियों और सेवाओं की सराहना की गई।
समारोह के आरंभ में डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी की लिखित ग़ज़लों को प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक श्री मिथिलेश लखनवी ने खूबसूरत लबो-लहजे में प्रस्तुत किया। उनकी सुरीली गायकी और भावपूर्ण अंदाज ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर श्री रत्नेश कुमार मिश्र ने प्रभावशाली संगत कर कार्यक्रम को संगीतमय बना दिया। इस प्रस्तुति ने समारोह के साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण को और अधिक जीवंत कर दिया।

समारोह का कुशल संचालन डॉ. योगेश गुप्त और डॉ. सुधा मिश्रा ने किया। वाणी वंदना रूपा पांडेय सतरूपा ने प्रस्तुत की, जबकि अतिथियों का स्वागत मनु बाजपेई ने किया। शाहज़ेब हाशमी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन के दौरान साहित्यिक गरिमा, सांस्कृतिक परंपरा और सम्मान की भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार सर्वश्री त्रिवेणी प्रसाद दूबे ‘मनीष’, महेंद्र भीष्म, कुमार तरल, डॉ. सत्यदेव प्रसाद द्विवेदी ‘पथिक’, हौसला प्रसाद त्रिपाठी, रूपा पांडेय सतरूपा, विजय कुमारी मौर्य, अनिल किशोर शुक्ल और राम प्रकाश शुक्ल सहित बड़ी संख्या में अदीब, साहित्यकार, पत्रकार एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। 46वें राष्ट्रीय कलमवीर दिवस ने साहित्य और पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा को सम्मानित करने के साथ ही समकालीन चुनौतियों पर विचार-विमर्श तथा समाज के प्रति रचनाकारों और पत्रकारों की जिम्मेदारी को रेखांकित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

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