अनुचित स्पर्श, लैंगिक संकेत और अशोभनीय व्यवहार आयेंगे पॉक्सो अधिनियम के दायरे में : आशु नैना मौर्य
बालिका विद्यालय में पॉक्सो अधिनियम पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

लखनऊ : उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार गांधी जयंती के अवसर पर बालिकाओं को बच्चों की सुरक्षा, उनके विधिक अधिकारों तथा लैंगिक अपराधों से संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, लखनऊ में आज ‘जागरूकता ही बचाव है’ विषय के अंतर्गत पॉक्सो अधिनियम, 2012 के विधिक प्रावधानों एवं उनके परिणामों पर विशेष जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आशु नैना मौर्य, स्पेशल जुडिशियल मजिस्ट्रेट, सीबीआई, लखनऊ को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. लीना मिश्र ने विद्यालय परिवार की ओर से उन्हें अंगवस्त्र पहनाकर तथा पौधा भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। पौधा भेंट करने के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और संवेदनशील सामाजिक मूल्यों का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. लीना मिश्र ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण केवल माता-पिता अथवा परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विद्यालय और समाज की भी समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विद्यालय बच्चों के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए यह आवश्यक है कि छात्राओं को उनके अधिकारों, सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार के बीच अंतर तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि जागरूकता किसी भी प्रकार के शोषण और अपराध की रोकथाम की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है। ऐसी जानकारी छात्राओं को भयभीत करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सजग, आत्मविश्वासी और सुरक्षित बनाने के लिए दी जानी चाहिए। कार्यक्रम में छात्राओं को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012, अर्थात पॉक्सो अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई। इस अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को ‘बालक’ माना गया है और बच्चों के विरुद्ध विभिन्न प्रकार के लैंगिक अपराधों, लैंगिक उत्पीड़न तथा अश्लील सामग्री के लिए बच्चों के उपयोग जैसे कृत्यों को दंडनीय बनाया गया है। अधिनियम में अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार अलग-अलग दंड का प्रावधान है। मुख्य अतिथि आशु नैना मौर्य ने छात्राओं से संवाद करते हुए पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों को सरल एवं सहज भाषा में समझाया। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को यह समझाया कि किसी भी प्रकार का अनुचित स्पर्श, लैंगिक संकेत, अशोभनीय व्यवहार, धमकी अथवा डिजिटल माध्यम से किया जाने वाला उत्पीड़न गंभीर विषय हो सकता है। पॉक्सो अधिनियम में लैंगिक उत्पीड़न के अंतर्गत बच्चे को अश्लील सामग्री दिखाना तथा डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कुछ प्रकार का लैंगिक संपर्क अथवा पीछा करना भी शामिल किया गया है। उन्होंने छात्राओं को इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के संदर्भ में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। डिजिटल माध्यमों पर किसी अनजान व्यक्ति से बातचीत करते समय व्यक्तिगत जानकारी, तस्वीरें, वीडियो, पासवर्ड अथवा अन्य संवेदनशील सामग्री साझा न करने तथा किसी प्रकार की आपत्तिजनक या असहज सामग्री सामने आने पर उसे आगे प्रसारित न करने के प्रति जागरूक किया गया। बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री के निर्माण, उपयोग तथा कुछ परिस्थितियों में उसके संग्रहण या प्रसारण से संबंधित कृत्यों के लिए पॉक्सो अधिनियम में विशेष प्रावधान हैं। संवाद के दौरान छात्राओं तथा शिक्षिकाओं ने पॉक्सो अधिनियम, बच्चों की सुरक्षा, ऑनलाइन व्यवहार और ऐसी परिस्थितियों में उठाए जाने वाले कदमों से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। आशु नैना मौर्य ने प्रत्येक प्रश्न का उत्तर व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से अत्यंत सरल भाषा में दिया। उन्होंने छात्राओं को समझाया कि यदि कभी उन्हें स्वयं अथवा किसी अन्य बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार, शोषण या उत्पीड़न की जानकारी मिले तो उसे छिपाना नहीं चाहिए और किसी विश्वसनीय वयस्क अथवा सक्षम प्राधिकारी तक सूचना पहुंचाना आवश्यक है। पॉक्सो कानून में यौन अपराधों की रिपोर्टिंग के संबंध में भी कानूनी दायित्व निर्धारित किए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को यह संदेश भी दिया गया कि किसी घटना के लिए पीड़ित बच्चे को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार, विद्यालय और समाज के बीच विश्वास एवं संवाद का वातावरण आवश्यक है। छात्राओं से कहा गया कि वे किसी भी असहज परिस्थिति में चुप रहने अथवा भयभीत होने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति से सहायता मांगें। कार्यक्रम के समानांतर छात्राओं ने पॉक्सो अधिनियम और बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने वाले पोस्टर भी तैयार किए। पोस्टरों में ‘जागरूकता ही बचाव है’, बाल सुरक्षा, सुरक्षित व्यवहार, डिजिटल सावधानी तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने जैसे संदेशों को रचनात्मक ढंग से अभिव्यक्त किया गया। इन पोस्टरों में छात्राओं की कलात्मक प्रतिभा के साथ-साथ विषय की उनकी समझ भी दिखाई दी। पोस्टर बनाने वाली छात्राओं को 2 अक्टूबर को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. लीना मिश्र ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी आज के समय में शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि छात्राओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी होने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे असुरक्षित परिस्थितियों को पहचानने में अधिक सक्षम बनती हैं। उन्होंने अतिथि वक्ता आशु नैना मौर्य के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कानून से जुड़े विशेषज्ञ के साथ प्रत्यक्ष संवाद ने छात्राओं को इस महत्वपूर्ण विषय को समझने का व्यावहारिक अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा देना नहीं, बल्कि छात्राओं को जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के लिए भी तैयार करना है। विधिक जागरूकता, स्वास्थ्य, आत्मरक्षा, डिजिटल सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे विषय छात्राओं के समग्र व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कार्यक्रम के आयोजन में पूनम यादव, अनीता श्रीवास्तव, माधवी सिंह एवं प्रतिभा रानी का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर उमा रानी यादव, सीमा आलोक वार्ष्णेय, शालिनी श्रीवास्तव, उत्तरा सिंह, रागिनी यादव, मंजुला यादव एवं मीनाक्षी गौतम सहित विद्यालय की शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम ने छात्राओं को यह समझने का अवसर दिया कि कानून की जानकारी केवल परीक्षा या पुस्तकीय ज्ञान का विषय नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर यह किसी बच्चे के अधिकार और सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। ‘जागरूकता ही बचाव है’ के संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग, सुरक्षित परिस्थितियों की पहचान करने में सक्षम और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करने वाला सार्थक प्रयास रहा।



